Psycho Husband Innocent Wife Ch. 1

Psycho Husband innocent wife - Chapter 1(जूही नंगे पैरों से भाग रही थी)

Posted by Moon Star • Apr 28, 2026 06:31 PM

बारिश की बूंदें समुद्र की काली सतह पर लगातार टूट रही थीं।

मुंबई की रात वैसे भी कभी पूरी शांत नहीं होती… लेकिन आज हवा में कुछ अलग था। डर। बेचैनी। पीछा किए जाने का एहसास।

जूही नंगे पैरों से भाग रही थी।

लकड़ी के उस लंबे जेटी ब्रिज पर उसके कदम बार-बार फिसल रहे थे। सांस इतनी तेज़ चल रही थी कि सीना दर्द करने लगा था। भीगे बाल चेहरे से चिपक चुके थे, और रेड कलर साड़ी का पल्लू आधा कंधे से उतर चुका था।

लेकिन वो रुकी नहीं।

पीछे देखने की भी हिम्मत नहीं हुई उसे।

क्योंकि उसे पता था—

अगर वो पीछे हुआ…

तो आज बचना नामुमकिन है।

उसकी उंगलियां कांप रही थीं। फोन उसने पहले ही समुद्र में फेंक दिया था। कार्ड्स… पैसे… सब छोड़ दिए थे।

बस खुद को बचाना चाहती थी।

एक महीना।

सिर्फ एक महीना हुआ था उस शादी को…

और उसे लगने लगा था जैसे वो किसी इंसान के साथ नहीं… किसी खूबसूरत पिंजरे में बंद है।

एक ऐसा पिंजरा जहां हर चीज़ perfect थी।

महंगे कपड़े।

डायमंड।

बड़ा बंगला।

Servants।

Luxury।

लेकिन सांस लेने की आज़ादी नहीं।

जूही की आंखों में पानी भर आया।

उसने कदम और तेज़ कर दिए।

आगे छोटी-छोटी नावें लहरों के साथ हिल रही थीं। अगर वो किसी तरह दूसरी तरफ पहुंच जाए… शायद बच सकती है।

शायद।

तभी—

पीछे अचानक कार के ब्रेक की आवाज़ गूंजी।

उसके कदम वहीं रुक गए।

धीरे-धीरे उसने पीछे देखा।

काली Rolls Royce।

हेडलाइट्स सीधी उसकी आंखों पर पड़ रही थीं।

जूही का गला सूख गया।

नहीं…

नहीं…

उसने खुद से कहा था वो उसे ढूंढ नहीं पाएगा।

इतनी जल्दी तो बिल्कुल नहीं।

कार का दरवाज़ा खुला।

और वो बाहर उतरा।

ब्लैक शर्ट।

भीगे हुए पीछे सेट बाल।

महंगी घड़ी की चमक।

और वो चेहरा…

इतना खतरनाक होकर भी इतना आकर्षक कोई कैसे लग सकता था?

अगस्त्या रंधावा।

मुंबई का वो आदमी जिससे लोग हाथ मिलाने से पहले भी दो बार सोचते थे।

उसकी चाल में कोई जल्दी नहीं थी।

जैसे उसे पहले से पता था कि जूही कहीं नहीं जा सकती।

जूही के कदम अपने आप पीछे हटे।

दिल अब इतनी जोर से धड़क रहा था कि उसे खुद अपनी सांसें सुनाई नहीं दे रहीं थीं।

अगस्त्या उसके सामने आकर रुक गया।

कुछ सेकंड…

बस उसे देखता रहा।

उस नजर में गुस्सा कम था।

जुनून ज्यादा।

ऐसा जुनून जो इंसान को प्यार नहीं… मालिकियत तक ले जाता है।

उसकी नजरें जूही के चेहरे से हट ही नहीं रही थीं।

डरी हुई।

कांपती हुई।

फिर भी… बेहद खूबसूरत।

बारिश की बूंदें उसकी पलकों पर अटक रही थीं। होंठ कांप रहे थे। गाल भीग चुके थे।

और अगस्त्या…

वो जैसे उसे ऐसे देखकर और खतरनाक हो गया।

उसने हल्का-सा सिर टेढ़ा किया।

“इतनी दूर आ गई तुम…”

उसकी भारी आवाज़ बारिश के बीच भी साफ सुनाई दी।

जूही ने होंठ भींच लिए।

“प्लीज…” उसकी टूटी आवाज़ निकली, “मुझे जाने दो…”

अगस्त्या की आंखों में कुछ चमका।

जैसे वो यही सुनना चाहता था।

वो धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा।

जूही पीछे हटी।

लेकिन पीछे सिर्फ समुद्र था।

अब उनके बीच बस कुछ इंच का फासला बचा था।

जूही की सांस अटक गई।

उससे अगस्त्या की खुशबू तक महसूस हो रही थी—महंगा perfume… बारिश… और कुछ ऐसा जो सिर्फ उसी से जुड़ा था।

Danger।

अगस्त्या ने नीचे झुककर उसका चेहरा देखा।

“तुम्हें लगता है…” उसने बेहद शांत आवाज़ में कहा, “तुम मुझसे भाग सकती हो?”

जूही की आंखों से आंसू निकल पड़े।

“मैं वहाँ नहीं रह सकती…”

पहली बार अगस्त्या के चेहरे पर हल्का बदलाव आया।

उसकी jaw कस गई।

लेकिन अगले ही पल वो फिर शांत दिखने लगा।

यही चीज़ सबसे ज्यादा डरावनी थी।

वो गुस्से में भी चिल्लाता नहीं था।

बस और खामोश हो जाता था।

अगस्त्या ने हाथ बढ़ाकर जूही के गीले बाल कान के पीछे किए।

जूही का पूरा शरीर सिहर गया।

“तुम्हें पता है…” उसने धीमे से कहा, “पूरे मुंबई में किसी की हिम्मत नहीं कि मेरी चीज़ को हाथ लगाए।”

जूही ने तुरंत उसकी तरफ देखा।

“मैं कोई चीज़ नहीं हूं।”

कुछ पल की खामोशी।

फिर…

अगस्त्या मुस्कुराया।

धीमी। खतरनाक मुस्कान।

“यही attitude मुझे पसंद है।”

जूही का दिल बैठ गया।

वो उसे समझ ही नहीं पाती थी।

कब प्यार से बात करेगा…

कब डराएगा…

कब जुनूनी हो जाएगा…

कुछ पता नहीं चलता था।

तभी अगस्त्या ने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया।

जूही डरकर पीछे हटना चाहती थी, लेकिन उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी।

“छोड़िए मुझे—”

“शांत।”

बस एक शब्द।

लेकिन जूही सच में चुप हो गई।

अगस्त्या ने अपनी कोट उतारी… और उसके कंधों पर डाल दी।

जूही ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।

बारिश अब भी दोनों को भिगो रही थी।

“तुम बीमार पड़ जाओगी,” उसने बिल्कुल सामान्य लहजे में कहा।

जैसे अभी कुछ हुआ ही नहीं।

जूही की आंखें भर आईं।

यही तो सबसे बड़ी समस्या थी।

वो राक्षस भी लगता था…

और कभी-कभी इतना ख्याल रखने वाला कि उससे और डर लगे।

अगस्त्या उसके करीब झुका।

इतना करीब कि उसकी आवाज़ सिर्फ जूही तक पहुंचे।

“एक बात याद रखना, स्वीटहार्ट…”

उसकी उंगलियां धीरे-धीरे जूही की हथेली पर कस गईं।

“भागने की कोशिश तुम्हें मुझसे दूर नहीं ले जाती…”

उसने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—

“बस मुझे और dangerous बना देती है।”

जूही की सांस वहीं अटक गई।

और अगले ही पल—

अगस्त्या उसे अपनी तरफ खींचकर Rolls Royce की तरफ ले जाने लगा।

समुद्र की लहरें पीछे लगातार टकरा रही थीं…

जैसे रात खुद उसे चेतावनी दे रही हो।

अगस्त्या की उंगलियों की कसावट के बीच… जूही की आंखें अचानक कहीं दूर खो गईं।

जैसे वक्त पीछे मुड़ गया हो…

जहां इस कहानी की शुरुआत हुई थी।

एक रोशनी से जगमगाता हुआ शादी का पंडाल… ढोल की थाप, हंसी की आवाज़ें, और बीचों-बीच सजा हुआ स्टेज जहां संगीत का प्रोग्राम चल रहा था।

स्टेज पर एक लड़की नाच रही थी—

नीले रंग का अनारकली सूट, जिस पर हल्की कढ़ाई चमक रही थी। उसके सीधे, सिल्की बाल कमर तक गिर रहे थे—हर घूम के साथ लहराते हुए। उसके चेहरे पर घूंघट था, फिर भी उसकी खूबसूरती जैसे उस पतले कपड़े से भी बाहर झलक रही थी।

उसकी हर मूवमेंट में नज़ाकत थी… हर स्टेप में आत्मविश्वास।

लोगों की नजरें उसी पर टिकी हुई थीं।

पास ही सोफे पर बैठी एक औरत ने उसे ध्यान से देखा, फिर अपने पास बैठी दूसरी महिला के हाथ पर हल्का-सा थपकी देते हुए बोली—

“हाए रब्बा… ये कुड़ी किन्नी सोनी ऐ…”

उसकी आंखों में चमक आ गई।

“इसका व्या तो मैं अपने मुंडे दे नाल करवाऊंगी। लेकिन ये है कौन ?”

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