Mere Saiya psycho Ch. 1

मेरा सैयां साइको: - Chapter 1

Posted by Minu Singh • Apr 10, 2026 03:45 PM

हमारी कहानी की शुरुआत होती है सपनों की शहर दिल्ली से

शेखावत विला

रात का वक्त था। शेखावत विला में आज खुशियां प्रवेश कर रही थी। क्योंकि आज इस घर के बड़े बेटे की शादी हो गई थी। मेहमान जा चुके थे रात का समय हो रहा था। बस गिने चुने लोग ही घर में बचे हुए थे।

वही दूसरी और एक कमरे में सुहागरात का सेज सजी हुई थी। पूरा कमरा गुलाबों से सजाया गया था। और जगह-जगह कैंडल्स लगाई गई थी एयर फ्रेशनर की खुशबू तो ऐसी थी मानो कोई भी उस में मदहोश हो जाए

वही बिस्तर पर सुहागरात का सेज सजी हुई थी। और उस पर दुल्हन के जोड़े में 19 साल की मासूम चांद अपना चेहरा पर घुंघट लेकर बैठी हुई थी।

और उसके बाजू में केसर का दूध एक गिलास में रखा हुआ था।

चांद और अर्थ की शादी कुछ ऐसी हालतों में हुई की दोनों को भी एक दूसरे को जानने का मौका नहीं मिला,

अर्थ ने तो चांद का चेहरा तक नही देखा था। उसने बस अपने mom के कहने पर शादी के लिए हां कर दी थी।

तभी कमरे का दरवाजा जोर से खुलता है जिसकी आवाज सुनकर दुल्हन थोड़ी सहम जाती है। क्योंकि दरवाजा जोर से खुला था और एकदम से बंद हो गया था

"तुम कपड़े बदल सकती हो बहुत परेशानी हो रही होगी?"

अर्थ कमरे में आकर पहला शब्द यही कहा और बिना चांद को देखे अपने कपड़े बदलने के लिए बाथरूम में चल गया।

अर्थ सिंह शेखावत 28 साल का नौजवान जो बिजनेस इंडस्ट्री पर राज करता है।

वही चांद ने जब अक्षय को खुद को इग्नोर करके बाथरूम में जाता देखा तब घूंघट के अंदर से ही अर्थ के जाते पीठ को देखकर उसकी आंखें गुस्से से लाल हो गए,

उसने मुंह फुला कर कहा "हमें इग्नोर किये हम छोड़ेंगे नहीं एक बार बाहर आ जाओ"

बिचारी चांद को भारी-भरकम लेंहैगे में अब काफी ज्यादा इरिटेशन हो रही थी उसने मन ही मन कहा

"भगवान जी हम इतने प्यारे मासूम और नाज़ुक है हम कैसे इतना भारी लहंगा संभालेंगे और यह एक शैतान हमें बिना देखे अंदर चले गए हमारा घुंघट भी नहीं उठाया और दूध भी नही पीया अब हम क्या करें "

तभी अर्थ कपड़े बदल कर बाहर आया उसने एक नजर पाखी की तरफ देखकर कहा

"तुम कपड़े चेंज कर लो"

ये कहते हुए अर्थ सीधा जाकर सोफे पर बैठ गया, उसने अपने लैपटॉप निकाल और कुछ काम करने लगा,

तभी उसे चांद की गुस्से भरी आवाज सुनाई दी,,

"ए जी आप इधर क्यों नही आ रहे हो"

चांद की मीठी सी आवाज सुनकर अर्थ के दिल की धड़कन बढ़ गई।।

उसने अपनी नजर ऊपर उठाकर देखा चांद अभी भी बेड पर घूंघट ओढ़ कर बैठी हुई थी।

अर्थ ने थोड़े गुस्से से कहा "मैंने नहीं कहा तुम्हें इस तरह से बैठने को तो चुपचाप नाटक बंद करो और अपनी घूंघट उठा कर कपड़े चेंज करो"

अर्थ की बात सुनकर चांद भी गुस्से से अपनी जगह से खड़ी हुई और उसने अपनी घूंघट नहीं उठाई थी। वो उसी तरह से चलती हुई आकर अर्थ के सामने खड़ी होकर उसने गुस्से भरी आवाज में कहा

"आप खुद को समझते क्या है आप हमारे पति है तो आपको ही यह घूंघट उठानी होगी सासू मां ने कहा था"

अर्थ ने उसे घूरते हुए कहा "मुझे परेशान मत करो और जाओ यहां से "

चांद मुंह बनाते हुए गुस्से से कही "हम आपको परेशान नहीं कर रहे हैं आप हमारे पति है तो आपको यह करना ही होगा "

अर्थ ने झटके से चांद की घूंघट हटा दी घूंघट हटाते ही उसके सामने चांद का खूबसूरत सा गुस्से से फूला हुआ चेहरा था। चांद इस वक्त किसी पके हुए टमाटर की तरह लग रही थी।

अर्थ उसके चेहरे में ही खो गया वही चांद ने गुस्से से अर्थ को घूरते हुए कहा

"आप एक नंबर के खड़ूस डेविल हो"

वही चांद की बात सुन कर अर्थ गुस्से में उसे घूरते हुए चांद को देखने लगा।

चांद ने अर्थ की तरफ देखते हुए कहा

"अपनी इन ब्लू आंखों से हमें घूरो मत हम नहीं डरते चुपचाप चलिए हमारे साथ"

इतना कहकर उसने जबर्दस्ती अपने छोटे-छोटे हाथों से अर्थ का हाथ पकड़ ली

पर चांद अर्थ को एक इंच भी नहीं हीला पाई,

वही अर्थ का ध्यान चांद के नाजुक छोटे हाथों पर था। जिसकी पकड़ उसने अर्थ के हाथों पर कसी हुई थी।

अर्थ ने मन ही मन कहा "यह लड़की इतना ज्यादा इफेक्ट क्यों कर रही है। मुझे जबकि मैं इससे अभी कुछ घंटों से ही जानता हूं"

तभी चांद गुस्से भरी आवाज में कहा "उठीए "

अर्थ ने अपना लैपटॉप साइड में रखा और चांद उसे जिस तरफ खींच कर ले जा रही थी। चुपचाप उसके साथ चलने लगा।

चांद अर्थ को बेड के पास ले आई और अर्थ को बेड पर बिठा दी उसने मन ही मन कहा

"कितनी ज्यादा डेसपरेट लग रही हैं। यह लड़की"

इतना सोचा था कि साइड में पड़ा हुआ दुध का क्लास उसके सामने था।

चांद ने बिल्कुल आज्ञाकारी बीवी की तरह उसके सामने दूध का गिलास रखते हुए कहा

"इसे आप जल्दी से फिनिश कीजिए सासू मां ने कहा है कि मुझे यह दूध आपको पीलाना है।"

अर्थ हैरानी से उस दूध के गिलास की तरफ देखते हुए कहा "क्या तुम्हें में छोटा बच्चा लगता हूं जो दूध पिऊंगा"

चांद ने छोटे बच्चों की तरह मुंह बनाकर "मैंने कहा आप दूध पीजिए"

अर्थ ने उसे घूरते हुए कहा ""मैं कोई छोटा बच्चा नहीं हूं जो दूध पिऊंगा "

चांद ने अपने दोनों हाथ कमर पर रखे और वह जबरदस्ती दूध का ग्लास अर्थ के हाथों में पकड़ाते हुए कहा "आप इसे चुपचाप फिनिश कीजिए वरना हम सासू मां को बता देंगे "

चांद की बातें सुनकर बेचार अर्थ ने उसे अजीब नज़रों से देखकर जल्दी से दूध खत्म कर दिया और कहा

"अब मुझे परेशान मत करो जाओ यहां से"

चांद ने अर्थ को घूरते हुए कहा

"डेविल कही के"

अर्थ ने उसकी तरफ पैनी नजरों से देखा और कहा "क्या कहा तुमने"

चांद ने उसे घूरते हुए अपनी एक उंगली दिखाते हुए कहा

"हमने कहा आप डेविल हो कोई अपनी नई और इतनी क्यूट बीवी के साथ ऐसे बात करता है"

अर्थ ने उसे घूरते हुए कहा "यह शादी मैंने सिर्फ mom के लिए की है।"

अर्थ की बात सुन कर चांद ने उसको घूरते हुए कहा

"तो हमने भी यह शादी सिर्फ दादा जी के कहने पर किया है। वरना आप थोड़ी हैंडसम हो और आपको तो खुद को लकी मानना चाहिए हमारे जैसे खूबसूरत क्यूट प्यारी इंटेलिजेंट और मासूम बीवी आपको मिली है और हमें बदले में क्या मिला आपके जैसे खड़ूस डेविल पति "

अर्थ मुंह खोलकर अपने सामने खड़ी छोटी सी लड़की को देख रहा था। जिसकी जबान कैंची की तरह चलती जा रही थी।

चांद ने अक्षय की तरफ देखकर पाओ पटकते हुए कहा

""डेविल कही के" और वह से बाथरूम में चली गई।

अर्थ ने उसके जाने के बाद हैरानी से कहा

"दिखने में तो गाय की तरह लगती है पर जबान किसी कैंची की तरह चलती हैं इसे तो सबक सिखाना ही होगा"

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