श्रापित दुल्हन (Complete) Ch. 1

श्रापित दुल्हन - Chapter 1

Posted by Mamta Meena • Apr 07, 2026 08:50 PM

रावतगढ़ राज्य राजस्थान का चारों तरफ बीहड़ और पहाड़ों से घिरा हुआ छोटा सा सुंदर सा एक गांव, जहां आज भी आजादी के इतने वर्षों बाद परंपरागत रूप से हर राजसी प्रथा को निभाया जाता है ।

पूरे गांव के लोग अपनी खुशी से और राज दरबार के प्रति अपनी स्वामित्व भक्ति से इस परंपरा का पालन करते हैं, लेकिन इस राज दरबार से जुड़ा हुआ है एक ऐसा श्राप, की राजमहल का जो भी शासन बनता है अपनी सुहागरात के अगले दिन ही उसकी पहली दुल्हन की हो जाती है मौत,

जहां राजमहल में एक दिन पहले मनाई जाती है खुशियां दूसरे दिन छा जाता है मातम,

एक दिन पहले खुशी में बजाए जाते हैं ढोल नगाड़े वहीं दूसरे दिन गूंजती है रोने की आवाज़ें,

आखिर क्या है इस श्राप के पीछे की सच्चाई जिसकी वजह से राजमहल के शासक बनते ही किसी भी राजकुमार को बेटी देने से कतराते हैं सभी लोग,

रावतगढ़ गांव में आज खुशियां छाई हुई थी क्योंकि आज काफी दिनों बाद रावतगढ़ के होने वाले महाराणा युवराज प्रताप सिंह घर लौटने वाले थे,,,,,,

पूरे महल को सजाया गया था चारों तरफ महल में उनके आने की स्वागत की तैयारी हो रही थी पूरे गांव के लोगों को भी उसके लौटने का बेसब्री से इंतजार था,,,,,,

तभी रावत रावतगढ़ की राजमाता तेजस्विनी देवी बाहर आई जहां पर गार्डन में बैठे राजगुरु देवकीनंदन उनका इंतजार कर रहे थे,,,,,

तब देवकीनंदन को देखकर राजमाता से राजमाता ने उनसे प्रणाम किया वहीं राजगुरु ने भी प्रणाम कर राजमाता की तरफ देखते हुए कहा आइए राजमाता आप का इंतजार कर रहा था,,,,,,

तब यह सुनकर राजमाता बोली माफ करना गुरुदेव कुछ आवश्यक कार्य की वजह से आने में थोड़ी देरी हो गई जिसकी वजह से आपको इंतजार करना पड़ा,,,,,

तब यह सुनकर गुरुदेव बोल कोई बात नहीं राजमाता,,,,,,,

तब दोनों वही गार्डन में कुर्सियों पर बैठ गए तब राजमाता राजगुरु की तरफ देखते हुए बोली गुरुदेव आज प्रताप सिंह मेरे पोता और रावतगढ़ का होने वाला वारिस लौटने वाला है,,,,,,

ऐसे मैं चाहती हूं कि आप शुभ मुहूर्त देखकर जितनी जल्दी हो सके उसका राज्याभिषेक करवा कर रावतगढ़ का महाराणा नियुक्त कीजिए यही हमारा वर्षों का अरमान है,,,,,

तब यह सुनकर राजगुरु बोले जी राजमाता हम जल्द ही कोई शुभ मुहूर्त देखकर आपको बताते हैं फिर पूरे विधि विधान से और धूमधाम से यह राज्याभिषेक किया जाएगा,,,,,,

तब यह सुनकर राजमाता बोली हां राजगुरु जी और हम चाहते हैं उसके बाद जल्दी ही हम युवराज प्रताप सिंह का विवाह कर दे अपनी आंखों के सामने रावतगढ़ का महाराणा बनते हुए और उसका विवाह होते हुए देखना हमारा सपना है,,,,,,

तब यह सुनकर राज गुरु देवकी नंदन के चेहरे पर उदासी के भाव छा गए और वह हड़बड़ा कर बोले लेकिन राजमाता आपको तो पता है ना की इस महल से एक ऐसा श्राप जुड़ा हुआ है कि इस महल में रहने वाला व्यक्ति चाहे दुनिया के किसी भी कोने में चला जाए लेकिन वह श्राप उसका पीछा नहीं छोड़ता और यह श्राप इस कुल के होने वाले महाराणा की पहली दुल्हन से जुड़ा हुआ है,,,,,

ऐसे में अगर युवराज प्रताप सिंह का विवाह हुआ तो वर्षों बाद फिर से इस महल में विवाह के दूसरे दिन ही चीखे  गूंजेगी और पूरे महल के साथ पूरे गांव में फिर से मातम छा जाएगा और एक और दुल्हन की जान उस श्राप के कारण चली जाएगी,,,,,,

तब देवकीनंदन की बातें सुनकर राजमाता कुछ सोचते हुए गंभीर स्वर में बोली हम जानते हैं राजगुरु लेकिन बरसों से यही होता आया है और जब तक वह दुल्हन नहीं आ जाती इस हवेली में जिसकी तलाश है तब तक इस श्राप से छुटकारा नहीं मिल सकता,,,,,

तब यह सुनकर राजगुरु देवकीनंदन बोले हमारे पूर्वज भी इस कुल की सेवा करते हुए आए हैं और उन्होंने पूरी कोशिश की है ऐसी दुल्हन ढूंढने की उसके हर नक्षत्र जन्म जन्म तिथि के आधार पर ऐसी दुल्हन इस हवेली में लाने की की उसकी बलि के बाद इस श्राप से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाए लेकिन आज तक ऐसी कोई दुल्हन नहीं मिली है,,,,,

ऐसे में कुछ कहा नहीं जा सकता बरसों बरसों गुजर गए लेकिन आज तक ऐसी कोई दुल्हन नहीं मिली पता नहीं हमारे जीते जी ऐसी दुल्हन मिलेगी या नहीं हमें तो समझ में नहीं आता आखिर ऐसी कौन सी दुल्हन होगी कि इस श्राप से छुटकारा दिला पाएगी,,,,,

ऐसे में ना जाने तब तक कितने मासूम दुल्हनों की जान जाएगी ना जाने कितनी मासूम सुहागन बनने के बाद ही अपनी नई जिंदगी शुरू करने से पहले ही मौत के मुंह में चली जाएगी जो इस महल के लिए इस पूरी रावतगढ़ के लिए एक बड़ी ही दुख की खड़ी होंगी,,,,, राजगुरु देवकीनंदन दुखी स्वर में बोले,,,,,,

तब राज गुरु देवकी नंदन की बातें सुनकर राजमाता  बोली हम समझ सकते हैं राजगुरु इस बात का हमें खुद को काफी अफसोस है,जब हम इस बारे में सोचते हैं तो हमें बहुत तकलीफ होती है, वैसे भी हमने खुद अपनी आंखों के सामने इस श्राप के कारण इस महल में आने वाली दुल्हन को मौत के मुंह में जाते हुए देखा है,,,,

बरसों पहले अपने पोते युवराज प्रताप सिंह के पिता और मेरे बेटे संग्राम सिंह की पहली दुल्हन के साथ जो कुछ हुआ था उसे हम कैसे भूल सकते हैं लेकिन इस श्राप के कारण हम चाहते हुए कुछ कर भी तो नहीं सकते,,,,,

पता नहीं वह दुल्हन आखिर कब इस महल में आएगी और उसे श्राप से छुटकारा मिलेगा हम नहीं जानते लेकिन साथ ही एक डर और है अगर वह दुल्हन मिल गई और इस श्राप से छुटकारा मिल गया तो एक नहीं मुसीबत और हमारे सिर पर आ जाएगी अब तो भगवान ही कुछ कर सकते हैं तब तक हम सबको अपनी सीने पर पत्थर रखकर इस श्राप से गुजरना जाना होगा और युवराज प्रताप सिंह का विवाह भी करना होगा,,,,,,

वैसे भी यह इस खानदान की कुल परंपरा को देखते हुए और इस खानदान के वारिस के लिए जरूरी है ऐसे में आप राज्य सिंहासन के लिए शुभ मुहूर्त देखने के साथ-साथ एक ऐसी कन्या की तलाश कीजिए जिससे युवराज प्रताप सिंह का विवाह हो सके,,,,,,

तब यह सुनकर राज गुरु देवकीनंदन कुछ सोचते हुए गंभीर स्वर में बोले राजमाता आज तक इस श्राप के कारण न जाने कितनी गरीब कन्याओं की बलि दी गई क्योंकि कोई भी राजघराना इस कुल के होने वाले महाराणा को अपने पहले विवाह के लिए अपनी कन्या नहीं देना चाहता क्योंकि इस श्राप के बारे में जानकर कोई भी अपनी बेटी को मौत के मुंह में नहीं धकेलना चाहता,,,,,,,

ऐसे में इस श्राप को देखते हुए और अपने कुल की मान मर्यादा का पालन करते हुए कभी हमने किसी की मजबूरी में उसकी मदद करके तो कभी किसी ने अपनी स्वामी भक्ति के कारण अपनी कन्या को मौत के मुंह में धकेल दिया है लेकिन हम भी जानते हैं यह सब कुछ मजबूरी में हुआ है,,,,,

पूरे गांव में इस श्राप के कारण सब लोगों में भय व्याप्त हो गया है अब लोग अपनी-अपनी कन्याओं की जिंदगी के बारे में सोचने लगे हैं ऐसे में कोई भी जल्दी से अपनी कन्या युवराज प्रताप सिंह से विवाह करने के लिए तैयार नहीं होगा,,,,

क्योंकि कोई भी मां-बाप अपनी आंखों के सामने सब कुछ जानते हुए भी उसे मौत के मुंह में नहीं धकेलना चाहते,,,,, राजगुरु राजमाता की तरफ देखते हुए बोले।

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