डायन (एक प्रेम कथा) - Chapter 2
यह सुनकर रिया बोली मां आप चिंता मत करो मैं जनकू को साथ लेकर जा रही हूं,,,,,,
रिया ने अपनी बात पूरी भी नहीं थी कि अचानक आवाज आई ना रिया ना वहा मैं नहीं जाने वाली तुम्हारे साथ,,,,,,, यह सुनकर रिया ने दरवाजे की तरफ देखा तो वहां पर जनकू उप जनक नंदिनी थी,,,,,,,,
फिर रिया की मां बोली अच्छा बेटा तुम बातें करो मुझे कुछ काम है,,,,,,,यह कहकर बह चली गई,,,,,,,
तब रिया जनकू की तरफ देखते हुए बोली अरे ओ जनकू की बच्ची यह क्या बोल रही है,,,,,,,
यह सुनकर जनकू उसके पास आते हुए बोली सच कह रही हूं रिया,,,,,,, अरे मेरी मौसी कि देवरानी बता रही थी जैतपुर में उसका ननिहाल है,,,,,,,,
वह बता रही थी कि उस हवेली में डायनों का वास है और जो भी वहां जाता है बह जिंदा लौटकर वापस नहीं आता,,,,,,,,
और देखों रिया मुझे अभी इतनी जल्दी नहीं मरना मुझे रुनझुन जी से अपनी शादी करनी है, उसके साथ अपनी जिंदगी जीनी है,,,,,,,यह कहते हुए जनकू के चेहरे पर मुस्कान आ गई और वह अपने सुनहरे सपनों में खोने लगी,,,,,,,,
तब रिया उसके पास आकर उसके सिर पर एक हल्की सी हाथ की चप्पथ मारती हुई बोली क्या कहा तुमने जनक नंदिनी उप जनकु,,,,,,,,,
मुझे तो लगता है तुमने ही जरूर मां के कान भरे होंगे और यह बुआ जी की देवरानी जेठानी का किस्सा छोड़ो और कान खोल कर सुन लो तुम मेरे साथ जैतपुर चल रही हो,,,,,,,,
यह सुनकर जनक नंदिनी बोली लेकिन रिया अगर वहां सच में डायन हुई तो उसकी बात बीच में काटते हुए रिया बोली अब छोड़ो इन फालतू की बातों को,,,,,,,,
और मेरी बात सुनो मैंने कह दिया ना कि तुम मेरे साथ चलोगी तो चलोगी इसके आगे और मुझे कुछ नहीं सुनना,,,,,,,
फिर रिया कुछ देर चुप रह कर बोली जनकू तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो समझी ना तुम, और आप कोई तुम्हारा बायना नहीं चलेगा रिया ने जंकु की तरफ देखते हुए कहा,,,,,,,,
और फिर बोली और यह क्या छिपकली सी सब दिन कुछ ना कुछ खाती रहती हो लेकिन वजन 100 ग्राम से ज्यादा नहीं होगा तुम्हारा रिया ने उसके हाथ सेव छीन कर फेंकते हुए कहा,,,,,,,
तब जनकू बोली लेकिन रिया मुझे कुछ खाने तो दे,,,,,,,
तब रिया बोली अरे ओ जंकु महारानी यह खाना-पीना बाद में कर लेना पहले भगवान के लिए मुझ पर तरस खाकर हां बाद अब जल्दी से तैयार हो जाओ हमें निकलना है,,,,,,,,
यह सुनकर जनकू उदास होते हुए बोली ठीक है रिया अरे अगर अपनी बेस्ट फ्रेंड के खातिर मेरी जान भी चली गई तो ठीक है लेकिन रुनझुन से मेरा विवाह करने का सपना अधूरा ही चला जाएगा,,,,,,,
यह सुनकर रिया बोली अब चुप कर अपनी यह नौटंकी और जल्दी से तैयार होकर आ हमें निकलना अभी तो है यह सुनकर जनकू बोली ठीक है रिया डांटो मत लेकिन मैं अपना यह सेब तो ले जा सकती हूं ना जनकू अपना सेव उठाते हुए बोली,,,,,,,
यह देखकर रिया कुछ बोलती इससे पहले ही वह बोली ठीक है ठीक है जा रही हूं और वह कमरे से और अपने घर तैयार होने के लिए चली गई,,,,,,,
फिर रिया अपने सिर पर हाथ लगाते हुए खुद से ही बोली यह जनकू की बच्ची भी ना मुझे पागल कर छोड़ेगी यह कहते हुए बह अपना जरूरी सामान अपने बैग में रखने लग गई,,,,,,
रिया बहुत ही होनाहार सुंदर और बहुत ही बहादुर लड़की है वह एक 24-25 साल की पत्रकार है,,,,,,,
और जनक नंदिनी उसकी कॉलेज की फ्रेंड है और अब उसके ही साथ उसके ही ऑफिस में काम करती है जिसे प्यार से सब जनकु कहकर बुलाते है,,,,,,
जनक नंदिनी देखने में दुबली पतली लड़की है मुश्किल से उसमें 45 किलो वजन भी नहीं होगा, जनक नंदिनी अपने ही ऑफिस के एक लड़के रुनझुन से प्यार करती है,,,,,,,
जहा जनक नंदिनी देखने में दुबली पतली लड़की है ,वही रुनझुन देखने में 80- 90 किलो का लड़का है, जनक नंदिनी उससे बहुत प्यार करती है वही रुनझुन भी जनक नंदिनी को चाहता है, ऑफिस में सारे लोग उनकी जोड़ी का कद्दू और भिंडी की जोड़ी कहकर मजाक बनाते हैं,,,,,,,,
बही रिया की मां प्रेमा एक सीधी-सादी औरत है जो बचपन से ही गांव में रही है और शादी के बाद अपने पति के साथ शहर आकर बस गई,,,,,,,
वहीं रिया के पापा सुरेंद्र बाबू शुरू से ही शहर में पले बढ़े है और काफी खुले विचारों के है बह रिया को अपनी बेटी नहीं बेटा मानते हैं और रिया के घूमने फिरने खाने-पीने और कुछ भी पहनने पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाते हैं,,,,,
सुरेंद्र बाबू और प्रेमा दोनों की ही अपनी इकलौती बेटी रिया में जान बसती है वही रिया भी अपने मम्मी पापा से बहुत प्यार करती है उनका छोटा सा परिवार बड़ा ही खुशहाल जिंदगी जी रहा था,,,,,,
1 घंटे बाद रिया के कहने पर जंनकु तैयार होकर और अपना बैग लेकर रिया के पास उसके घर आ गई,,,,,,,
उसे आए देख कर रिया मुस्कुराते हुए होली आ गई जनकू तुम,,,,,,
तब जनकू रिया को देखकर घबराते हुए बोली अगर तुम कहती हो रिया तो मैं तुम्हारे साथ चलती हूं अपनी बेस्ट फ्रेंड के लिए इतना तो कर ही सकती हूं,,,,,,
यह सुनकर रिया हंसते हुए बोली हां हां क्यों नहीं और वैसे भी जैतपुर की हवेली में हमें डायन अगर मिल भी गई तो बेचारी तुझे तो वैसे ही छोड़ देगी,,,,,,,
क्योंकि तुम्हारे अंदर तो उसे कुछ खाने को मिलेगा ही नहीं ऐसे ही उसे मेहनत करनी पड़ेगी इसलिए तुम्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है, डायन को भी तुम पर तरस आ ही जाएगा इसलिए आराम से चलो,,,रिया हंसते हुए बोली,,,,,,,,
तभी प्रेमा वहां आ गई और आकर रिया के पास आकर बोली बेटा यह माता रानी का लॉकेट है तुम्हारे गले में बांध देती हूं यह तुम्हारी हमेशा रक्षा करेगा ,,,,,,
यह देखकर रिया मुस्कुराते हुए बोली हो हो मां आप भी ना,,
तब रिया की मां बोली बेटा अपनी मां के लिए कम से कम यह माता रानी का लॉकेट तो अपने गले में बंधवा लो जिससे मुझे यह तसल्ली रहेगी कि माता रानी हमेशा तुम्हारे साथ है और तुम्हारी रक्षा करेगी ,,,,,
ठीक है मां यह कहकर रिया ने अपनी मां के हाथ से वह लॉकेट अपने गले में बंधवा लिया,,,,,,,
तब जनक नंदिनी बोली आंटी एक माता रानी का लॉकेट मेरे गले में जरूर बांध दो अगर डायन मिल गई तो,,,, नहीं नहीं मुझे नहीं मरना,,,,,,,
यह सुनकर प्रेमा बोली हां बेटा क्यों नहीं उसने एक लॉकेट माता रानी के चरणों में से लेकर जनक नंदिनी के गले में भी बांध दिया,,,,,,,
तब रिया बोली मां अब हमें चलना चाहिए देर हो जाएगी तब उसकी मां बोली बेटा अपना ध्यान रखना और माता रानी तुम दोनों की रक्षा करेगी,,,,,,
तब रिया बोली मां आप घबराओ मत कुछ नहीं होगा देखना आपकी रिया एक बार फिर कितना बड़ा पर्दाफाश करके लौटेगी,,,,,,
तब रिया की मां ने दोनों के सिर पर हाथ रख दिया और कहा ठीक है बेटा
फिर रिया जनक नंदिनी के साथ जैतपुर के लिए रवाना हो गई,,,,,,