My secret billonaire - Chapter 3
उसने अपना हाथ धीरे से उसके कंधे पर रखा, उसके स्पर्श में कोमलता का दिखावा था, क्योंकि वो उसे शांत करने की कोशिश कर रहा था।
“चलो अब, अच्छे से रहो । तुम ने अपना गुस्सा निकाल लिया है। चलो अब तमाशा मत करो कैसा रहेगा?
हम कोई ओर दिन चुनेंगे, कोई बेहतर दिन, और में वादा करता हूँ कि हमारी शादी धूमधाम से होगी। क्या कहती हो?"
रिया धीरे से हँसी उसकी हँसी में कड़वाहट थी। उसने उसे बहुत मौके दिए थे, और अब उसे उस पर यकीन नहीं है।
तुम्हें क्या लगता है तुम कहाँ जाऊँगी?
वो अच्छी तरह से जानता था कि रिया का कोई परिवार नही है, इस अपार्टमेंट के अलावा उसके पास कोई भी ठिकाना नही था। पिछले पाँच सालों से , उसकी पूरी दुनिया उसके ही इर्द-गिर्द सिमटी हुई थी। उसे पूरा यकीन था वो उसे नही छोड़ सकती।
उसे पूरा यकीन था कि ये घर से बाहर जाने का नाटक उसे अपनी इच्छा के आगे झुकाने के लिए कर रही है।
वो कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोलने ही वाला था, लेकिन पीछे से आई आवाज ने उसकी बोलती बंद कर दी।
ये सारा की आवाज थी।
“विवान तुम ने कहा था न कि समान पैक करके एक मिनट में नीचे आ जाओगे? तुम्हें इतना समय क्यों लग रहा है? "
सारा के अंदर आते ही उसकी अवाज़ कमरे में गुंज उठी जब उसकी नज़र रिया पर पडी तो, उसके चेहरे पर हैरानी के भाव आ गए।
“रिया ,तुम यहाँ क्या कर रही हो? "
रिया ने सारा को ठंडी नज़र से देखा , उसने जवाब दिया“ये मेरा अपार्टमेंट है, क्या मुझे तुम्हें बताना पड़ेगा कि मैं यहाँ क्यों हूँ? सवाल तो ये है कि तुम यहाँ क्यों हो? "
सारा ने शमिर्दगी से अपनी आँखे नीची कर ली।
“मैंने गलती से खुद को फल काटने वाले चाकू से काट लिया, और विवान इतना चिंतित हो गया कि कुछ दिन मेरे साथ रहने पर जोर दिया। " तभी उसकी नज़र रिया के पास रखे सूटकेस पर पड़ी, और नाटक से उसने अपना मुंह ढक लिया।
“रिया, तुम क्या कर रही है? " अगर तुम परेशान हो, तो मुझे से बात करो अगर तुम चाहो तो में तुमसे माफ़ी मांग लेती हुँ ।
रिया के चेहरे मुस्कान आ गई जब वो सारा कि तरफ बढ़ी।
“क्या तुम सच में माफ़ी मांगोगी ? क्या तुम्हरा ऐसा इरादा भी है? "
सारा को पता था कि विवान देख रहा है, इसलिए उसने हाँ में सिर हिला दिया।
“ठीक है , तो तुम सच में ऐसा चाहती हो तो ..
बिना किसी चैतावनी के उसने हाथ उठाया ओर उसे थप्पड़ मार दिया। ”
सारा ने चीख़ मारी, थप्पड़ के झटके से भी पूरी तरह हिल गई। अपने जलते हुए गाल को पकड़े रिया को घूर रही थी।
“रिया, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे मारने की? "
“मैं ऐसा करने की हिम्मत क्यों न करुं? तुम ही तो ऐसा चाहती थी। लेकिन एक थप्पड़ से मेरा गुस्सा शांत नही होगा शायद दूसरा काम कर जाए। "
इतना कहकर उसने अपना हाथ फिर से उठाया सदमे से उबर न पा रहे विवान ने आखिरकार होश संभाला । गुस्से से चिल्लाते हुए आगे बढ़ा और रिया को धक्का देकर एक तरफ कर दिया।
बस करो! रिया
उसने सारा को अपनी बाहों में भर लिया, ओर उसे शांत करने की कोशिश करने लगा।
सारा ने ख़ुद कहां था वो मुझे से माफ़ी मांगना चाहती है। विवान क्या तुम बहरे हो? अगर वो सच में माफ़ी मांग ना चाहती थी, तो उसे चुप रहना चाहिए था और मुझे अपना गुस्सा निकालने देना चाहिए था।
“अगर सारा माफ़ी मांग रही है तो तुम उसे थप्पड़ मारोगी क्या? " तुम एक बिगाड़ी हूई लड़की की तरह बिहेव कर रही हो।
ठीक है, मेरी इतनी तारीफ के लिए थैक्यु ।
तुम मेरी तारीफ कर रहे हो, तो क्यों ना में उसे एक और थप्पड़ मारूं।
विवान का मूहं खुला रह गया, वो उसे घूर रहा था।
सारा नाटक करने लगी, “ विवान ऐसा मत कहो,। रिया बस परेशान है, अगर उसे खुशी मिलती है तो मुझे कोई आपत्ति नही। "
सारा कि बातें सुन के विवान के मन में सारा के लिए हमदर्दी पैदा हो गई।
“ रिया तुम सच में बदल गई हो, जिस रिया को मैं जानता हूँ वो तुम नही हो। "
रिया ने उसकी बात पूरी होने से पहले ही उसे रोक दिया।
“हाँ, मैं बदल गई हूँ। पहले मैं पागल थी, अब मुझे समझ आ गया है तुम एक मुर्ख हो हमारा रिश्ता अब पूरी तरह से खत्म है। "
जैसे ही वो सूटकेस घसीटते कमरे से बाहर निकली, विवान के सीने में घबराहट हूई।
“रिया ! ” उसने तेज़ आवाज में पुकारा , और उसके पीछे भागने लगा।
सारा कि आखें हैरानी से चोड़ी हो गई। बिना सोचे समझे उसने अपना हाथ गाल पर रख लिया और रोने लगी।
“ विवान , मेरे चेहरे पर दर्द हो रहा है। कहीं खून तो नही निकल रहा है? ”
सारा के गाल पर हल्की लाल धारियाँ थी, और उसके गाल पर हाथ का निशान था।
“ सारा, रो मत,” उसने चिंता भरी आवाज में कहा “मैं तूम्हें हस्पताल ले चलता हूँ। हम तुम्हें मलहम लगा देंगे सब ठीक हो जाएगा। ”
नाटक भरी आवाज में वो बोली, “ विवान रिया सचमुच जा रही है.. तुम्हें उसके पीछे जाना चाहिए मैं ठीक हूँ। ”
“ रिया इस बार उसने हद पार कर दी है। मैं इसे बर्दाश्त नही करूँगा। वो अपने आप वापस लौट आएगी। ”
दुसरी ओर,आरव विला लौटने के बाद अपने स्टडी रूम में चला गया।
लोगों द्वारा विकलांग और बैकार समझे जाना वाला , वो अब बडे़ आराम से खड़ा हुआ था। वो खिड़की की ओर देख रहा था, तभी उसका फ़ोन बजा फ़ोन उसके बचपन के दोस्त रिशब ओबेरॉय का था।
“हे, आरव उसने कहा“ मैंने तुम्हारी पत्नी के बारे में पता लगाया है। उसके बारे में कुछ भी बुरा नही है। उसका बैकग्राउंड ठीक है। शादी के दिन उसने इसलिए तुम से शादी की क्योंकि उसका मंगेतर उसे छोड़ कर भाग गया था। ”
“ तुम्हे पता है, शहर की सारी आमीर लडकियाँ तुमसे ऐसे दूर भागती है जैसे तुम कोई बीमारी हो । उन्हें लगता है कि तुम विकलांग हो, और अपने परिवार से कटे हुए हो-
लेकिन उस लड़की में इतनी हिम्मत कि सीधे तुम्हारे पास आई और तुमसे शादी करली। सच कहूं तो उसमें बहुत हिम्मत है। ”