SHAKTI - A most dengerous woman - Chapter 2
एक साल पहले...
राजमहल में....
मुगल साम्राज्य की शान और वैभव से परिपूर्ण राजमहल, अपने भव्य निर्माण और सुंदर उद्यानों के साथ, एक अद्वितीय आकर्षण का केंद्र था। राजमहल के बाहर, सैनिकों की टोली पहरा दे रही थी, उनकी निगाहें हर आने-जाने वाले पर थीं। राजमहल के अंदर, दासियाँ अपने कार्यों में व्यस्त थीं, जबकि महारानी मधुमति एक महत्वपूर्ण चर्चा में मग्न थीं।
"आप फिक्र न करें, रणजीत भाई!!! मैं आपकी बेटी को गुलाब के फूल की तरह सजा कर रखूंगी अपने पास।" महारानी मधुमति ने मुस्कुराते हुए कहा। उनके सामने महाराजा रणजीत शाह खड़े थे, अपने सैनिकों के साथ। उनके साथ एक सुंदर और प्यारी लड़की थी, जो राजकुमारी के वस्त्र पहने हुए थी।
महाराजा रणजीत शाह ने कहा: "मुझे तुम पर पूरा यकीन है, मधुमति!! तुम मेरी बेटी का अच्छा ख्याल रखोगी।" फिर उस प्यारी सी लड़की की तरफ देखकर उन्होंने कहा: "बेटी, तुम आज से महारानी मधुमति के साथ रहोगी। जब तक मैं युद्ध करके वापस नहीं आता, तब तक तुम यहीं रहना। और मेरी फिक्र मत करना, मैं बहुत जल्द लौटूंगा।"
उस लड़की ने मुस्कुराकर कहा: "मुझे पूरा यकीन है पिताजी कि आप जरूर युद्ध जीतकर आएंगे। आप बेफिक्र होकर जाइए, मैं आपका यहां इंतजार करूंगी।" महाराजा रणजीत शाह अपने सैनिकों के साथ वहां से चले गए।
महारानी मधुमति ने उस राजकुमारी की तरफ देखकर कहा: "तुम आओ मेरे साथ, मैं तुम्हें महाराजा राजबीर से मिलवाती हूं।" महारानी मधुमति उस राजकुमारी को लेकर अपने सिंहासन की तरफ गईं, जहां महाराजा राजबीर सिंह और उनके बच्चे मौजूद थे।
महारानी मधुमति ने राजबीर सिंह की तरफ देखकर कहा: "यह हमारी भतीजी है, महाराज!!" महाराजा राजबीर सिंह खड़े हुए और उस राजकुमारी की तरफ आकर, उसके सिर पर हाथ रखकर कहा: "स्वागत है तुम्हारा। आज से तुम हमारी बेटी जैसी हो। क्यों है न महारानी मधुमति??" महारानी मधुमति ने मुस्कुराकर सहमति दी, और उस राजकुमारी ने भी मुस्कुराकर उनका अभिवादन स्वीकार किया।
महारानी मधुमति ने एक दासी को बुलाकर कहा: "दासी, तुम राजकुमारी रश्मि को उनका कमरा दिखाओ।" दासी ने हां में गर्दन हिलाई और राजकुमारी रश्मि को उनके कमरे में ले गई।
महारानी मधुमति ने अपने बच्चों की तरफ देखकर कहा: "आज से राजकुमारी रश्मि तुम लोगों की बहन है, इसलिए उनसे मिल-जुलकर रहना।" राजकुमार और राजकुमारियों ने हां में गर्दन हिला दी और अपने कमरों की तरफ चले गए।
राजकुमारी रश्मि अपने कमरे में बैठी हुई थीं, तभी राजकुमारी राधिका और अर्पिता उनके कमरे में आईं। राजकुमारी रश्मि उठकर खड़ी हो गईं। राजकुमारी राधिका ने कहा: "मैं राजकुमारी राधिका हूं। तुमसे मिलकर अच्छा लगा।" राजकुमारी राधिका ने अपना हाथ आगे बढ़ाया, और राजकुमारी रश्मि ने भी अपना हाथ बढ़ाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया।
राजकुमारी अर्पिता ने कहा: "पहली बार तुम हमारी राजमहल में आई हो, इससे पहले कभी मैंने तुम्हें नहीं देखा।" राजकुमारी राधिका ने अर्पिता की तरफ देखकर कहा: "हमें नहीं पता था कि हमारी इतनी प्यारी बहन भी है।" राजकुमारी रश्मि ने मुस्कुराकर कहा: "हम अपने महल से कहीं जाते नहीं थे, इसलिए आप दोनों से हमारी मुलाकात नहीं हुई थी।"
राजकुमारी राधिका ने कहा: "वैसे, यह एक अच्छा इत्तेफाक है कि आपकी और हमारी उम्र एक जैसी ही है, 22 साल।"
"राजकुमारी को कैसे पता चला कि हमारी उम्र के बारे में??" दोनों ने सवाल किया।
राजकुमारी राधिका ने कहा: "रानी मां से पूछा था!"
राजकुमारी अर्पिता ने राजकुमारी राधिका से कहा: "हमें अब चलना चाहिए है यहां से है न!! नहीं तो रानी मां हम दोनों को डांटेगी।" वह दोनों चले गए।
राजकुमारी रश्मि अपने कमरे से बाहर आकर इधर-उधर देखने लगी। वह सीधा चल रही थी और दीवारों पर बनी हुई चित्रकला को देख रही थी, जो मुगल साम्राज्य के युद्धों की कहानियां बयान कर रही थीं।
राजकुमारी रश्मि हर एक चित्र और चीज़ को देखकर आगे बढ़ रही थी, उन्हें पता नहीं था कि एक शख्स उनके पीछे चल रहा है। वह शख्स अचानक से राजकुमारी रश्मि के पीछे आया और उनके कंधे पर हाथ रख दिया। राजकुमारी रश्मि के कदम डर से रुक गए।
उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो राजकुमार आदित्य खड़े थे। राजकुमार आदित्य को देखकर राजकुमारी रश्मि को राहत मिली। राजकुमार आदित्य ने कहा: "आप यहां इधर-उधर मत घूमें, नहीं तो रानी मां आपको डांटेंगी।"
राजकुमारी रश्मि ने कहा: "ओह सॉरी! मैं बस पूरे महल को देखना चाहती थी। क्या आप मुझे पूरा राजमहल घुमा सकते हैं?" राजकुमार आदित्य हैरान हुए और कहा: "नहीं, हमें खुद भी महल में इधर-उधर घूमने की इजाजत नहीं है। बेहतर होगा कि आप अपने कमरे में चली जाएं।"
राजकुमार आदित्य वहां से चले गए। राजकुमारी रश्मि को बुरा लगा, लेकिन उनका मन बार-बार महल घूमने का था। उन्होंने सोचा: "क्या अजीब बात है!! हम अपने महल में पूरा घूम चुके हैं और पिताजी ने कभी माना नहीं किया, तो इस महल में घूमने में क्या हर्ज है?? मैं अपनी मर्जी करूंगी।"
राजकुमारी रश्मि फिर से वहीं आई जहां राजकुमार आदित्य से उनकी मुलाकात हुई थी। वह आगे बढ़ने लगी और पूरे महल को देखती हुई चलने लगी। महल में लाइट्स नहीं थीं, जिससे रास्ता ढूंढना मुश्किल हो रहा था।
वह एक सुरंग की तरफ बढ़ रही थी जहां हल्की रोशनी जल रही थी। राजकुमारी रश्मि को लगा कि वह महल के सही हिस्से में आ गई है। लेकिन जब वह सुरंग के पास पहुंची, तो किसी ने जोर से उनका हाथ पकड़कर अपने पास खींच लिया। राजकुमारी रश्मि कुछ समझ नहीं पाई और उस शख्स के सीने से लगकर रह गईं।
उन्होंने खुद को उस शख्स से अलग किया और जब उस शख्स का चेहरा देखा, तो वह हैरान रह गईं। सामने खड़े उस शख्स कोई और नहीं, राजकुमार कार्तिक थे। राजकुमार कार्तिक भी उन्हें देखकर हैरान थे।
राजकुमार कार्तिक ने उनसे पूछा: "आप यहां क्या कर रही हैं? आपको पता भी है यह जगह कितनी खतरनाक है? चलिए मेरे साथ यहां से, अगर रानी मां ने हम दोनों को यहां देख लिया, तो बहुत बड़ी मुश्किल हो जाएगी।" कहकर वह उनका हाथ पकड़कर वहां से जाने लगे।
जब वह दोनों महल के सही जगह पर पहुंचे, तो वहां बहुत से दासी और सैनिक थे। महाराज राजबीर और महारानी मधुमति भी वहां थीं, जो बहुत परेशान लग रही थीं। राजकुमार कार्तिक जब वहां पहुंचे, तो सबकी नजरें उन पर टिकीं।
महारानी मधुमति ने जब राजकुमार कार्तिक का हाथ राजकुमारी रश्मि के साथ देखा, तो वह हैरान रह गईं। राजकुमार कार्तिक ने जल्दी से उनका हाथ छोड़ दिया और राजकुमार आदित्य के पास खड़े हो गए।
राजकुमारी रश्मि जब राजकुमारियों के पास जाने लगीं, तो महारानी मधुमति ने कहा: "ठहरो! कहां गई थीं आप?" राजकुमारी रश्मि के कदम वहीं जम गए। उन्होंने सर झुकाकर कहा: "वो मैं, रानी मां... महल घूम रही थी।"
महारानी मधुमति ने गुस्से से पूछा: "महल घूमने की इजाजत आपको किसने दी? बताइए।" राजकुमारी रश्मि शांत रहीं।
अब आगे क्या होगा? क्या राजकुमारी रश्मि को अपने किए की सजा मिलेगी? या फिर महारानी मधुमति उन्हें माफ कर देंगी?
To be continued.....