मदहोशी ए ट्रू लव स्टोरी - Chapter 3 (कमरे में अभी भी हल्की-सी गर्माहट थी )
कमरे में अभी भी हल्की-सी गर्माहट थी, लेकिन हवा में एक डरावनी खामोशी तैर रही थी। ऐश्वर्या बिस्तर के किनारे बैठी थी—बाल बिखरे हुए, साँसें हल्की-सी डरी हुई।
रनवीर अलमारी की तरफ गया और हमेशा की तरह… वही छोटा सा पैकेट निकाला। रोज़ की तरह।
वह मुड़ा और उसके हाथ में पानी का ग्लास और सफेद गोली रखते हुए बोला—
“लो। अभी।”
ऐश्वर्या की उँगलियाँ झटके से सिमट गईं। उसकी आवाज़ धीमी, डर दबाकर निकली—
“रनवीर… आज नहीं।”
रनवीर एक पल को रुका। उसकी आँखों में वही चमक—जो ऐश्वर्या पिछले तीन साल से पहचानती थी। वो चमक जो कहती थी कि गुस्सा अभी उभरा नहीं है… पर किसी भी पल भड़क सकता है।
“क्यों नहीं?” उसकी आवाज़ बिल्कुल ठंडी थी।
ऐश्वर्या ने हिम्मत जुटाई, पर बोलते वक्त उसकी आवाज़ काँप गई।
“मैं… मैं बस नहीं लेना चाहती। हर दिन… तीन साल से… तुम रोज़ ये गोली दे रहे हो। मैं… मैं अब और नहीं लेना चाहती।”
रनवीर धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
उसकी चाल में कोई जल्दी नहीं थी—बस एक ऐसा नियंत्रण, जो ऐश्वर्या की रीढ़ में सिहरन पैदा कर दे।
वह उसके सामने खड़ा होकर नीचे झुका।
“तीन साल से दी है, तो क्या हुआ? आज क्यों नहीं?”
ऐश्वर्या ने निगाहें झुका लीं।
“क्योंकि… अब मैं बच्चा चाहती हूँ। हमारी शादी को भी तीन साल हो गए… और मैं—”
वह अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई।
रनवीर ने अचानक उसका ठुड्डी पकड़कर ऊपर उठाया। उसकी पकड़ इस बार थोड़ी सख़्त थी—सावधानी से भरी धमकी जैसी।
“ऐश… तुम जानती हो न, मुझे ऊँची आवाज़ में तर्क पसंद नहीं?”
ऐश्वर्या का दिल धड़क कर जैसे गले में अटक गया।
उसने तेजी से सिर हिलाया—“नहीं… मैं बस—मैं बस समझा रही थी।”
रनवीर की आँखों में गुस्सा घिरने लगा।
“तुम्हें बच्चे पसंद हैं, मुझे नहीं। ये बात कितनी बार समझानी पड़ेगी?”
ऐश्वर्या के होंठ काँप गए।
“पर… मेरी भी तो कोई इच्छा होती है, रनवीर… मैं डरते-डरते भी कह रही हूँ, पर—”
वह रुक गई।
क्योंकि रनवीर का चेहरा अब और सख़्त हो गया था—ऐसा चेहरा जिसे देखकर वह हमेशा चुप हो जाती थी।
वह फुसफुसाई, लगभग साँस रोके हुए—
"पीलिज… गुस्सा मत हो।”
रनवीर ने धीरे से उसकी ठुड्डी छोड़ी, पर फिर उसकी कलाई पकड़ ली। डरा देने वाला शांत अंदाज़।
“तुम्हें पता है, जब तुम मुझे मना करती हो, तो कैसा लगता है? लगता है जैसे तुम मुझे कंट्रोल करना चाहती हो।”
“नहीं… नहीं रनवीर,” ऐश्वर्या ने तुरंत सिर हिलाया। उसकी आँखों में डर साफ चमक रहा था।
“मैं बस… मैं बस अब अपने फैसले खुद करना चाहती हूँ। थोड़ा सा ही…”
रनवीर ने गोली उसकी हथेली में फिर से रखते हुए कहा—
“फैसले मैं करता हूँ। हमने ये शादी किस तरह चलानी है—ये भी मैं तय करूँगा। समझीं?”
ऐश्वर्या ने पानी की तरफ देखा, फिर गोली की तरफ।
उसकी उँगलियाँ हल्के से काँप रही थीं।
उसे पता था—नहीं मानी तो क्या हो सकता है।
और फिर भी उसके होंठों से धीमी, टूटती आवाज़ निकली—
“लेकिन रनवीर… मैं… मैं बच्चा चाहती हूँ। कृपया…”
रनवीर ने गहरी सांस ली। लगभग दहाड़ से पहले की खामोशी जैसी।
“ऐश्वर्या…”
उसकी आवाज़ अब खतरनाक रूप से धीमी थी—
“अगर तुमने मुझे आज भी चैलेंज किया… तो तुम जानती हो क्या होगा। और ये बात याद रखना—मैं एक बार भी हाथ उठाने के लिए नहीं सोचता।”
ऐश्वर्या की आँखें भर आईं।
इस बार उसके होंठ काँपे भी नहीं।
उसने बस धीरे से सिर झुका लिया—डर और टूटे विश्वास के बीच कहीं फँसी हुई।
कमरा फिर से खामोश हो गया।
और उस खामोशी में… ऐश्वर्या का डर सबसे ज़्यादा चीख रहा था।
सुबह की हल्की धूप डाइनिंग रूम की खिड़कियों से छनकर टेबल पर गिर रही थी। ऐश्वर्या चुपचाप नाश्ता परोस रही थी—दूध गर्म, पराठे सजे हुए, और सामने सलीके से रखा हुआ कटोरी में फ्रूट सलाद।
उसके हाथों में हल्की-सी कंपकंपी थी, लेकिन चेहरे पर वही शांत, मासूम मुस्कान… जिसमें डर छुपा था।
रनवीर कुर्सी पर बैठा अखबार पलट रहा था, पर उसकी आँखें शब्दों पर नहीं—कंट्रोल पर थीं।
ऐश्वर्या ने प्लेट रखते हुए हिम्मत करके कहा—
“रनवीर… क्या आज ही ऑफिस जाना जरूरी है? आज हमारी… इंगेजमेंट ऐनिवर्सरी है।”
रनवीर ने अखबार नीचे रखा और उसे ठंडी, लगभग काट देने वाली नज़र से देखा।
“और?”
स्वर इतना सूखा कि ऐश्वर्या का दिल धक से बैठ गया।
“मैंने सोचा था…” वह धीरे से बोली, “आज हम थोड़ा टाइम साथ—”
रनवीर ने उसे बीच में ही काट दिया।
“ऐश, मेरी जिंदगी में सबसे आखिरी चीज़ जो जरूरी है… वो ऐसी बेकार की रस्में हैं। समझी?”
ऐश्वर्या ने जल्दी से सिर झुका लिया।
“जी…”
रनवीर ने टेबल पर हाथ घुमाते हुए कुछ ढूँढा, और अचानक चिढ़कर बोला—
“मेरा जूस कहाँ है?”
ऐश्वर्या घबरा गई।
“अ-अभी लाती हूँ… बस एक मिनट—”
वह जल्दी से किचन की ओर भागी। उसे पता था—अगर देर हुई तो क्या होगा।
जैसे ही वह अंदर गई, डाइनिंग रूम में टीवी अपने आप अनम्यूट हो गया।
न्यूज़ एंकर की आवाज़ गूँजी—
“ब्रेकिंग न्यूज़—दो खूंखार कैदी जेल से फरार… दोनों पर बैंक लूट और हत्या जैसे संगीन आरोप…”
रनवीर ने आधी नज़र स्क्रीन पर डाली, पर वो फौरन वापस अखबार में व्यस्त हो गया।
न्यूज़ कुछ ही सेकंड में अगले हेडलाइन पर चली गई।
उसी समय ऐश्वर्या वापस आई, हाथ में स्टील का ट्रे और उस पर ताज़ा भरा हुआ ऑरेंज जूस।
“ये… आपका जूस।”
रनवीर ने ग्लास उसके हाथ से झटके से लिया, इतना तेज़ कि ऐश्वर्या का हाथ हल्का-सा डगमगा गया।
वह कुछ बोल पाती उससे पहले ही उसने रूखे स्वर में कहा—
“और सुनो—मेरे पीछे फालतू लोगों से मिलने मत जाया करो। वो पड़ोसी, वो बेकार दोस्त… सब दिमाग खराब कर देते हैं तुम्हारा।”
ऐश्वर्या चुप रही। उसकी उँगलियाँ अपनी साड़ी के पल्लू को मसलने लगीं।
रनवीर ने एक घूँट लेकर ग्लास टेबल पर पटका।
“ध्यान रखना।
समझीं?”
ऐश्वर्या ने धीमे स्वर में कहा—
“जी… समझ गई।”
रनवीर थोड़ा आगे झुककर बोला—
“और एक बात और…”
उसकी आवाज़ अब और खतरनाक हो गई।
“दो क्रिमिनल जेल से भाग चुके हैं।
घर में किसी को भी मत आने देना।
किसी को भी।
यहाँ तक कि कोई जान-पहचान वाला भी दरवाजे पर आए—तो भी नहीं।”
ऐश्वर्या ने आँखें नीचे करते हुए सिर हिलाया।
“मैं… किसी को अंदर नहीं आने दूँगी।”
रनवीर उठ खड़ा हुआ। कुर्सी की आवाज़ कमरे में गूँज गई।
वह कोट पहनते हुए बोला—
“और हाँ—मेरे बिना कहीं मत जाना। तुमको खुद संभालना भी नहीं आता।”
ऐश्वर्या की आँखों में हल्की-सी नमी आ गई, पर उसने तुरंत नज़र फेर ली ताकि रनवीर देख न ले।
“जी…”
रनवीर ने कोई जवाब नहीं दिया। बस दरवाजा खोला और तेज़ कदमों से बाहर निकल गया।
दरवाजा बंद होने की आवाज़ पूरे घर में गूँज उठी।
और उसके बाद…
बस ऐश्वर्या की धीमी, काँपती साँसें ही कमरे में बचीं।
रनवीर घर से निकलने के लिए जूते पहन रहा था। उसकी हाथ की घड़ी की पट्टी कसते समय भी उसके चेहरे पर वही चिड़चिड़ा, घमंडी भाव था।
ऐश्वर्या धीरे-धीरे उसके पास आई।
उसके कदमों में झिझक थी… जैसे हर शब्द बोलने से पहले वह खुद को मन ही मन संभाल रही हो।
“रनवीर…”
उसकी आवाज़ बहुत धीमी थी।
“अगर… अगर मैं अपनी कज़िन अंजली को बुला लूँ तो? बस तीन दिन के लिए। मैं अकेली रहूँगी तो… डर लगेगा। वो दो क्रिमिनल भी फरार हैं…”
रनवीर ने जूते का लेस बांधते-बांधते हाथ रोक दिया।
धीरे से सीधा खड़ा हुआ।
और उसे देखा—एक ऐसे अंदाज़ में, जैसे वो उसकी बात नहीं बल्कि उसकी ‘औकात’ तौल रहा हो।
“अंजली?”
उसने तिरस्कार से भौंह उठाई।
“वही लड़की जो हर बात में दखल देती है? जिसकी हर बात बेकार होती है? वही?”
ऐश्वर्या ने होंठ काटते हुए धीरे से सिर हिलाया।
“वो… वो मेरी बहन जैसी है। बस दो–तीन दिन साथ रहेगी तो मुझे डर नहीं लगेगा। मैं… अकेले रह नहीं पाती।”
रनवीर उसके बहुत करीब आ गया।
इतना करीब कि ऐश्वर्या की साँस अटक गई।
वह बोला—
“डर तुम्हें घर में नहीं लगता, ऐश… डर तुम्हें मुझसे लगता है। और वो वजह है।”
ऐश्वर्या ने नज़र झुका ली—
उसकी उँगलियाँ घबराहट में खुद-ब-खुद आपस में उलझने लगीं।
कुछ पल की खामोशी के बाद रनवीर ने अख़बार उठाया और बेमन से कहा—
“ठीक है।”
ऐश्वर्या ने तुरंत सिर उठाया—
“स-सच में?”
रनवीर ने रूखे, कड़े अंदाज़ में कहा—
“हाँ, ठीक है। बुला लो अपनी कज़िन को।
लेकिन…”
वह उसके पास झुकते हुए बोला—
“अगर उसने घर के किसी हिस्से में अनावश्यक दखल दिया… या तुम्हें मेरे खिलाफ भड़काने की कोशिश की… तो उसे उसी वक्त वापस भेज दूँगा। समझी?”
ऐश्वर्या के चेहरे पर राहत की एक हल्की सी लहर आई, पर डर अभी भी साफ था।
“जी… मैं उसे समझा दूँगी।”
रनवीर ने ठंडी नज़र से उसे देखा, फिर दरवाज़ा खोलते हुए बोला—
“और ध्यान रखना, घर में मेरी इज़्ज़त बनी रहनी चाहिए। अंजली हो या कोई भी… किसी के सामने मुझे शर्मिंदा मत करवा देना।”
वह बाहर निकल गया।
दरवाज़ा एक भारी आवाज़ के साथ बंद हुआ।
ऐश्वर्या ने धीरे से अपनी साँस छोड़ी, जैसे दो मिनट बाद हवा मिली हो।