मदहोशी ए ट्रू लव स्टोरी Ch. 1

मदहोशी ए ट्रू लव स्टोरी - Chapter 1 (आह्ह्हृ ... बेबी और जोर से धक्का मारो आह्ह्हृ...)

Posted by Moon Star • Dec 01, 2025 10:03 PM

राजपूत हाऊस बंगला नहीं लेकिन बंगले से कम भी नहीं था | शहर कि सरहद पर क्या खुबसूरत दिखता था, सुबह की धूप रसोई की खिड़की से अंदर आकर काउंटर पर हल्की-सी सुनहरी परत बिखेर रही थी। ठंड के मौसम में देखने लायक नजरा,

ऐश्वर्या किचन में खड़ी थी—पतली क्रीम-कलर की शिफॉन साड़ी, जिसकी हल्की-सी चिपकती बनावट उसकी पतली कमर और मुलायम पीठ को और उभार रही थी।

बाल ढीले जूड़े में बंधे थे, कुछ लटें बार-बार चेहरे पर गिर जाती थीं।

वो चुपचाप चूल्हे पर रखे दूध को हिलाती जा रही थी…

मन उसी में उलझा था कि आज उनकी शादी की तीसरी सालगिरह है—

और उसी दिन रनवीर थाईलैंड के लिए उड़ जाएगा।

तीन दिन के लिए।

उसे तो आदत हो चुकी थी…

फिर भी दिल को समझाना आज मुश्किल हो रहा था।

कमरा शांत था—बस दूध के उबलने की हल्की-सी आवाज़…

और तभी—

धीमे, भारी कदमों की आवाज़।

जैसे कोई धीमी चाल से शिकार के करीब आता है।

ऐश्वर्या के रगों में एक अनजाना-सा डर, एक सिहरन दौड़ गई।

वो पलटी नहीं।

सिर्फ सांस रोककर सुनने लगी।

कदमों की लय और करीब…

और करीब।

फिर अचानक—

किसी ने पीछे से उसकी कमर जकड़ ली।

ऐश्वर्या का पूरा बदन उछलकर सख्त हो गया।

चाय का चम्मच उसके हाथ से गिरकर काउंटर से टकराया।

“र… रनवीर!”

उसने घबराकर कहा, दिल की धड़कन गले में अटक गई।

रनवीर की पकड़ और कस गई।

उसकी गर्म सांसें ऐश्वर्या की गर्दन पर पिघलती चली गईं।

उसकी उंगलियाँ साड़ी के पल्लू को खींचती हुई उसके पेट तक उतर आईं,

शिफॉन की परत जैसे कुछ भी न छुपा पा रही हो।

“सिर्फ दूध उबाल रही हो?”

उसकी आवाज़ गहरी, धीमी… और खतरनाक थी।

ऐश्वर्या ने धीरे से सिर घुमाया,

उसकी आँखें एक पल को रनवीर से मिलीं—

और पल भर में फिर झुक गईं।

“तुम्हारी पसंद का ब्रेकफास्ट बना रही थी…”

उसकी आवाज़ फुसफुसाहट जैसी थी।

रनवीर की उंगलियाँ उसकी कमर पर एक इंच और खिसकीं—

मसलती हुई, जैसे अपनी मौजूदगी दर्ज कराता हो।

“आज एनिवर्सरी है…”

ऐश्वर्या ने हिम्मत करके कहा,

“सोचा… आज तुम ऑफिस जल्दी…”

वो बात पूरी भी नहीं कर पाई।

रनवीर ने उसके कान के पीछे चेहरा झुकाते हुए कहा—

“मैं तीन दिन के लिए जा रहा हूँ…

पहले तुम्हें अलविदा तो कहने दो।”

उसकी पकड़ अब बिल्कुल काबू करने वाली,

बिल्कुल टॉक्सिक,

पर ऐश्वर्या के भीतर कहीं गहरी जगह पर

ये स्पर्श वही पुरानी हलचल भी जगाता था

जो उसे खुद से भी छुपानी पड़ती थी।

दूध उबलकर ऊपर आ रहा था,

लेकिन दोनों में से किसी को उसकी आवाज़ नहीं सुनाई दे रही थी।

ऐश्वर्या की साँसें तेज़,

कंधा पल-पल पल्लू से फिसल रहा था…

रनवीर की उंगलियाँ उसकी नर्म कमर पर धड़क रहीं थीं…

उसका बदन डर, ख्वाहिश, और उलझन में ठहरा हुआ था।

और तभी—

रनवीर ने उसे और करीब खींच लिया—

किचन हल्की पीली रोशनी में डूबा था।

खिड़की के पर्दे हल्के-से हिल रहे थे, जैसे हवा भी इस खामोशी में कुछ कहना चाहती हो।

ऐश्वर्या रनवीर की बाँहों में थी—

नाज़ुक, हल्की काँपती हुई, फिर भी उसके करीब आने की हिम्मत दिखाती हुई।

रनवीर उसके बालों से खेलते हुए अचानक ठिठका।

उसकी उँगलियों ने साड़ी का पल्लू पकड़कर धीरे-से साइड में गिरा दिया।

ऐश्वर्या की सांस जैसे गले में ही अटक गई।

“रनवीर… रुको,” वो फुसफुसाई।

आवाज़ में मासूम दहशत थी, पर…

उसमें एक अजीब-सा भरोसा भी छुपा था—वो भरोसा जो उसे खुद भी समझ नहीं आता था।

रनवीर की नज़रें उसके चेहरे पर नहीं, उसके हौले से ढकते कंधों पर थीं।

वो हल्की, धीमी मुस्कान—

जो प्यार नहीं, पज़ेशन दिखाती थी।

“तुम्हें लगता है तुम मुझे रोक पाओगी?” उसकी आवाज़ धीमी, ठंडी और पूरी तरह हावी थी।

वो धीरे-से ब्लाउज़ के हुक छू गया।

ऐश्वर्या ने झट से उसका हाथ रोक लिया।

उंगलियों में हल्का-सा कंपन… डर, और खुद को सँभालने की कोशिश।

“प्लीज़… ऐसे नहीं,” उसने आँखें झुकाते हुए कहा।

रनवीर उसकी उंगलियाँ पकड़कर अपने हाथ से हटाता हुआ बोला—

“मेरी बात काटना तुम्हारे बस की बात नहीं है, ऐश।”

उसके लहजे में तानाशाही थी, पर वही टोन ऐश्वर्या को पत्थर की तरह जकड़ देता था—

जैसे वो चाहकर भी उससे दूर नहीं जा सकती।

रनवीर की उंगलियाँ फिर से हुक पर गईं।

ऐश्वर्या की बारीक सांसें तेज़ हो गईं।

उसकी पलकों के नीचे मासूम डर झिलमिला रहा था,

जबकि रनवीर की आँखों में एक ही चीज़ थी—

कंट्रोल।

कमरा सन्नाटे में डूबा था,

और ऐश्वर्या की धड़कनें ही बता रही थीं

कि वो चाहे जितना डर जाए,

रनवीर को "ना" बोलना अभी भी उसके बस में नहीं था।

ब्लाउज का हुक खुलते ही कमरे की हवा जैसे एकदम भारी हो गई।

ऐश्वर्या ने पल भर के लिए अपनी साड़ी को सीने के पास खींचकर पकड़ा,

मानो वो खुद को बचा रही हो—

पर उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं, और ये रनवीर ने साफ देख लिया।

“छोड़ो,” रनवीर ने उसकी कलाई को हल्के-से दबाकर कहा।

लहजा धीमा था, मगर उसमें वो अजीब-सी टॉक्सिक नरमी थी

जो इंसान को मजबूर कर देती है खुद पर भरोसा खोने को।

ऐश्वर्या ने सिर हिलाया, आँखें झुकी हुई।

“रनवीर… मैं—”

वो बोल भी नहीं पाई।

रनवीर ने उसकी ठुड्डी उठाकर उसका चेहरा ऊपर किया।

“डर क्यों रही हो?”

मानो उसे जवाब पहले से पता हो, बस उसकी घबराहट देखना चाहता हो।

ऐश्वर्या की आँखों में मासूम आँच थी—

ना विद्रोह, ना गुस्सा…

सिर्फ उलझन और वो कमजोरी

जिसका फायदा रनवीर जैसे आदमी आसानी से उठा लेते हैं।

जब उसने साड़ी को पकड़ने वाली उसकी उँगलियाँ हटाईं,

ऐश्वर्या का पूरा शरीर हल्का-सा पीछे सिमट गया—

पर वो भागी नहीं।

उसकी साँसें टूटी हुई थीं, और आँखें भीगी हुई।

रनवीर उसके करीब झुककर whisper में बोला,

“तुम्हारी ‘ना’ कभी नहीं सुनी जाएगी, ऐश।

तुम्हारा डर… और तुम्हारी मासूमियत—

दोनों मेरे पास अच्छी लगती हैं।”

ऐश्वर्या के गाल गर्म हो गए,

पर डर उसकी पलकों में अब भी जगा हुआ था।

ब्लाउज खुलने के बाद की उसकी नाज़ुकता

जैसे पूरे कमरे में फैल गई थी।

रनवीर ने उसके कंधों को ढकने की कोशिश तक नहीं की—

बल्कि उस vulnerability को उसी तरह महसूस करने दिया

जैसे वो चाहता था।

और ऐश्वर्या…

वो बस उसके सामने खड़ी रही,

डरी हुई, पर विरोध करने की हिम्मत अभी भी उसके अंदर जन्म नहीं ले पा रही थी।

दीवार ठंडी थी, पर ऐश्वर्या का दिल जल रहा था।

रनवीर ने उसे हल्के-से नहीं—पूरी ताक़त से दीवार से टिकाया,

जैसे उसे याद दिला रहा हो कि उसकी पकड़ से बाहर जाना मुमकिन ही नहीं।

ऐश्वर्या ने काँपते हुए उसकी शर्ट पकड़ी।

“रनवीर… छोड़ो मुझे,”

उसकी आवाज़ धीमी थी, मगर उसमें उतनी ही मासूम दहशत थी जितनी रात की खामोशी में किसी टूटती साँस में होती है।

रनवीर उसके बिल्कुल करीब झुक आया।

इतना कि उसकी साँसें ऐश्वर्या की गर्दन को छूकर नीचे उतरती चली गईं।

उसकी पकड़ ऐश्वर्या के कंधों पर और कस गई—

जैसे वो उसकी नर्मी को अपनी ताक़त के नीचे महसूस करना चाहता हो।

“तुम्हें लगता है मैं रुक जाऊँगा… सिर्फ इसलिए कि तुम चाहती हो?”

उसकी आवाज़ गहरी, धीमी और पूरी तरह हावी थी।

ऐश्वर्या की पलकों में डर का रंग था,

लेकिन उसके चेहरे पर वो अनजाना विश्वास भी—

जो उसे खुद समझ नहीं आता।

रनवीर ने उसका चेहरा अपनी उँगलियों से ऊपर उठाया,

इतना करीब कि उसकी आँखों का काँपना

रनवीर के चेहरे पर साफ पढ़ा जा सके।

“तुम्हारा ये डर…”

वह फुसफुसाया,

“मुझे तुम्हारी सबसे खूबसूरत बात लगता है।”

“तभी रनवीर ने उसे अचानक करीब खींच लिया। ऐश्वर्या की सांसें थम-सी गईं। उसकी उंगलियों की पकड़ गहरी होती गई, और ऐश्वर्या हल्की सिसकी दबा गई। रनवीर उसके हर रिएक्शन को ध्यान से देख रहा था—जैसे उसे उसी कमजोरी की तलाश हो।”

“तभी रनवीर ने एक हाथ ऐश्वर्या के उभार पर, ब्रा के ऊपर ही, रख दिया। ऐश्वर्या की सांसें एक पल को थम-सी गईं। रनवीर उसकी हर छोटी-सी प्रतिक्रिया देख रहा था। उसने उभार को पकड़ा और अपनी पकड़ थोड़ी कस दी। ऐश्वर्या की सांसें भारी होने लगीं, और वह हल्की-सी सिसकी दबा न सकी। तभी रनवीर झुककर, ब्रा के ऊपर से ही, अपने होंठ उसके उभार के पास ले गया और वहाँ हल्का-सा काटा।”

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