My secret billonaire - Chapter 1
" विवान, शादी शुरू होने वाली है तुम ऐसे ही नहीं जा सकते ! " घबराते हुए रिया ने विवान की बांह पकड़ते हुए कहा, उसकी अवाज़ थोड़ी सी कांप रही थी।
आज उनका शादी का दिन था।
फिर भी जैसे ही समारोह शुरू होने वाला था, विवान ने एक टेक्स्ट संदेश पढ़ा, भीड़ की ओर मुड़ा, और घोषणा कर दी कि शादी रद्द कर दी गई है।
आवाज में बेचैनी भरकर कहने लगा सारा को बहुत चोट लगी है। वे अस्पताल में अकेली है, और बहुत डरी हुई होगी। मुझे उसके पास जाना होगा।
रिया के चेहरे का रंग उड़ गया।
सारा विवान की बचपन की प्रेमिका थी।
रिया ने पाँच साल तक विवान को डेट किया था। और पाँच सालों तक, जब भी वो उसके साथ बाहर जाती, अगर सारा को उसकी ज़रा भी जरूरत होती, विवान रिया को पीछे छोड़ देता।
वो हमेशा इस बात पर ज़ोर देता सारा उसके लिए बहन की तरह है और हमेशा रिया को ही समझने के लिए कहता। वो हमेशा ही ऐसा करता।
लेकिन आज उनकी शादी का दिन था।
रिया ने कहा, "आज तुम शादी छोड़ कर नहीं जा सकते। शादी तुम्हारे बिना नहीं हो सकती। चाहे कुछ भी हो, तुम्हें आज रुकना होगा। प्लीज, मैं तुमसे विनती करती हूँ।"
लेकिन उसका धैर्य जवाब दे गया। "बस! स्वार्थी और नासमझी बंद करो। हम शादी कभी भी दोबारा कर सकते है। लेकिन अभी सारा दुखी है।" इससे पहले कि कुछ और कह पाती, वह उसे धक्का देकर आगे निकल गया।
रिया लड़खड़ा गयी और फर्श पर गिर गई, और देख रही थी वो दरवाजे से गायब हो गया। अगले ही पल उसका फोन बज उठा।
बिना सोचे समझे उस ने उत्तर दिया, तो दूसरी तरफ एक लड़की की आवाज सुनाई दी। "रिया, आज विवान के साथ तुम्हारा बड़ा दिन है, है न?" "क्या तुम्हें वो तोहफा पसंद आया जो मैंने भेजा?" "सारा, तुमने ये जानबूझकर किया है, न!"
"ठीक है तुम क्या कर सकती हो, मैं तुम्हें याद दिलाना चाहती हूँ विवान के दिल में हमेशा मैं रहूंगी।"
सारा के लहज़े से अहंकार झलक रहा था। "मुझे यकीन है, तुमने योजना बनाने में महीनों लगाए होंगे, है न? कितनी शर्म की बात है.. सारी मेहनत और सपने धरे के धरे रह गए। सच कहूँ तो, मुझे तुम्हारे लिए बुरा लग रहा है।"
रिया ने अपने गाउन की तरफ देखा, और पहली बार, उसने पिछले 5 सालों को देखा, वास्तव में क्या थे - एक मजाक।
वह अनाथ थी, इसलिए वो एक परिवार के लिए, एक ऐसे प्यार के लिए बेचैन थी जिसे वो अपना कह सके। जो विवान उसे वो कभी नहीं देने वाला था।
अब समय आ गया है कि किसी ऐसी चीज के लिए भीख मांगना बंद कर दे जो कभी उसकी नहीं होगी।
उसके होंठों से एक हंसी निकली, "आगे मत बोलो सारा, शादी अभी भी हो रही है।"
सारा की आवाज तुरंत बदल गयी। "पागल हो क्या? विवान दूल्हा है। वो तो वहाँ है ही नहीं। उसके बिना शादी कैसे करूँ गी?"
रिया के होठों पर हल्की हंसी आ गई। किसने कहा कि दूल्हा विवान ही होगा?
अगर वो इतनी आसानी से जा सकता है, तो वो किसी और को ढूंढ लेगी - कोई ऐसा जो सच में उसके साथ खड़ा रहने का हकदार हो।
उसकी आवाज तेज़ थी। “एक एहसान करो, सारा - विवान तक एक संदेश पहुँचा दो। उससे कहो कि अब मुझे उसकी जरूरत नही है। वो मेरे एक पल के लायक भी नही है। और क्योंकि तुम उसे पाने के लिए बड़ी बेताब हो, एक बेशर्म आदमी और एक बेशर्म औरत क्या ही बढ़िया जोड़ी है। शुभकामनाएँ।"
सारा की आवाज गुस्से से तेज हो गई। “रिया, मैं तुम्हें चेतावनी दे रहीं हूँ। अपनी किस्मत को मत आज़माना”
लेकिन इससे पहले की वो बात पूरी कर पाती रिया ने कॉल काट दी। शादी तीस मिनट में शुरू होने वाली थी। उसे जल्दी नया दूल्हा ढूंढना था।
अपनी कपड़े का किनारा उठा कर वो बाहर भागी। उसे हैरानी हुई कि बाहर सारा काले सूट पहने आदमियों से भरा पड़ा है, वो किसी को ढूंढ रहे थे।
उनके बीच दूल्हे के सूट में एक आदमी व्हीलचेयर पर बैठा था। वो अपने बॉडीगार्ड से बात कर रहा था। “ टाइम हो चुका है,क्या तुम्हें वो मिल गई?”
बॉडीगार्ड झिझका, उसके चेहरे पर तनाव था। “सर हमने पूरी तलाशी ली पर हमें मैडम नहीं मिली, लगता है वो भाग चुकी है...”
“भाग गई?” उस आदमी की आवाज गहरी थी, लेकिन नज़रें ठंडी, वो बेरहम लग रहा था। “अगर शादी समय पर नहीं हुई, तो तुम जानते हो इसका क्या मतलब है।”
रिया ने ये सुना, और एक पल में वो समझ गई कि इस आदमी की भी दुल्हन भाग गई है।
बिना किसी हिचकिचाहट के, वो उसके पास गई, बॉडीगार्ड ने उसे रोका, “मैडम आप क्या कर रही है।”
व्हीलचेयर पर बैठे आदमी ने अपना ध्यान उसकी ओर लगाया, वो रिया की तरफ गहरी आँखों से देख रहा था।
लेकिन रिया टस से मस नही हुई। उसने सीधा उसकी नज़रों से नज़र मिलाई। “सर, मैंने सुना है कि आपकी दुल्हन भाग गई है। अगर ऐसा है, तो मुझे उसकी जगह लेने दीजिये। मैं आपकी दुल्हन बनूंगी।”
रिया के शब्दों पर वो आदमी उसकी तरफ घूर कर देखने लगा। “मैडम, क्या आपको इस बात पर यकीन है? मैं विकलांग हूँ। अगर आप मुझसे शादी करूँगी, तो देर -सवेर आपको पछताना पड़ेगा।”
रिया ने उसको सीधे जवाब नहीं दिया। बल्कि उसने पूछा, “क्या तुम कभी किसी दूसरी औरत के लिए अपनी पत्नी को छोड़ दोगे?”
“बिल्कुल नहीं,” उसने बिना कोई देरी किये उत्तर दिया।
“तो मुझे भी इसका कोई अफ़सोस नहीं होगा”, रिया ने अपना इरादा अटल रखते हुए कहा। “अगर तुम राज़ी हो, तो मैं तुमसे शादी करूँगी।” उसकी आँखों में ईमानदारी देखकर उसके पास मना करने का कोई कारण नही था । धीरे से सोच समझ कर सिर हिलाते हूऐ उसनें कहा “ठीक है ,चलो कर लेते है शादी ।”
और बस इसी तरह रिया की शादी जो रद्द होने वाली थी - योजना के अनुसार आगे बढी।
उस वक्त रिया बस शादी करना चाहती थी चाहे कोई भी आदमी हो।