ACP's Relentless Love - Chapter 3
यहां काफी सारे रिश्तेदार है आराध्या मेहमानों के बीच तमाशा मत बनाओ , आदर्श को वरमाला पहनाओ आपसी मनमुटाव को हम बाद में भी बात करके खत्म कर सकते हैं, फिलहाल शादी खत्म कर लेते हैं, धीरे से कहते हुए अंजना हल्की सी मुस्कुराई और इशारे से उसे वरमाला पहनाने को कहने लगी। तो आराध्या ने आदर्श की तरफ गुस्से से देखा और फिर गुस्से में उसे वरमाला पहना हुए धीरे से उसके कान में बोली!" वेलकम टू हेल मिस्टर आदर्श राजपूत।
क्योंकि आदर्श आराध्या से काफी लंबा था। इसीलिए वो नीचे की तरफ झुका हुआ था और उसने अपना चेहरा भी झुक रखा था जिस वजह से दोनों के चेहरे इस वक्त काफी करीब थे। आदर्श एक पल को आराध्या को अपने इतने करीब पाकर उसमें खो सा गया था। पर उसकी बात सुनकर वो उसे असमंजस से देखने लगा। मतलब कहते हुए आदर्श में आराध्या से सवाल किया।
जिस पर आराध्य टेढ़ा मुस्कुराई और उससे बोली! मुझसे शादी करके तुम अपनी जिंदगी को और खुद को नर्क में लेकर जा रहे हों , जहां तुम्हारी बर्बादी तो तय है तो फिर और क्या कहूं मैं तुम्हें।
उसकी बात सुनकर आदर्श मुस्करा उठा और अपनी आंखों में प्यार लिए वो उसे वरमाला पहनाते हुए धीरे से उससे बोला! जब तुम्हारी जैसी हसीना का साथ मिलेगा मुझे तो फिर मुझे नरक , झन्नूम सब कुछ मंजूर है और वैसे भी प्यार को लेकर दो कहावतें सुन रखी है मैंने , एक ये की ये इश्क नहीं आसान एक आग का दरिया है और डूब के जाना है। और दूसरी ये की प्यार करना खेल नहीं है बच्चों का , तेल निकल जाता है अच्छे-अच्छों का और अब जब मैंने तुमसे इश्क मोहब्बत प्यार कर ही लिया है तो अब आगे उससे होने वाले अंजाम से क्या डरना , जो होगा वो देखा जाएगा, बशर्तें साथ तुम भी हो अगर मैं बर्बाद होऊंगा तो आवाद तुम भी नहीं रहोगी और तुम्हारे साथ तो मुझे मौत भी मंजूर है बर्बादी का तो क्या ही कहना।
कहकर मुस्कुराते हुए उसे देखने लगा। आदर्श की बात सुनकर आराध्या गुस्से में उसे घूरने लगी और आदर्श प्यार से मुस्कुराते हुए उसे चिढ़ाने लगा। तभी रिश्तेदारों की भीड़ में से किसी की आवाज आई ।' अरे ये वरमाला हो रही है या कुछ और ये दोनों तो मंडप में ही शुरू हो गए, अरे बच्चों बात करने के लिए सारी जिंदगी पड़ी है तुम्हारे लिए , पहले शादी की रस्मों को तो पूरा कर लो।
उस आवाज को सुनकर जहां आराध्या चौक गई, वही आदर्श मुस्कुराते हुए सीधा खड़ा हो गया और एक कदम आराध्या से पीछा चला गया और फिर हल्की सी तेज आवाज में सभी से बोला ! " माफी चाहूंगा आप लोगों को मेरी वजह से परेशानी हुई , पर क्या करूं आज मेरी दुल्हन लग ही इतनी खूबसूरत रही है कि मैं उसकी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाया, तो बस उसी की तारीफ में मैं दो शब्दों उसे कह रहा था ।
उसकी बात सुनकर सभी लोग जोरों से मुस्कुरा उठे। तभी आराध्या की कजिन मुस्कुराते हुए तेज आवाज में उससे बोली!" वाह आराध्य तेरे तो भाग खुल गए, कितने प्यार करने वाले जीजू मिले हैं तुझे, देख तो फूल ऑन लट्टू है तुझ पर, सारी जिंदगी रानी बनाकर रखेंगे तुझे , इनका बस चले तो ये तुझे अभी उठा कर यहां से ले जाए। उसकी बात सुनकर लोग एक बार फिर से जोर से हंस दिए । वही आराध्या ने अपना चेहरा नीचे झुका लिया। उसे आदर्श पर गुस्सा आ रहा था।
तभी वर पक्ष के पंडित जी शिवम यानी कि आदर्श के भाई से बोले!" यजमान शादी का मुहूर्त हो गया है वर और वधु को उनकी जगह पर बैठा दीजिए।
तो जी पंडित जी कहकर शिवम आगे आ गया और उसने आदर्श को उसकी जगह पर बैठा दिया। वही अंजना ने आराध्या को उसकी जगह पर बैठा दिया और दोनों की शादी की रस्में शुरू हो गई। आदर्श की बहन ने आगे आकर उन दोनों का गठबंधन कर दिया। धीरे-धीरे शादी की सभी रश्मे पूरी होने लगी जैसे ही कन्यादान का वक्त आया तो दीपक जी आराध्या का कन्यादान करने लगे कन्यादान करते वक्त उनकी पलके भीगी हुई थी और आंसू बहकर उसके गालों पर आ रहे थे। वो आराध्या का हाथ आदर्श के हाथ में सौंपते हुए उससे बोले!" बेटा बहुत नाजो से पाला-पोसा है मैंने इसे , प्लीज इसका ध्यान रखना , इससे कोई गलती हो जाए तो माफ कर देना, अभी नादान है ना तो दुनियादारी की इतनी समझ नहीं है और थोड़ी चंचल भी है तो कभी भी कुछ भी कर देती है। कुछ भी बोल देती है , प्लीज इसकी बातों का बुरा मत मानना , तो आदर्श मुस्कुरा कर उनके हाथ को थामते हुए उनसे बोला!" विश्वास कीजिए पापा आपके विश्वास को कभी टूटने नहीं दूंगा , जिस बेटी को आप इतने विश्वास से मुझे साॅंप रहे हैं ना मैं उस पर एक आंच भी नहीं आने दूंगा, हमेशा उसकी ढाल बनाकर उसके सामने खड़ा रहूंगा , उसे पर आने वाली हर मुसीबत को पहले मेरा सामना करना होगा, मैं ये नहीं कह सकता कि मैं उसे आपके जितना आपसे ज्यादा प्यार करूंगा या आपकी कमी को पूरा कर पाऊंगा , क्योंकि आप एक पिता है तो मैं आपकी जगह कभी नहीं ले सकता ना ही कभी ले पाऊंगा । लेकिन हां अपनी तरफ से आराध्या को खुश रखने की पूरी कोशिश करूंगा , मेरी हमेशा यही कोशिश रहेगी कि मेरी वजह से या मेरे परिवार की वजह से उसे कभी कोई तकलीफ ना हो , उसकी बात सुनकर दीपक जी मुस्कुरा उठे और उन्होंने प्यार से आदर्श के सर पर हाथ फेर दिया !" हमेशा खुश रहो बेटा मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा , आज मुझे तुम्हारी बातों से इतना यकीन हो गया है कि मेरा फैसला गलत नहीं है, मैंने अपनी बेटी के लिए तुम्हें चुनकर कोई गलती नहीं की है।
वहीं अपने पापा की इतनी इमोशनल बातों को सुनकर अनायास ही आराध्या की आंखों से आंसू बहने लगे , वो रोने लगी , ये देख अंजना ने उसके पास आकर उसे चुप कराने की कोशिश की , लेकिन शादी का माहौल इतना इमोशनल हो जाता है कि ना चाहते हुए भी बेटियों की आंखें बहने ही लगती हैं , उन्हें अपना हर वो पल याद आ जाता है जब उन्हें भी इसी तरह किसी और का होकर अपने पिता का आंगन छोड़ना पड़ता है, अपने घर को छोड़कर एक नया घर बसाना पड़ता है। अपनों को छोड़कर परायों को अपनाना पड़ता है। यही इस वक्त आराध्या के साथ और अंजना के साथ हो रहा था। उसे चुप कराने के लिए अंजना आगे आई तो थी लेकिन उसे रोते देख वो खुद भी रोने लगी थी, वही आराध्या की मां भी उसके हाथ पीले करते हुए रो रही थी। खुद आदर्श की बहन की आंखें भी भीग गई थी। उसे भी अपनी शादी की बातें याद आ गई थी, खैर थोड़ी देर बाद अपनी दादी काकी नानी के समझाने पर सभी शांत हुई और शादी की रस्में आगे बढ़ने लगी, धीरे-धीरे फेरे हो गए जैसे ही आराध्य को मंगलसूत्र पहनाने की बारी आई, तो आदर्श ने धीरे से उसके गले में मंगलसूत्र बांध दिया और फिर अपने हाथों को आगे लाते हुए धीरे से उसके गालों पर बह रहे आंसुओं को पोंछ दिया। उसके बाद अंजना ने उसके सामने सिंदूर की थाली आगे कर दी। तो आदर्श ने चांदी के सिक्के से आराध्या की मांग में सिंदूर भर दिया और फिर देखते ही देखते सिंदूरदान और मंगलसूत्र की रस्म भी निपट गई और शादी भी संपन्न हो गई।