ACP's Relentless Love - Chapter 1
मैंने बोला ना पापा मैं ये शादी हरगिज नहीं करूंगी, आप जानते हैं ना मैं रोहित से कितना प्यार करती हूं, मैं उसके बिना नहीं रह सकती, ना हीं मैं उसकी जगह किसी और को दे सकती हूं , तो फिर आप क्यों मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे हैं आपकी इस जिद के कारण तीन जिंदगियां बर्बाद हो जाएगी ,मेरी , रोहित की और आदर्श की। इसलिए , प्लीज पापा रोक दीजिए इस शादी को , इस शादी में शिवाय हम लोगों की बर्बादी के कुछ नहीं है। वो अपने पापा को समझाते हुए बोली।
बेटा तुम समझ नहीं रही हो , रोहित अच्छा लड़का नहीं है ... मैं जानता हूं उसे। उससे एक बार मिलने पर ही मैं उसकी रग रग से वाकिफ हो गया हूं , वो तुमसे प्यार नहीं करता है , बस तुम्हारे साथ प्यार का नाटक कर रहा है वो तुम्हें सिर्फ अपने झांसे में फसा रहा है , ताकि मेरी प्रॉपर्टी उसकी हो जाए ... तुम समझती क्यों नहीं इस बात को! उसके पापा उसे समझाते हुए बोले !
नहीं पापा मेरा रोहित ऐसा नहीं है आपको जरूर कोई गलतफहमी हुई है , प्लीज पापा मुझे रोहित से अलग मत कीजिए , मैं उसके बगैर नहीं रह पाऊंगी ,वो जिद करते हुए बोली।
नहीं मैंने बस कह दिया ना तुम्हारी शादी आदर्श से होगी तो बस उसी से होगी , आज से अभी से उस रोहित को और उसके नाम को अपने दिलो दिमाग से निकाल दो समझी तुम , इसमें तुम्हारी ही भलाई है मैं तुम्हारा बाप हूं दुश्मन नहीं , जो कुछ करूंगा तुम्हारे अच्छे के लिए करूंगा ... ये जानते हुए भी की रोहित तुम्हारी जिंदगी को नर्क बना देगा मैं उसके साथ तुम्हारी शादी कभी नहीं करूंगा , सब कुछ जानते बूझते हुए मैं तुम्हारी जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकता समझी तुम। इसीलिए अब चुपचाप से यहीं रहो , थोड़ी देर में तुम्हारी मां तुम्हें लेने आ जाएगी, शादी का मुहूर्त भी हो चला है । अपनी बेटी की बात सुनकर दीपक का चेहरा सख्त हो गया था। वो सब कुछ जानते बूझते हुए भी अपनी बेटी को नर्क में तो नहीं ढकेल सकते थे , इसीलिए वो शख्ती से अपनी बात कह कर वहां से चले गए।
वहीं उनके जाने के बाद आराध्या रोते हुए वहीं बैठ गई !".. ये आप बिल्कुल ठीक नहीं कर रहे हैं पापा , मैं रोहित के बिना नहीं रह सकती , फिर भी आप सब कुछ जानते बूझते हुए भी मेरी शादी आदर्श से करा रहे हैं , इसके लिए मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी और ना ही आदर्श को ... वो भी मुझे नहीं समझ रहा मैंने उसे कह दिया कि मैं उससे प्यार नहीं करती , उससे शादी नहीं करना चाहती पर फिर भी वो मुझसे शादी कर रहा है, वो चाहता तो शादी के लिए मना कर सकता था , लेकिन नहीं उसने नहीं मना किया , (अपने आंसू पौछते हुए) पर कोई बात नहीं आदर्श इस शादी के बाद में तुम्हारी जिंदगी इस तरह तबाह कर दूंगी कि तुम पछताओगे इस बात को सोचकर भी तुमने मुझसे शादी क्यों की , तुम्हें खून के आंसू ना रुलाया तो मेरा नाम भी आराध्या नहीं , बहुत शौक है ना तुम्हें मुझसे शादी करने का , शादी के बाद तुम्हारा वो हाल करुंगी कि तुम खुद मुझसे दूर भागोगे।
थोड़ी देर बाद उसकी मां ललिता उसे लेने आई , तो उसने गुस्से भरी नजरों से अपनी मां को देखा , तो वो बनावटी हंसी-हंसकर उसे लेकर नीचे चल दी।
वही नीचे हाॅल में सभी रिश्तेदार अपनी अपनी जगह पर बैठे हुए थे और सामने मंडप में बैठे आदर्श को देख रहे थे, लड़कियां उसे देखकर आहे भर रही थी , साथ ही आराध्या की किस्मत से जल रही थी आदर्श एक अच्छी खासी पर्सनैलिटी का मलिक था , उसकी हाइट कुछ 5 फुट 11 इंच थी सुडौल बॉडी और उसका गेहूंआ रंग कुल मिलाकर एक लड़की के सपनों का राजकुमार था वो जिसे देखते ही पहली नजर में हर लड़की उसकी दीवानी हो जाती थी , लेकिन वो तो सिर्फ आराध्या का दीवाना था। जिसे देखने के लिए उसकी नज़रें तरस रही थी और वो मंडप में बैठे हुए भी अपनी नजरों को इधर-उधर घूमाते हुए आराध्या को देखने की कोशिश कर रहा था।
उसे इस तरह देख उसके जीजा जी उसके पास आकर उसके कान में बोले!" अरे साले साहब आ जाएगी आ जाएगी थोड़ी ठंड रखिए काहे को अपनी नजरों को इतना बेकरार कर रहे हैं , जिसका आप इंतजार कर रहे हैं वो आपको इस भीड़ में थोड़ी मिलेंगी , वो इस वक्त दुल्हन है तो आपको थोड़ा इंतजार करवाना तो बनता है।
उनकी बात पर आदर्श शकपका गया फिर वो हल्के से मुस्कुरा कर उनकी तरफ देखते हुए बोला !" आप नहीं समझेंगे जीजू इस बात को , 2 साल का इंतजार है मेरा, जाने कब से मैं आज के इस दिन के आने का इंतजार कर रहा था और आज जब फाइनली वो दिन आया है तो उसको अपनी दुल्हन के रूप में देखने के लिए मुझसे और सब्र ही नहीं हो रहा और ये भाभी कहां है उनसे पूछो तो सही आखिर उनकी बहन है कहां और कितना इंतजार करवाएगी। कहते हुए वो इधर-उधर अपनी नज़रें घूमाकर अपनी भाभी को देखने लगा , जो की थोड़ी दूरी पर बैठी हुई थी और उसकी बुआ की बहू यानी उसकी दूसरी भाभी से बात कर रही थी।
उन्हें देख वो धीरे से अपने जीजू से बोला !" जीजू जाओ ना अंजना भाभी को बुलाकर लेकर आओ , मुझे उनसे बात करनी है .. तो उसके जीजू !" आप भी ना साले साहब , कुछ ज्यादा ही उतावले हो रहे हैं... कहते हुए अपनी सरहज के पास आए और फिर धीरे से उनके कान में कुछ कहने लगे , जिसे सुनकर अंजना ने मंडप में बैठे आदर्श की तरफ देखा , तो आदर्श ने भोला सा मुंह बनाकर इशारे में मिन्नत करते हुए उन्हें अपने पास बुलाया ... जिस पर अंजना मुस्कुरा उठी और अपनी जेठानी जी से अभी आने का कहकर उठकर जीजू के साथ आदर्श के पास मंडप में चली आई ।
कहींए देवर जी क्या हुआ बड़े परेशान दिख रहे हैं आप कहते हुए अंजना अपने घुटनों के बल आदर्श के बगल आकर उसके पीछे बैठ गई , तो आदर्श धीरे से उसके कान में उससे बोला !" परेशान ना होऊ तो क्या करूं भाभी आपने अपनी बहन को देखा है , जाइए ना उसे बुलाकर लाइए और कितना इंतजार करवाएगी वो मुझे , मुझसे उसे देखने के लिए इंतजार नहीं हो रहा और वो है कि सामने आने का नाम नहीं ले रही , अगर इसी तरह रहा तो शादी का मुहूर्त भी बीत जाएगा और साथ में ये रात भी आप देखो ना कहां रह गई वो आप उसे ले आओ।
उसकी बात सुनकर अंजना मुस्कुराते हुए बोली!" ओहो क्या बात है आप तो बड़े उतावले हो रहे हैं देवर जी , थोड़ा तो सबर कीजिए , आ जाएगी वो आपको छोड़कर कहीं भाग थोड़ी जाएगी , रही देखने की बात तो अब तो सारी जिंदगी आपके साथ ही रहेगी, सारी जिंदगी अब आपको ही तो उसे देखना है तो देखते रहना , तब तक थोड़ा इंतजार कीजिए , वैसे भी अब वो आपकी ही है तो फिर इतनी बेसब्री क्यों दिखा रहे हैं ,।