My Forbidden Love Ch. 1

My Forbidden Love - Chapter 1

Posted by ObsidianWriter • Nov 28, 2025 06:41 PM

स्टार होटल.

रूम में एक रेड Color की डिम लाइट जल रही थी. उसी डिम लाइट में एक लडकी, रेड Color की सेक्सी ड्रेस में, बेड पर बेचैनी से बैठी थी।

" उसने रेड Color की वन- पीस पहनी हुई थी जो आगे से काफी खुली थी, उसके कंधे साफ दिखाई दे रहे थे, और ड्रेस एक तरफ से खुली होने के कारण उसकी जांघें भी साफ दिख रही थीं. वह बेहद खूबसूरत लग रही थी, ऊपर से उसकी बॉडी एक परफेक्ट फिगर थी- न बहुत पतली, न मोटी, मीडियम।

" पर खास बात यह थी कि उसके गले में मंगलसूत्र और मांग में सिंदूर भी था, जो इस बात की गवाही दे रहा था कि वह शादीशुदा है।

" वह डरी- सहमी सी बैठी अपने हाथों को आपस में मसल रही थी. उसके शरीर में हल्की सी कंपकंपी थी, जो देखने से ही पता चल रही थी. पसीने माथे पर बार- बार आ रहे थे, जिन्हें वह बार- बार साफ कर रही थी. वह बुरी तरह घबरा रही थी।

" वह बेड पर सिर झुकाकर बैठी थी, आंखों में आंसू थे, मन में दर्द था।

" तभी अचानक एक तेज आवाज के साथ कमरे का गेट खुला और एक आदमी पॉकेट में हाथ डालकर अंदर आया. काली गहरी आँखें, क्लीन शेव, न मूँछें, न दाढी, पूरा क्लीन था, गोरा सा चेहरा, लंबी हाइट, लंबी सी नाक, तीखे नैन- नक्श. कुल मिलाकर वह बेहद हैंडसम था. उसकी पर्सनैलिटी किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं लग रही थी, लेकिन उसका ओरा काफी ठंडा था, जो उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था।

" उस शख्स ने जैसे ही अपने कदम बेड की तरफ लिए, सामने एक लडकी को देखकर उसके कदम वहीं रुक गए. अचानक उसकी काली गहरी आँखें बदलने लगीं, कठोर हो गईं, जिनमें सिर्फ गुस्सा दिखाई दे रहा था. गुस्से में लाल लिए वह सामने बैठी लडकी को देखने लगा।

" वह आदमी कोई और नहीं, सृजन अत्रे था, जो बिजनेस की दुनिया में एक जाना- माना चेहरा था. ऐसा कोई नहीं था जो सृजन को न जानता हो. लेकिन उसके अंदर एक खास बात थी- आज तक उसने किसी लडकी को हाथ नहीं लगाया था. हाँ, उसके आगे- पीछे लडकियाँ घूमती हैं, मगर वह एक दूरी बनाए रखता था. उसे लगता था कि बिना रिश्ते के किसी लडकी को छूना पाप है. वह सबको सम्मान की नजरों से देखता था, इसीलिए दुनिया उसे और ही चाहती थी. लेकिन दुनिया उसकी तरह नहीं है. लोग जानते हैं कि एक मर्द की कमजोरी खूबसूरत औरत है, और अपना काम बनाने के लिए वह ऐसे हर एक बिजनेस ट्रिप पर लडकियाँ उसके लिए भेजी जाती हैं, जैसे आज भी उसके लिए कोई लडकी भेजी गई थी शादी सुदा"

" जो कि इस बार मायरा थी, जिसके पति ने खुद अपनी बीबी को किसी और के साथ सोने के लिए भेजा था, जो एक मजबूरी में यहाँ आई थी. दिल में दर्द था, लेकिन उसकी मजबूरी उसे यह सब करने के लिए मजबूर कर रही थी. वह जैसे ही सृजन को अंदर आते देखी, कांपने लगी, लेकिन हिम्मत नहीं हुई सिर उठाकर देखे।

" वह उसी तरह बैठी रही. सृजन ने उसे ऊपर से लेकर नीचे तक देखा और कदम खिडकी की तरफ बढाया. कुछ देर तक उस कमरे में शांति बनी रही, फिर सृजन ने उस शांति को भंग करते हुए कहा, शादीशुदा होकर ऐसा काम करते हुए शर्म नहीं आ रही? ऐसी भी क्या चाहत जो खुद के बेचनेपर मजबूर कर दे'

" सृजन ने अपनी कडक आवाज में कहा, उसकी बात मायरा के दिल को भेद गई, लेकिन वह हिम्मत करके सिर ऊपर उठाया और बेड से उतरकर सृजन के पीछे खडी होकर बोली, जब रास्ता न हो, तो यही करना पडता है, साहब कभी कभी ईशान मजबूर हो जाता है"

" मायरा की आवाज पतली और काफी मीठी थी. एक पल को सृजन की आँखें झिझक गईं. वह पीछे मुडा तो आँखों के सामने मायरा का खूबसूरत चेहरा, उसकी खूबसूरत आँखें जिसमें वह एक पल को खो गया. बडी- बडी काली कजरारी आँखें, छोटी सी नाक, गोल सा चेहरा जो किसी गुलाबी से कम नहीं था. उसके चेहरे को देखकर यह नहीं कहा जा सकता था कि वह पतली है।

" चेहरे से मोटी और शरीर से पतली थी. सृजन उसकी आँखों में बारी- बारी देख रहा, जहाँ दर्द, मासूमियत और कई सारे इमोशन थे, लेकिन आँखों में दर्द बहुत ज्यादा था. वह उन्हीं आँखों में खोया बोला, रास्ते कई सारे होते हैं, लेकिन मुश्किल पर चलना सबके बस की बात नहीं, यहाँ हिम्मत चाहिए होती है, जो तुम्हारे पास नहीं है ऐसा लगता है।

" मायरा इस बात पर कुछ नहीं बोली, बस sir नीचे झुका लिया. यह देख सृजन ने सिर ऊपर उठाया तो एक बार फिर मायरा की नजरें ऊपर उठीं, वह सृजन को देखने लगी. तभी सृजन ने कहा, पति के प्रमोशन के लिए यह खुद की कुर्बानी दे रही हो? क्या तुम्हारी आत्मा इसकी गवाही देगी? अगर हाँ, तो मैं तैयार हूँ, लेकिन याद रखना, मैं रुकने वाला नहीं हूँ।

" सृजन ने गहरी बात कही, जिसे सुनकर मायरा की आँखों से आँसू निकलकर गालों पर आ गए. वह रोना नहीं चाहती थी, लेकिन कोई उसे देखकर समझ ले, ऐसा इंसान वह पहली बार देख रही थी. उसे रोता देखकर सृजन ने हाथ आगे बढाया और उसकी आँखों से आँसू साफ करते हुए बोला, पति की हर बात सिर आँखों पर रखना जरूरी है, लेकिन कभी- कभी गलत का विरोध भी जरूरी होता है. तुम्हें यहाँ बिना मर्जी के भेजा गया है, मैं हाथ नहीं लगा सकता।

" लेकिन. मायरा कुछ कहने ही वाली थी कि सृजन ने रोकते हुए कहा, यही मेरा आखिरी फैसला है, जा सकती हो।

" सृजन यह बात कह फिर से मुड गया. मायरा अपने पति कुलदीप के बारे में सोचकर कांप गई, उसकी बातें उसके कानों में गूँजीं, अगर बॉस खुश नहीं हुआ, तो समझ लेना मैं खुश नहीं हुआ, और अगर मैं खुश नहीं हुआ, तो तुम अच्छे से जानती हो, मैं क्या करूँगा।

" यह याद आते ही मायरा ख्यालों से झटके में बाहर आई. वह खडी बस सोचने लगी कि कैसे वह इस सिचुएशन से निकले. उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था, वही सृजन मन में उसकी बेचैनी, घबराहट, उसकी आँखों में हर वह इमोशन देख रहा था जो मायरा की आँखों में था।

" कुछ देर की चुप्पी के बाद वह मुडकर बोला, तुम यही चाहती हो, तो ठीक है, मैं अपना नियम तोडने के लिए तैयार हूँ. आखिर इतनी खूबसूरत लडकी से कौन दूर भाग सकता है?

" सृजन ने कहा और एकदम से मायरा की कमर में हाथ डालकर उसे खुद के करीब खींचा, इतना कि दोनों में हवा क्या, रोशनी भी आर- पार नहीं होगी.

" अगली सुबह मायरा की आँखें खुलीं, तो उसने खुद को बेड पर पाया. वह झटके से उठी और बैठ गई, चारों तरफ देखा- कहीं वह अकेली तो नहीं थी? उसने एक नजर खुद को देखा तो रात के ही कपडे पहने हुए थी. यह सब देखकर मायरा को हल्का सुकून सा मिला. वह बेड से उठने को हुई तभी उसकी नजर बगल में रखे Check पर गई. उसकी आँखें सिकुड गईं. दूसरे पल के लिए उसने Check को हाथ में उठाकर देखा- उसमें दस लाख का अमाउंट लिखा था।

" दस लाख? सृजन ने दिया था, बताया नहीं, लेकिन मायरा की हंसी छूट गई, खुद के ऊपर या फिर सृजन के ऊपर, जिसने दस लाख उसके ऊपर बर्बाद किए थे।

" वह अभी उस Check को देख ही रही थी, तभी उसकी नजर बेड के पास में रखे एक लेटर पर गई. वह काँपते हाथों से लेटर उठाकर Check को वहीं रखा और लेटर खोलकर पढने लगी।

" डियर, तुम्हारा नाम मुझे नहीं पता और न ही मैंने कुछ खैर, ये मेरी तरफ से कुछ पैसे हैं जो तुम्हारे पति का मुँह बंद कर सकता है. बाकी मैं चाहूँगा तुम खुद के लिए लडो और मेरी तरफ से फिक्र मत करना. रात की सच्चाई किसी को नहीं बताऊँगा. बॉय।

" मायरा को नहीं पता था कल वह जिससे मिली, वह कौन है, कैसा इंसान है, लेकिन हाँ, इस लेटर ने जरूर सृजन का रूप मायरा की नजरों में अच्छा कर दिया. जो मर्द जिस्म के सिर्फ भूखे होते हैं, वही सृजन ने बस उसका साथ दिया, उसने लडने की चाह दी. उस वक्त जब मायरा कमरे से वापस जा रही थी.

जारी ✍️

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