आअह्ह्ह्........ (Forced wife) Ch. 3

आअह्ह्ह्........ (Forced wife) - Chapter 3

Posted by miss puja 🦋 • Nov 02, 2025 08:17 AM

पिछले अध्याय में आपने देखा कि भारद्वाज मेंशन को दुल्हन की तरह सजाया गया था। नीलिमा और कौशल्या शादी की तैयारियों का जायजा ले रही थीं। नियति को दुल्हन के जोड़े में तैयार किया गया, हालाँकि ये उस आदमी के बारे में अनजान थी जिससे उसकी शादी होने वाली थी।

अब आगे

नीचे आने पर, नियति को मंडप में बैठा दिया जाता है। शादी बिना दूल्हे के होती है, और नियति चुपचाप सभी रस्में निभाती है। इस बीच, एक निजी जेट से एक आदमी बैसाखी के सहारे उतरता है। वे भारद्वाज मेंशन पहुँचता है और मंडप में पहुँचकर, नियति को देखता है। शादी पूरी होने पर, नियति को नरेन भारद्वाज की पत्नी घोषित किया जाता है। रात में, जूही नियति को कमरे में ले जाती है। नियति डरती है क्योंकि उसने अपने पति को नहीं देखा है, और वह उसकी आवाज से ही डरती थी। अब उसे उस आदमी के साथ रहना होगा।

Now Next

--------

नियति के पैर डर के मारे कांप रहे थे और वह रूम के अंदर जाने से मना कर रही थी बार-बार

लेकिन जूही उसको समझाए जा रही थी परंतु नियति अंदर नहीं जा पा रही थी ,,,,,

वह डर के मारे कांपते हुए जूही का हाथ पकड़े हुऐ थी

फिर वह जूही से कहती

"" जूही तुम भी मेरे साथ अंदर चलो ना "

जैसे ही जूही ने नियति की ये बात सुनी तो जूही अपनी आंखें बड़ी करते हुए बोलती है

""ना बाबा ना ,,,,

मैं अंदर नहीं जाऊंगी , मुझे इन सब में नहीं पड़ना है

तुमने नरेन भारद्वाज को अपनी जिंदगी में खुद चुना है तो तुम ही भुगतो ,,,,

मुझे भूलकर भी उसके सामने नहीं जाना है ,,,

मैं इस मुसीबत में नहीं पड़ना चाहती हूं

,,,

तुम ही ने इस मुसीबत को चुना है तो तुम अब इस मुसीबत को ही झेलो माय लवली भाभी "

ये कहते हुए जूही शरारत भरी आंखों से नियति को देखती हैं वही उसकी ऐसी शरारत देखकर नियति का मुंह फूल जाता है और वह अपने दांतों को पीसते हुए बोलती है

"जूही तुम मेरी दोस्त हो और

तुम्हें दिख रहा है ना मैं कितना ज्यादा डर रही हूं ??

लेकिन फिर भी तुम मेरे मजे लिए जा रही हो ,,,??

तुम्हें दिख नहीं रहा मैं डर के मारे कितने बुरे तरीके से कांप रही हूं "

तभी जूही नियति से कहती हैं

" हां मैं ही मजे ले रही हूं ,,क्योंकि अब तुम मेरी दोस्त से भाभी बन चुकी हो ,तो भाभी के साथ तो हंसी मजाक होता ही है और मैं तो तुम्हारे साथ हंसी मजाक करूंगी "

जूही की बात सुनकर के नियति फिर से चिढ़ जाती है और वह चिढ़ते हुए जूही को देखने लगती है वही जूही उसको और छेड़ ते हुए कहती है

" चलो अब मैं चली सोने के लिए तुम अपनी नाईट एंजॉय करो

,,,

बस ध्यान रखना की भाई को गुस्सा ना आए ,,एडरवाइज कल तुम्हारे लिए मुसीबत हो सकती है "

ये कहते हुऐ जूही नियती को आंख मार देती है और वहां से चली जाती है

जूही वहां से चली जाती है उसके जाते ही नियती और भी ज्यादा डर जाती है और डरी हुई रूम के बाहर खड़ी रहती है

वह कभी इधर-उधर देखती हैं तो कभी गेट को देखती हैं लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी रूम के अंदर जाने की

तभी वहां पर कौशल्या जी आती है और वह अपनी सख्त आवाज में कहती हैं

"तुम अभी तक यहीं खड़ी हो ??

अंदर नहीं गई हो? "

नियति ने जैसे ही कौशल्या जी की आवाज सुनी तो नियति की आंखें एकदम से बड़ी-बड़ी हो गई और वह फिर खुद को संभालते हुए नॉर्मल करते हुए बोलती है

" जी वो ,,दादी मां मैं जा रही हूं रूम के अंदर अभी मैं जा ही रही थी"

अब नियति चाह कर भी बाहर नहीं रह सकती थी क्योंकि बाहर दादी मां थी और अंदर नरेन

नियति के लिए अब वह सिचुएशन हो चुकी थी

आगे कुआं पीछे खाई ,,,,,

नियति को दादी मां से बहुत ज्यादा डर लग रहा था इसलिए वह एक पल भी ना गवाते हुए सीधा रुम के अंदर इंटर कर जाती है लेकिन अंदर जाते हुए और भी बुरे तरीके से कांपने लगती है और जैसे उसने रूम को देखा तो वह रूम उसको किसी डार्क हाल से कम नहीं लग रहा था

उसका ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी भूतिया रुम के अंदर आ चुकी है

नियती यह सब सोच ही रही थी कि जैसे हि उसने अपनी आंखें खोली तो उसने देखा कि वह कोई भूतिया रुम नहीं है बल्कि बहुत ही प्यार और खूबसूरत रूम है

उसके अंदर सारी लग्जरी चीज रखी हुई है और एक से एक यूनिक चीज लगी हुई है और आज तो वह और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था

पूरे रूम को फूलों से सजाया गया था और वहां पर जो बेड था वह भी ज्यादा काफी यूनिक था

उसको भी बेहद खूबसूरत तरीके से सजाया गया था और पूरे रूम में गुलाब की पंखुड़ी की खुशबू हो रखी थी

नियती ने रूम को डेकोर देखा तो उसकी धड़कने और भी ज्यादा तेज हो गई और वह पहले से ही डरी हुई थी अब और भी ज्यादा डरने लग गई था

क्योंकि आज उस की सुहागरात थी और वो भी एक ऐसे इंसान के साथ जिस को उस ने कभी जिंदगी में देखा भी नहीं था और मंडप में भी वह मौजूद नहीं था

आज नियति का उस आदमी से सामना होना था जिसके डर से वह आज तक छिपती रही और कभी वह उसके सामने नहीं आई

नियती पूरे रूम में अपनी नजर घूमती और पूरे रूम को अच्छे से देखती हैं वह अपने धीरे-धीरे कदमों के साथ बेड के पास जाती है

नियति पूरी रूम को अभी ध्यान से देख रही थी लेकिन नियति को उस रूम में कोई भी दिखाई नहीं देता था

बस नियति की ही वहां पर चलने की आवाज आ रही थी

नियति खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी और फिर वह कंट्रोल करते हुए कहती है

" नियती तू इतना क्यों डर रही है ??

यहां पर कोई भी नहीं है रिलैक्स हो जा ,,,

कुछ भी नहीं होगा और तू इस रूम में अकेली ही है "

जैसे तैसे करके नियती खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी और वह डरी हुई थी और जब उसने देखा कि रूम में कोई भी नहीं है तो अब उसकी घबराहट धीरे-धीरे कम होने लग गई थी और जब वह रूम के बाहर थी तो उसे लग रहा था कि अंदर नरेन होगा इसलिए वह और भी ज्यादा डर लग रही थी

नियती शादी के जोड़े में ही थी और उसने अपने सर पर घूंघट डाला हुआ था जब वह रूम के अंदर जाती है और खुद को रिलैक्स फील करती है तो वह अपने सर से घूंघट उठाती है और फिर जैसे हि वह घूंघट उठाकर रिलैक्स होकर बेड पर बैठने को होती है तभी रूम का गेट खुलता है और रूम के अंदर कोई आता है

नियति में जैसे ही गेट की तरफ देखा तो उसके चेहरे का रंग एकदम से उड़ गया और उसकी आंखों में बहुत सारे सवाल आ गए थे

उसकी आंखों में एक से एक सवाल आ रहे थे ,,

जैसे उसने पता नहीं क्या देख लिया हो

100%