श्रापित एक श्राप की दास्तां Ch. 2

श्रापित एक श्राप की दास्तां - Chapter 2(शताक्षी बाई का मकसद)

Posted by Author Dream Girl✍️. • Oct 19, 2025 06:52 PM

"महाराज उदय प्रताप सिंह के मुंह से वचन का सुनकर पूरे राज्य के लोग और महल में खड़े सभी लोग आश्चर्य से महाराज को देख रहे थे।

"तभी रानी मीनावती ने महाराज उदय प्रताप सिंह की तरफ देखकर कहा" महाराज आप किस वचन की बात कर रहे हैं। हम कुछ समझ नहीं और ऐसा क्या वचन किया है। आपने जो हम सबको निभाना होगा।

"तभी शताक्षी बाई ने रहस्यमयी तरीके से मुस्कुराते हुए कहा" आज से 2 दिन बाद वो रात आने वाली है। तभी आप को हमें दिया हुआ वचन निभाना होगा। आप सबको जीवन भर के लिए इस वचन में बांध दिया जाएगा।

"महाराज उदय प्रताप सिंह ने दासी की तरफ देखकर कहा" शताक्षी बाई को इनका कक्ष दिखा दिया जाए। सभी हैरानी से महाराज उदय प्रताप सिंह की तरफ देख रहे थे। फिर महाराज उदय प्रताप सिंह वहां से अपने कक्ष की तरफ चले गए। शताक्षी बाई रहस्यमय तरीके से मुस्कुराते हुए रानी मीनावती की तरफ देख रही थी।

"रानी मीनावती आश्चर्य से शताक्षी बाई की तरफ देख रही थी। उनका इस तरह मुस्कुराना रानी मीनावती को थोड़ा अजीब लग रहा था फिर उन्होंने ज्यादा नहीं सोचा। उन्होंने अपने दोनों बच्चों का हाथ पकड़ा और वहां से चली गई।

आधी रात के वक्त...

रानी मीनावती अपने कक्ष में सो रही थी तभी उन्हें कुछ अजीब आवाज़ सुनाई देने लगी। जिससे उनके नींद में खलल पड़ा और उनकी नींद टूट गई। वह उठकर बैठ गई और फिर उन्होंने खुद से कहा" यह अजीब सी आवाज है। कहां से आ रही है। और वह भी इतनी रात को रानी मीनावती भाई ने महाराज उदय प्रताप सिंह की तरफ देखा जो सो रहे थे। फिर वह उठकर अपने कक्ष से बाहर आई और उसे आवाज की दिशा में चलने लगी। महल में चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। जब से शताक्षी बाई ने इस महल में कदम रखा था। तब से महल काफी भयानक लग रहा था। थोड़ी देर बाद वह एक कक्ष के दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई। उन्होंने दरवाजा थोड़ा सा खोलकर अंदर की तरफ देखा अंदर की तरफ देखकर उनकी आंखें हैरानी से फैल गई। उन्होंने डर से अपने मुंह पर हाथ रख लिया।

"कक्ष के अंदर शताक्षी बाई बीच में बैठी हुई थी। इस वक्त उन्होंने काले रंग का कपड़ा पहन रखा था  और उनके सामने हवन कुंड बना हुआ था। जिन में वह अपना काला जादू टोना कर रही थी। शताक्षी बाई ने एक खून से भर प्याला उठाया और फिर हवन कुंड में उसकी आहुति देखकर फिर शैतानों की तरह हंसने लगी। उन्होंने हंसते हुए कहा" आज की मेरी यह पूजा सफल हुई बस 2 दिन और है। उसके बाद फिर वह होगा जो मैं हमेशा से चाहती थी। बस एक बार अमावस की रात में उस पूजा में महाराज उदय प्रताप सिंह हमारे साथ बैठकर वह पूजा करें फिर इस धरती पर शैतानों का राज होगा। फिर शताक्षी बाई ने अपने दोनों हाथों को उठाकर जोर से हंसते हुए कहा" हमारे बरसों की इच्छा अब पूरी होगी। जब नरक के देवता इस धरती पर आएंगे। तब इस धरती पर सिर्फ शैतानो की हुकूमत होगी।

"रानी मीनावती ने जब यह सब देखा। तो वह जल्दी से वहां से भाग कर अपने कक्ष में आई और फिर गहरी सांस लेते हुए कहा" है माता रानी इसका मतलब यह शताक्षी बाई जादू टोना करती है। कहीं इसने हमारे महाराज को अपने वश में तो नहीं कर रखा है। और यह क्या करना चाहती है। नहीं ऐसा नहीं हो सकता। हम इसको इसके गलत इरादों में कभी कामयाब नहीं होने देंगे।

"सुप्रभात के समय रानी मीनावती की नींद जल्दी खुल गई वह जल्दी से रेडी हुई। और उन्होंने अपने एक खास दासी को अपने पास बुलाया फिर उनसे बात करते हुए कहा" बिना हमें तुमसे बहुत जरूरी बात करनी है। बिना रानी मीनावती की सबसे खास और वफादार दासी थी। रानी मीनावती को बिना पर सबसे ज्यादा भरोसा था।

"बिना ने रानी मीनावती की तरफ देखकर कहा" महारानी साहिबा आप हुकुम दीजिए। हम आपके लिए क्या कर सकते हैं।

"रानी मीनावती ने कहा" बिना हमें थोड़ी देर के लिए महल से बाहर जाना है। लेकिन याद रहे इस बात का पता किसी को भी नहीं चलना चाहिए। यहां तक के महाराज को भी नहीं।

"बिना ने रानी मीनावती की तरफ देखकर कहानी साहिबा आप इतनी परेशान क्यों लग रही है। जरूर कोई बात है। और आप कहा" जाना चाहते हैं ।

"रानी मीनावती ने परेशान होते हुए कहा" बिना हमसे ज्यादा सवाल मत करो। हम इस वक्त तुम्हें कोई भी जवाब नहीं दे पाएंगे। बस इतना समझ लो कि हम किसी जरूरी काम से इस महल से बाहर जाना चाहते हैं। क्योंकि हमारा पूरा राज्य एक बहुत बड़ी मुसीबत में फसने वाला है। बस इस मुसीबत से पूरे राज्य को बचाने के लिए हमें अभी इसी वक्त महल से बाहर जाना होगा। और इसमें हमें तुम्हारी मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है।

"बिना ने कहा" रानी साहिबा आप निश्चिंत रहें इस बारे में किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। लेकिन हम आपको इस तरह महल से अकेले बाहर जाने नहीं दे सकते। इसमें आपकी जान को खतरा हो सकता है हम अभी आते हैं। फिर बिना रानी मीनावती के कक्ष से बाहर चली गई। रानी मीनावती उसे जाते हुए देखती रही। थोड़ी देर बाद जब बिना कक्ष में वापस आई। तो उनके साथ एक सैनिक था  जो सच्चा और वफादार था।

"बिना ने रानी मीनावती की तरफ देखते हुए कहा" रानी साहिबा यह सैनिक जिस पर आप सबसे ज्यादा भरोसा करती हैं। आप अकेले महल से बाहर नहीं जाएंगे। आप इस सैनिक को अपने साथ ले जाएं।

"रानी मीनावती ने मुस्कुराते हुए कहा" बिना आपने हमारे लिए इतना सोचा इसके लिए आपका धन्यवाद पर हम अकेले ही जाएंगे। और हमारे पीछे से आप हमारे युवराज और राजकुमारी का ध्यान रखना। क्योंकि अब यह महल सुरक्षित नहीं है। बस हम आपसे इतना ही कह सकते हैं।

"सैनिक ने रानी मीनावती के सामने सर झुकाते हुए उन्हें सम्मान देते हुए कहा" रानी साहिबा आपकी बात ना मानने के लिए माफी चाहता हूं। पर हम आपको ऐसे अकेले बाहर नहीं जाने दे सकते। जब यह महल सुरक्षित नहीं है तो आप भी सुरक्षित नहीं है। और यह हम बिल्कुल नहीं चाहेंगे। कि हमारे होते हुए आप पर कोई खतरा आए।

"रानी मीनावती ने सहमति जताते हुए कहा" ठीक है पर बिना आप हमारे युवराज और राजकुमारी का ख्याल रखना। क्योंकि वह शताक्षी बाई एक जादूगरनी है और हमारे पीछे वह कुछ भी कर सकती है। उसने महाराज को अपने वश में कर रखा है। बस उसी का तोड़ निकालने के लिए हम इस महल से बाहर जा रहे हैं। और हम जल्द ही वापस लौट आएंगे।

"बिना हां में सर हिलाते हुए कहा" रानी साहिबा हम यहां सब संभाल लेंगे। आप भी अपना ख्याल रखना फिर रानी मीनावती सैनिक के साथ महल के पिछले हिस्से से रवाना हो गई।

°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

आखिर रानी मीनावती अब कैसे शताक्षी बाई के मकसद को पूरा होने से रोकेगी क्या रानी मीनावती इसमें कामयाब हो पाएगी

100%