पैसों में आग लगा दी
मयूरी जैसे ही कॉल सेंटर के सामने उतरती है, वह घबराकर अपनी घड़ी में टाइम देखती है। लगभग 10 बज रहे थे और उसका टाइम भी 10:00 का ही है। अगर वह 10:05 पर भी पहुंचेगी, तो उसकी टीम लीडर उसे बहुत सुनाएगी।
मयूरी जल्दी से अपने पर्स में से ₹20 निकालती है और ऑटो वाले के हाथ में रख कर वहां से जल्दी से निकलने को होती है। पर तभी ऑटो वाला उसे रोकते हुए कहता है, “अरे मैडम ₹20 कहां दे रहे हो? ₹30 और दो। ₹50 बनते हैं। मंदिर से यहां तक के ₹50 किराया है।”
मयूरी अपने दोनों हाथ कमर पर रखती है और मुंह बनाते हुए कहती है, “घाटकोपर से आई हूं क्या मैं? जो मुझे बेवकूफ बना दोगे। रोज का आना जाना है मेरा। ये शान पट्टी किसी और को दिखाना जा कर। मंदिर से यहां तक के ₹20 ही लगते हैं और मैं 20 ही दूंगी। चाहिए तो बोलो वरना मैं वह भी नहीं दूंगी।”
ऑटो वाला बाहर निकलता है और मयूरी को घूर कर देखते हुए कहता है, “देखो मैडम, लड़की हो, इसीलिए तमीज से बात कर रहा हूं। वरना अपने पैसे निकालना मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं।”
मयूरी चिल्लाते हुए कहती है, “धमकी दे रहे हो? मुझे धमकी दे रहे हो? बताऊं अभी? बुलाऊं पुलिस को? ₹20 के लिए कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते फिरोगे।”
ऑटो वाला हैरानी से मयूरी को देखता है और कहता है, “पागल हो क्या ₹20 के लिए पुलिस बुलाने की धमकी दे रही हो? इतनी बड़ी कंपनी है पीछे और ₹20 के लिए बहस कर रही हो।”
कंपनी की ऊंचाई देख कर मयूरी हैरानी से कहती है, “अरे ये कंपनी क्या मेरे ससुर की है? काम करती हूं यहां पर। मुझे दहेज में नहीं मिल रही है ये कंपनी।”
तभी मयूरी के कंधे पर एक नाजुक सा हाथ आता है और एक लड़की मयूरी के गले में टंगते हुए कहती है, “हां ये काम करती है यहां पर। लेकिन अगर अगले 5 मिनट में ये अपने वर्कस्टेशन पर नहीं पहुंची ना, तो इसके ससुर जी कंपनी से इसे निकाल दिया जाएगा।”
उस लड़की ने अपने पर्स में से ₹30 निकाले और ऑटो वाले के हाथ में रखते हुए कहा, “चलो निकलो यहां से और आज के बाद इस कंपनी के आसपास दिखे मत जाना। वरना सवारी मिलना तो दूर की बात है, ये लड़की तुम्हारा ऑटो ही तोड़ देगी।”
वो ऑटो वाला जल्दी से उस ऑटो को लेकर चला जाता है और मयूरी उस लड़की को देखते हुए कहती है, “श्रुति क्या जरूरत थी उसे पैसे देने की? तुझे पता है, वह ₹30 एक्स्ट्रा मांग रहा था।”
श्रुति हंसते हुए अपना माथा पीट लेती है और कहती है, “मयूरी देशमुख, एक समय पर देशमुख ग्रुप का इंडस्ट्री के मालिक विजय सिंह देशमुख की बेटी जो करोड़ों में खेला करती थी। आज ₹30 के लिए ऑटो वाले से झगड़ा कर रही है।”
मयूरी का चेहरा मायूसी से नीचे लटक जाता है और वह कहती है, “क्या करूं श्रुति? हालत की बात है। तब हालात कुछ और थे और अब कुछ और हैं। अब पापा नहीं रहे और उनकी प्रॉपर्टी भी अब मेरी नहीं रही। इस प्रॉपर्टी के लिए तो केस लड़ रही हूं और लॉयर को देने के लिए पैसों की जरूरत है जिसके लिए मुझे काम करना पड़ता है।”
मयूरी की बात सुन कर श्रुति ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे समझाते हुए कहा, “तू क्यों फ़िक्र कर रही है? देख मैं जहां तक तेरी मदद कर सकती थी, मैंने किया। मैंने तुझे अपनी कंपनी में जॉब लगवाई। अब ये सेल्स डिपार्टमेंट है और तूने पूरे महीने में एक भी सेल्स नहीं किए हैं, टीम लीडर से लेकर मैनेजर तक तुझसे नाराज हैं ऊपर से आज भी तुझ पर भड़के हुए भी हैं। क्योंकि तू लेट काम पर आई है। तुझे लगता है, तू सबसे हैंडल कर लेगी?”
श्रुति की बात सुन कर मयूरी की आंखें एकदम से बड़ी हो जाती हैं और वह कंपनी के अंदर भागते हुए कहती है, “अरे तूने कहा मुझे बातों में लगा लिया है? एक तो मैं वैसे ही लेट हो गई हूं, ऊपर से अतुल सर मेरी और डांट लगाएंगे।”
श्रुति भी हंसते हुए मयूरी के पीछे-पीछे कंपनी के अंदर जाने लगती है। यहां पर मयूरी ₹30 के लिए ऑटो वाले के साथ झगड़ा कर रही थी, तो वहीं दूसरी तरफ अपने गोदाम में बैठा हुआ तक्षक अपने सामने नोटों की गड्डी से भरा हुआ बैग तीखी निगाहों से देख रहा था।
उसके सामने दो लड़के खड़े थे और दोनों घबराए हुए थे। एक लड़का कहता है, “बॉस हम सच कह रहे हैं। हमने इसमें से एक पैसा नहीं निकाला है। ये सारा पैसा हम पार्टी को ही देने गए थे, पर उसने कहा है, कि पूरे पैसे नहीं हैं।”
तक्षक कुर्सी पर टिक कर बैठा हुआ था। उसके एक हाथ की कोहनी कुर्सी के हैंडल पर टिकी हुई थी और वह अपने दुसरे हाथ पर अपनी गन को गोल-गोल घूमाते हुए उन दोनों लड़कों को देख रहा था। जब उस लड़के ने अपनी बात खत्म की, तो तक्षक की निगाहें दूसरे लड़के के ऊपर जाती हैं, जिसके चेहरे पर पसीना टपकने लगा था।
तक्षक घूरते हुए उस लड़के को देखता है और कहता है, “क्या तुम्हें कुछ कहना है?”
वह लड़का अपने दोनों हाथ जोड़ कर घुटनों के बल बैठ जाता है और गिड़गिड़ाते हुए कहता है, “बॉस मुझे माफ कर दीजिए। मुझसे गलती हो गई। मैंने इस बैग में से ₹2000 निकाले थे। मेरी बहन की स्कूल की फीस भरनी थी। उसे बहुत जरूरत थी। मुझे लगा जब तक कि पैसे जाएंगे, तब तक मैं पैसों का अरेंजमेंट कर दूंगा। लेकिन मैं नहीं कर पाया। पर मुझे लगा इसमें इतने सारे पैसे हैं। ₹2000 किसी को क्या ही पता चलेंगे? लेकिन मैं गलत था। बॉस प्लीज मुझे माफ कर दीजिए। मुझसे गलती हो गई है।”
वह लड़का जो खड़ा था, उसके चेहरे पर घबराहट आ जाती है। क्योंकि उसे पता था तक्षक को धंधे में बेईमानी पसंद नहीं है। तक्षक के पीछे खड़े बॉडीगार्ड भी घबरा जाते हैं। क्योंकि अब इस लड़के का मरना तय था। तक्षक अपनी जगह पर खड़ा होता है और चलता हुआ उस लड़के के पास आता है। वह उस लड़के के बालों को पकड़ता है और उसे खींच कर खड़ा करता है।
उस लड़के के मुंह से एक चीख निकल जाती है। तक्षक उसकी आंखों में उसे देख कर कहता है, “मांग लिया होता तो भीख समझ कर तुझे दे सकता था। तूने जो किया है, उसे चोरी कहते हैं। तेरी चोरी की वजह से सामने वाली पार्टी ने मुझे गलत ठहराया है। तुझे पता है इसका मतलब क्या है?”
लड़का डरते हुए तक्षक की आंखों में देख रहा था। तो तक्षक ने अपनी तीखी निगाहों से उसे देखते हुए कहा, “इसका मतलब ये है, कि उस पार्टी को लगेगा मैं धंधे में बेईमानी की है। जान बूझकर इतने बड़ी रकम में ₹2000 कम भेजे हैं। बात ₹2000 की नहीं है, बात तक्षक राणे के ईमान की है। सौदे में घाटा मंजूर है मुझे, पर फायदे में किसी का झूठ नहीं खाता हूं।
मेरे यहां से एक सौदे के रूप में पैसे गए थे, लेकिन वह पैसे पार्टी तक नहीं पहुंचे बल्कि वापस आ गए हैं। इसका मतलब ये है, कि कागज के इन चंद टुकड़ों ने मेरी कीमत बताई है।”
वह लड़का अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए गिड़गिड़ाता है और तक्षक से कहता है, “बॉस माफ कर दीजिए, मुझसे गलती हो गई। आप मुझे कुछ भी सजा देंगे, मुझे मंजूर होगा। बस मुझे जान से मत मारना। मेरी छोटी बहन… उसका इस दुनिया में मेरे अलावा और कोई नहीं है। मैं पढ़ा लिखा नहीं हूं, इसीलिए मुझे कोई ढंग का काम नहीं मिल रहा था। इसलिए मैं आपके पास काम करने आ गया। पर मैं चाहता हूं, मैं अपनी बहन को खूब पढ़ाऊं। उसे डॉक्टर बनाऊं। मैं आपके सामने हाथ जोड़ता हूं। बॉस मुझे जान से मत मारना।”
तक्षक ने उस लड़के के बालों को जोर से दूर धकेल दिया। वह लड़का दीवार से जा कर लगता है। उसके सर पर चोट लग जाती है, पर वह खुद को संभाल लेता है। तक्षक गुस्से में उसे पैसों से भरे बॉक्स के पास आता है और उसे घूर कर देखते हुए कहता है, “दुनिया की कोई भी दौलत तक्षक राणा की कीमत नहीं लगा सकती है।”
और ये कहते हुए तक्षक अपनी जेब से लाइटर निकालता है और अगले ही पल उस पैसों से भरे ब्रीफकेस को आग लगा देता है। लाखों रुपए धुएं की तरह तक्षक के सामने जल कर राख हो रहे थे।
एक तरफ थी मयूरी जो ₹30 के लिए ऑटो वाले के साथ झगड़ा कर रही थी और दूसरी तरफ था तक्षक राणा जिसके लिए लाखों रुपए भी कोई मायने नहीं रख रहे थे।
मयूरी जल्दी से अपना आई कार्ड गले में टांगते हुए अपने डिपार्टमेंट में पहुंचती है। पर जैसे ही वह ऑफिस के अंदर इंटर होती है, उसका टीम लीडर अतुल दरवाजे पर ही मयूरी पर भड़कते हुए कहता है, “वहीं पर रुक जाओ मयूरी देशमुख। तुम पूरे 10 मिनट लेट हो।”
मयूरी जल्दी से अतुल की तरफ देखती है और कहती है, “सॉरी सर वह मंदिर से आते वक्त देर हो गई थी। आगे से नहीं होगी। प्लीज इस बार माफ कर दीजिए।”
अतुल गुस्से में मयूरी के पास आता है और कहता है, “आगे से गलती होने का सवाल ही पैदा नहीं होता है, मिस देशमुख। क्योंकि हो सकता है आगे का मौका आपको मिले ही ना। आज आपका इस ऑफिस में आखिरी दिन हो।”
अतुल के ऐसा कहने पर मयूरी के चेहरे पर मासूमियत आ जाती है और वह जल्दी से कहती है, “अतुल सर प्लीज ऐसा मत कीजिए। मेरे लिए ये नौकरी बहुत जरूरी है।”
अतुल ने एटीट्यूड के साथ अपने दोनों हाथ बांधे और मयूरी से कहता है, “अगर तुम्हारे लिए नौकरी इतनी जरूरी है, तो फिर तुम ढंग से अपना काम क्यों नहीं करती हो? पूरा एक महीना हो गया है तुम्हें सिस्टम पर बैठे हुए, पर एक महीने में तुमने एक भी क्रेडिट कार्ड सेल नहीं किया है। तुम्हें पता है ना? ये सेल्स डिपार्टमेंट है। एक तुम हो जो सारा दिन सिस्टम पर बैठी रहती हो और कोई काम करके नहीं देती हो। दूसरी तरफ बबीता है जिसे एक दिन में चार-चार गोल्ड क्रेडिट कार्ड सेल किए हैं। अगर काम नहीं करना है, तो चली जाओ यहां से। तुम्हारी जगह मैं किसी नई लड़की को काम पर बिठा दूंगा।”
बाहर रिसेप्शन पर बैठी हुई श्रुति मयूरी को देख रही थी। उसे मयूरी के लिए बुरा जरूर लग रहा था, लेकिन वह इस वक्त कुछ नहीं कर सकती थी।
मयूरी उदासी के साथ कहती है, “आई एम सॉरी सर। प्लीज मुझे इस महीने के आखिरी तक वक्त दे दीजिए। मैं वादा करती हूं आपको। कम से कम एक क्रेडिट कार्ड तो मैं आपको बेच कर ही दिखाऊंगी। जिस कंपनी ने मुझे इतना सपोर्ट किया है, उस कंपनी को मैं बिना कुछ दिए यहां से नहीं जा सकती हूं।”
अतुल गुस्से में मयूरी को देखता है और कहता है, “ठीक है। जाओ जाकर अपने सिस्टम पर बैठो और शाम तक मुझे तुमसे कम से काम नहीं तो एक क्रेडिट कार्ड की सेल चाहिए। वरना समझ लेना मैनेजमेंट से बात करके मैं तुम्हें आज ही कंपनी से बाहर निकाल दूंगा।”
मयूरी की आंखों में आंसू आ गए और उसने जल्दी से हां में सर हिलाया। वह धीरे से अपने सिस्टम पर जाती है और वहां बैठ जाती है। उसने अपना कंप्यूटर ऑन किया और आज का काम शुरू करने के लिए उसने सारा सिस्टम अपनी जगह पर सेट किया। तभी मयूरी के साथ बैठी हुई एक दूसरी सेल्स गर्ल थोड़ी उम्र में बड़ी थी, वह मयूरी से कहती है, “क्या बात है मयूरी? कोई प्रॉब्लम हो रही है क्या? पूरे महीने तुमने एक भी सेल नहीं किया है। ऐसे में कैसे काम चलेगा?”
मयूरी की आंखों से आंसू आ जाते हैं और वह रोते हुए उसको कहने लगी, “किरण दीदी मुझे खुद भी बहुत बुरा लगता है, जब शाम को सब लोग कहते हैं, कि आज उनकी 10 सेल हुई है, दो सेल हुई हैं या पांच सेल हुई हैं और मेरा नंबर जीरो पर आता है। पर मैं क्या करूं? मुझे जो भी नंबर मिलते हैं, उन्हे पूरे डिपार्टमेंट से 10 10 बार कॉल जा चुकी होती है। ऐसे में कोई भी मेरी बात सुनने को तैयार ही नहीं होता है। आप ही बताइए एक इंसान के पास अगर 10 बार कॉल जाएगी, तो वह आपकी कॉल पर कैसे बात करेगा?”