तलाश - ए - इश्क Ch. 3

तलाश - ए - इश्क - Chapter 3

Posted by Divya yadav • Oct 05, 2025 06:04 PM

"इसकी लाश को ठिकाने लगाओ जल्दी और यहाँ जितने भी माल डिलीवरी के लिए बाकी हैं उन्हें गोडाउन में रखवा दो।" अहीर ने अपने सामने पड़े आदमी की लाश को घूरते हुए कहा जो कुछ देर पहले उसे उसके माल के बारे में खबर करने आया था।

वहाँ मौजूद किसी के मुँह से आवाज़ नहीं निकली। दो आदमी सामने आए और वहाँ पड़ी लाश को खींच कर ले गए।

अहीर ने किसी को कॉल किया और बोला। "रघु को पुलिस ने पकड़ लिया है। जल्द से जल्द उसे बाहर निकालो।"

"जी बॉस।" सामने से आवाज़ आई तो अहीर ने कॉल एंड कर दिया। तभी एक आदमी भागते हुए आया और अहीर के सामने आते हुए बोला। "बॉस! ज़ोग्राज़ मारा गया।"

अहीर ने उस आदमी को जाने का इशारा कर दिया तो वो हल्के से सिर झुका कर वहाँ से चला गया।

"पता करो ये किसने किया?" अहीर ने वहाँ मौजूद टेबल पर रखे सिगरेट के पैकेट से एक सिगरेट निकालते हुए कहा और सिगरेट अपने होंठो पर दबा दिया।

सिगरेट जलाने के बाद अहीर ने वहाँ मौजूद आदमियों को वहाँ से भेज़ दिया और खुद सोफे पर सिर पीछे टिका कर बैठ गया।

सिगरेट के कस लेते हुए अहीर अपनी पिछली यादों में चला गया।

फ़्लैश बैक,

एक शानदार से बंगले के हॉल में बैठा अहीर अपने लैपटॉप पर काम कर रहा था। जब मिहिर तेज़ी से उसके सामने आ कर खड़ा हो गया। इस वक़्त अहीर के चेहरे पर कोई निशान नहीं था और वो दिखने में बहुत स्मार्ट लग रहा था। स्मार्ट तो दिखने में मिहिर भी था। पर उसका फेस बिल्कुल बच्चो की तरह था और क्यूट भी।

"भाई! चलो ना भाई प्लीज़! मुझे वो गाड़ी बहुत पसंद है मुझे वही गाड़ी चाहिए।" मिहिर ने अहीर से ज़िद करते हुए कहा।

"तुम रघु के साथ चले जाओ मिहिर।" अहीर ने प्यार से कहा।

"अगर आप मेरे साथ नहीं गए! तो मैं अब आपकी कोई बात नहीं मानूंगा और अपने मन की करूँगा।" मिहिर ने नौटंकी करते हुए कहा। तो अहीर ने उसे घूरते हुए कहा। "तुम अब भी अपने मन की ही करते हो।"

"भाई!" कह कर मिहिर पैर पटकते हुए वहाँ से जैसे ही जाने को हुआ अहीर ने उसे रोक लिया। "जल्दी आ तैयार हो कर मैं बाहर गाड़ी में वेट कर रहा हुँ।"

अहीर की बात सुनकर मिहिर खुश हो गया और तेज़ी से अपने कमरे में चला गया। उसे ऐसे देखकर अहीर मुस्कुरा दिया।

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कुछ देर बाद एक कार शो रूम के सामने अहीर की गाड़ी आ कर रुकी और उस गाड़ी की पिछली सीट से अहीर और मिहिर बाहर निकले।

मिहिर ने अहीर का हाथ पकड़ा और उसे खींच कर शो रूम के अंदर ले गया और रघु गाड़ी पार्क करने चला गया।

एक कार के पास आ कर मिहिर रुक गया। गोल्डन कलर की वो कार देखने में बेहद खूबसूरत और अट्रैक्टिव थी। उसी वक़्त एक लड़की की आवाज़ दोनों भाइयों के कानों में पड़ी।

"मे आई हेल्प यु?"

आवाज़ सुनकर दोनों भाई ने पलट कर देखा।

"हमें ये गाड़ी चाहिए।" मिहिर ने फौरन कहा। पर अहीर तो जैसे उस लड़की में ही खो गया था, इसलिये उसने कुछ नहीं कहा।

गोरा रंग, सुंदर गोल चेहरा और प्यारी सी आँखें जो घनी पलकों के नीचे ढकी हुई थी। हाई पोनी के साथ बालो की हल्की लटें जो उसके गालो को चूम रही थी। खूबसूरत से हल्के कलर के सिम्पल से सूट में वो बहुत प्यारी लग रही थी।

मिहिर की बात सुनकर उस लड़की ने मुस्कुराते हुए सिर हिला दिया। उसके मुस्कुराते ही उसके गाल पर पड़ते डिम्पल की वजह से उसके गाल में मौजूद तिल भी थोड़ा छुप गया। उसी पल अहिर के दिल की धड़कने एकदम से बढ़ गई।

"प्रिया! तुझे बॉस ने बुलाया है, तुझे छुट्टी मिल गई है।" एक लड़के ने प्रिया के पास आ कर कहा तो उसकी आँखों में चमक आ गई।

"तुम कस्टमर हैंडल कर लो मुझे जाना होगा।" कह कर प्रिया बिना उस लड़के की बात सुने वहाँ से भाग गई। अहीर तो बस उसे देखता ही रह गया।

फ़्लैश बैक खत्म,

अहीर अपनी यादों से बाहर आते हुए खुद से ही बोला। "उस दिन तुम्हें देखकर तो कोई भी पागल हो जाता।" कहकर अहीर मुस्कुरा दिया।

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निक वापस अपने रूम में आ गया पर उसने अनीष से कोई बात नहीं कि और ना ही उसने उसे बुलाया। जबकि अनीष तो निक को ढूँढने में ही बिजी था।

निक ने अपना फोन लैपटॉप से कनेक्ट किया और फुटेज चेक़ करने लगा।

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प्रिया को जब दोबारा होश आया तो वो अब दूसरे जगह पर थी और आस पास कोई नहीं था। ये देखकर प्रिया ने एक गहरी साँस ली। प्रिया इस वक़्त एक अनजान से फ्लैट में थी।

आस पास नज़रें घुमा कर प्रिया कुछ ढूंढने लगी। पर उसे ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो वो ढूंढना चाहती थी। तो वो मायूसी से फिर बैठ गई। पर उसकी नज़रें अभी भी इधर उधर घूम रही थी।

अगले ही पल प्रिया की नज़र उसके पास के ही टेबल में मौजूद छोटे से लैम्प पर पड़ी। उसे देखते ही प्रिया की आँखों में एक अलग सी चमक आ गई।

प्रिया ने एक गहरी साँस ली और अपने हाथ की तरफ देखा जो आपस में जुड़े बंधे हुए थे। वो एक चेयर पर बैठी थी। पर वो चेयर से बंधी नहीं थी। उसके पैर और हाथ ही आपस में जुड़े बंधे थे। प्रिया ने अपना हाथ बढ़ाया और उस लैंप को पकड़ने की कोशिश करने लगी। कुछ पल कोशिशों के बाद लैंप टेबल से गिर कर टूट गया। प्रिया ने कस के अपनी आँखें बंद कर ली। उसे डर था। कि कहीं कोई आवाज़ सुनकर अंदर ना आ जाये। पर कोई नहीं आया। ये देखकर प्रिया ने एक गहरी साँस ली और झुक कर उसने फर्श पर बिखरे हुए काँच का एक टुकड़ा उठा लिया।

प्रिया ने ब मुश्किल काँच को सहिं से पकड़ा और अपने हाथ में बंधी रस्सी काटने लगी।

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अहीर अपने फोन में प्रिया की हरकतें देख कर बस मुस्कुराए जा रहा था। उसके हाथ में अभी भी जलती हुई सिगरेट थी। उसने सिगरेट वहिं फेंक दी और अपने जूते से उसे मसलते हुए उसने अपना फोन बन्द कर के पॉकेट में डाल लिया। फर्श पर वैसे ही ना जाने कितने ही सिगरेट के टुकड़े बिखरे पड़े थे। उन सब को कुचलते हुए अहीर उस रूम से बाहर निकल गया।

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प्रिया अपने हाथ की रस्सियां काटने में बिजी थी। पर तभी उसके कानों में दरवाज़े की आवाज़ पड़ी और उसके हाथ से काँच छूट कर गिर गया।

To be continue:-

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