बंधन -एक समझौता - Chapter 3
आगे ...........
अहिल ने जैसे ही आहट से आंखें खोली तो बंधन उसके बिल्कुल करीब खड़ी थी और उसकी आंखें फटी की फटी रह गयी और धड़कने बिल्कुल रुक सी गयी लेकिन इन सबसे अनजान बंधन .....चाय का कप रखते हुए - मां का रुम कौन-सा हैं ?
उसकी बात सुनकर, अहिल ने उसकी तरफ सवालिया निगाहों से देखा तो , बंधन हिचकिचाते हुए - वो चाय .....इतना कहकर उसने , अपने हाथ में पकड़े ट्रे की तरफ इशारा किया, जिसमें एक कप चाय रखी थी ।
अहिल , उसका सवाल समझते हुए एक तरफ इशारा करते हुए - वो हैं , जिसपर बंधन तो उस तरफ चली गयी लेकिन अहिल खुद से ही - बड़ी ही अजीब हैं आज ससुराल में पहला दिन हैं और काम तो इस तरह कर रही हैं जैसे पता नहीं कितने सालों से रह रही हैं ? आई नो दैट कि यह सब बस दिखावा हैं । मैं भी देखता हूं कि कितने दिन तक इस तरह दिखावा करेंगी।
इधर बंधन ने हाथ में ट्रे पकड़े दरवाजा खटखटाया तो अंदर से बस एक आवाज आयी - आ जाओ !
हमेशा की तरह सुबह की चाय , काव्या जी के लिए सुमन ही लेकर आती थीं तो उनको लगा कि वहीं होगी लेकिन जैसे ही दरवाजा खुला और काव्य जी की नजर सामने गेट पर खड़ी बंधन पर पड़ी तो उनके मुंह से हैरानी से निकला - तुम ....!!
बंधन हिचकिचाते हुए अंदर जाकर - वो आपके लिए चाय लाये थे ...!!
जिसपर काव्या जी अपने सिर को पकड़े - हमें लगा कि शादी की थकावट की वजह से तुम आराम कर रही होगी लेकिन तुमने चाय क्यों बनायी ...तुम्हारी तो पहली रसोई भी अभी तक नहीं हुई....!!
लेकिन बंधन का ध्यान दो काव्य जी की बातों पर नहीं उनके हाथों पर था जो उनके सर को पकड़े बैठे थे ।
बंधन बीच में ही - आपके सिर में दर्द हैं .....!! काव्य जी हैरानी से - मतलब......!! जिस पर बंधन गर्दन ना में हिलाते हुए - जी ....वो आप सिर पकड़े बैठी हैं ना तो बस लगा कि सिर में दर्द होगा ....वैसे आप टेंशन मत लिजिए , हमने चूल्हा पूजन की रस्म भी कर ली और कान्हा जी के लिए भोग भी बना दिया हैं बस भोग लगाना बाकी हैं .......!!
काव्या जी बस हैरानी से बंधन को ही देख रही थी जो बस यह बताने में बीजी थी कि उसने क्या क्या कर लिया हैं ?
वो एकदम से - चुप ......!! उनके इतना कहते ही बंधन चुप हो गयी । उसके चेहरे पर एक अलग ही डर सा छा गया और
वह हल्का सा कांपने लगी थी ।
काव्या जी को उसके शरीर में कंपन सा महसूस हुआ तो वह शांति से - तुम अब बिल्कुल चुप रहोगी और इतना सबकुछ अकेले क्यों किया । फिर ट्रे की तरफ देखते हुए - एक कप चाय ... तुमने चाय पी ली ....!!
जिस पर बंधन गर्दन ना में हिलाते हुए - नहीं तो ....!! वो इतना सारा काम ....!!
वो आगे कुछ बोलती तब तक काव्या जी - हम्म ....काम तो बहुत सारा हैं लेकिन खुद के लिए भी वक्त निकाल लेना चाहिए । जाकर अपने लिए चाय लेकर आओ तब तक मैं, तुम्हारा इंतजार कर रही हूं । अबसे हम दोनों साथ में ही चाय पियेंगे।
बंधन हिचकिचाते हुए - कल से पक्का , आपके साथ ही चाय पियेंगे मां लेकिन अभी के लिए जाये वो .......!!
लेकिन काव्या जी का मन तो एक शब्द में ही अटक गया था - मां ....बंधन के मुंह से यह शब्द , उनको बहुत प्यारा लग रहा था ।
काव्या जी गर्दन हां में हिलाते हुए - ठीक हैं ...!!
बंधन बाहर की तरफ जाते हुए - जी मां , आप जल्दी से तैयार होकर आओ तब तक मैं....!!
तब तक बंधन बाहर जा चुकी थी और उसकी आवाज इतनी धीमी थी कि काव्या जी को आगे का कुछ सुनाई नहीं दिया और उनकी बंद होती आंखों से एक बूंद आंसू टपक कर नीचे गिर गया । कुछ तो काव्या जी के दिल में , वो खुद से - मैं , तुम्हें कभी भी दुःखी नहीं होने दूंगी बंधन, तुम मेरे और मेरे परिवार के लिए एक अनमोल हिरा हो ।
इधर बंधन जैसे ही किचन में आयी तो वहां अहिल खड़ा था कमर पर हाथ रखे .....बंधन जिसने अपने घर में मर्दों को किचन के अंदर पैर रखते हुए भी नहीं देखा था वो घबरा गयी और घबराहट भरी आवाज में - जी आप किचन में क्या कर रहे हैं ? कुछ चाहिए आपको .... मैं लेकर आती हूं ।
लेकिन अहिल एकदम से चीढ़ गया , वो झूंझलाते हुए - क्यों? मैं किचन में नहीं आ सकता क्या और इसमें , ऐसा कौन-सा पहाड़ टूट गया जो तुम .....!! उसके सवाल पर बंधन बोलती कि बाहर से डोरबैल की आवाज आयी .... अहिल का ध्यान उस तरह चला गया और वो खुद भी डोर खोलने के किचन से बाहर चला गया । बंधन के शब्द , उसके मुंह में ही रह गये जो वो बोलने वाली थी - क्योंकि अपने पापा या फिर भाई को मैंने किचन में कदम रखते नहीं देखा ।
अहिल ने जैसे ही गेट खोला तो वहां सुमन आंटी खड़ी थी परेशानी से - अहिल बाबा सारी , वो क्या हैं ना बगल वाली शांता से झगड़ा हो गया तो मैं आने में लेट हो गयी पर अभी फटाफट काम निपटाती हैं ।
अहिल भी अंदर आते हुए - हम्म ! बट आगे से ध्यान रखिएगा।
इतना कहकर वह अंदर आते हुए - आप नाश्ते की तैयारी किजिए। इतना कहकर वह लैपटॉप उठाये उपर अपने रुम में चला गया ।
इधर सुमन खी खी करते हुए - अब तो बीवी आ गयी ना बाबा तो बस उसके पल्लू से बंधे रहेंगे। वैसे आपकी मेहरारू अभी भी कमरे में आराम फरमा रही हैं क्या ? वो क्या हैं ना आजकल की लड़कियां बड़ी छुईमुई होती हैं ।
सुमन आंटी की आदत थी मजाक करने की और अहिल का चिढ़ा हुआ चेहरा उन्हें सुकून सा देता था और इसके पीछे भी एक राज था लेकिन अहिल को यह बात दिल पर लग गयी और बंधन जो यह देखने के लिए किचन के गेट पर आयी थी कि बाहर कौन आया हैं ... उसकी आंखों में यह सुनकर आंसू आ गये । ऐसा होना भी शायद लाजमी थी । बंधन जो सुबह से बस घर के कामों में लगी थी और जब सुमन आंटी के मुंह से यह सुना तो उसकी दिल टुकड़ों में बंट गया .... आखिर वो हर बात को दिल से लगा लेती थी ।
सुमन आंटी की बात सुनकर अहिल गुस्से से - मैंने, आपको मेरे रुम के अंदर क्या हो रहा हैं इस पर राय देने के लिए नहीं कहां ...? मेरी वाइफ आराम फरमा रही होती अगर आप अपने झगड़े पर ध्यान देने के बजाय टाइम पर आने पर ध्यान देती ...!! आप बड़ी हैं तो इज्जत से बात करता हूं वरना अपनी वाइफ के बारे में एक ग़लत बात बर्दाश्त नहीं करुंगा मैं ...चाहे आपने वह मजाक में ही क्यों ना कहीं हो ?
सुमन आंटी का तो मुंह बन गया क्योंकि पहली बार उन्हें, इस तरह का जवाब मिला था और बंधन उसके चेहरे पर एक हल्का सी मुस्कुराहट आ गयी ... किसी को पहली बार अपना साथ देते देख ...!!
जारी हैं ..............