A CONNECTION OF THE HEART - Chapter 2
दिल्ली में एक कमरे में ईशा सो रही थी। आरती कपूर उसे जगाती हैं और बताती हैं कि लड़के वाले आने वाले हैं। ईशा शादी नहीं करना चाहती, लेकिन आरती जी ज़ोर देती हैं। आरती जी ईशा को गौरव सिन्हा से शादी करने के लिए कहती हैं, जो एक टैक्सी ड्राइवर है। ईशा दुखी होती है, पर चाची की बात मान जाती है। आरती जी अपने पति से बात करती हैं और फिर लड़के वालों के लिए तैयारी करने लगती हैं। ईशा भी तैयार होती है।
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ईशा अपने ही ख्यालो मे खोई हुई थी l तभी वहा प्रिया आती है l प्रिया ईशा की बचपन की सहेली थी l प्रिया और ईशा दोनों बहने की तरह थी l
प्रिया कमरे का दरवाजा खोलकर अंदर आती है l वह ईशा के पास जाती है l ईशा को ख्यालो मे खोया देख प्रिया के दिमाग मे कोई शरारत आने लगती है l
प्रिया कमरे में इधर उधर देखती हैं l वह कूछ ढूंढने लगती है l तभी अचानक से उसके हाथ एक पालीथीन बेग आती है l वह तिरछा मुस्कराती है और उस पालीथीन बेग को अपने मुह से लगाकर फुलाकर ईशा के पास जाती है l दूसरे हाथ से वह अपने बालों मे से पिन निकाल कर उस पालीथीन बेग को ईशा के कान के पास जाकर पिन से उस बेग को फोड़ देती है l
ईशा अचानक से हुई इस आवाज से डर जाती है l वह आह जैसी आवाज कर जैसे ही पिछे मुड़ती है सामने प्रिया को देखकर और जोर से चिल्लाती है l
ईशा ने कहा " आह l भ .... भ .... भ ... भू .... त ... l "
ईशा पिछे मुड़ती इससे पहले प्रिया ने अपने बालों को आगे कर अपने चहरे को ढक दिया था l और उसने अपने हाथों को भी एसी पोजीशन में रखा हुआ था कि जैसे वह कोई भूत हो l
ईशा डर कर भागने को हुई कि प्रिया ने उसका हाथ पकड़ लिया था l तभी किसी मैग्नेट के टच होने की आवाज आती हैं l
ईशा प्रिया के बाल खिंचते हुए कहती हैं l
ईशा ने कहा " अच्छा तो तुम मुजे डरा हो l रुको अभी बताती हूं l "
इतना कहकर ईशा प्रिया के बालों को छोड़ देती हैं l
प्रिया ने कहा " उफ्फ l यह कड़ा हर बार तुम्हारे पास आने पर बजता हैं l "
ईशा ने कहा " ह्म्म l सही है l वर्ना तेरा बस चले तो मुजे हार्ट अटेक ही दे दे l "
प्रिया ने कहा " अरे ! अभी तो तुझे मेरे बेटे की सास बनना है l एसे कैसे मे तुमको हार्ट अटेक दे दु l "
ईशा ने कहा " अच्छा बेटा जी पहले आप करो शादी l इसके बाद मुजे कहना l "
प्रिया ने कहा " तेरी तो हो ही रही है l जलदी से मेरे लिए भी ढूढ़ लेना l "
शादी की बात सुनकर ईशा के चहरे पर उदासी आ जाती है l
प्रिया ने कहा " क्या हुआ l तुम एसे उदास क्यों लग रही हो l "
ईशा आज सुबह की सारी बातें प्रिया को बता देती है l
प्रिया कुछ कहती इससे पहले ही वहा आरती जी आ जाती है l
आरती जी ने कहा " ईशा चलो l मेरे साथ l लड़के वाले आ गए हैं और प्रिया तुम यहाँ क्या कर रही हो l तुम्हें तुम्हारी मम्मा बुला रही है l फिर से घर के काम किए बिना आ गई l चलो अब जाओ जल्दी l "
प्रिया अपनी आंखे बड़ी करती है और अपने सिर पर अपना हाथ मारते हुए कहती हैं l
प्रिया ने कहा" मे अभी जाकर आती हूं l "
इतना कहकर प्रिया वहा से चली जाती हैं l आरती जी ईशा को अपने साथ नीचे ले जाती है l
ईशा का दिल जोरों से धड़क रहा था l नीचे एक 60 साल की उम्र की औरत बैठी हुई थीं l उसने हरे रंग की सारी पहनी हुई थी l जिसमे ब्राउन रंग की बॉर्डर बनी हुई थी l बड़ी सी गोल बिंदी लगाई हुई थी I उसके चहरे पर कठोरता झलक रही थीं l
ईशा वहा जाकर उसके पेर छुते हुए कहती हैं l
ईशा ने कहा " नमस्ते l "
वह औरत ईशा को सामने बैठने का इशारा करती हैं l ईशा डरते डरते वहा बैठ जाती हैं l
उस औरत का नाम कालिंदी सिन्हा था l
कालिंदी जी ने ईशा से पूछा " तुम्हारा नाम क्या है l "
ईशा ने जवाब दिया " जी ईशा l "
कालिंदी जी ने कहा " हम गौरव की दादी है l घर का सारा काम कर लेती हो l "
ईशा ने कहा " जी "
कालिंदी जी ने कहा " हमारा बेटा नहीं आएगा l आज उसे कोई काम है l "
उसके बाद वहा कुछ पल के लिए सन्नाटा छा जाता है l
उसके बाद कालिंदी जी , आरती जी की और देखते हुए कहती हैं l
कालिंदी जी ने कहा " बिटिया को हम आज ही ले जा रहे हैं l वहा वह गौरव से मिल ले और उसके बाद हम अच्छा सा मुहूर्त देखकर उन दोनों शादी करवा देगे l "
कालिंदी जी की बात सुनकर ईशा के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक जाती है l
आरती जी ने कहा " जी हाँ l ईशा तुम चलो मे तुम्हारी मदद कर देती हूं l "
ईशा आरती जी के साथ कमरे मे चली जाती हैं l
कमरे में आकर ईशा कहती हैं l
ईशा ने कहा " चाची मे कहीं नहीं जा रही l "
आरती जी गुस्से में कहती हैं l
आरती जी ने कहा " मे तुम्हें पूछ नहीं रही l बता रही हूं l एक बात मेरी सुनो मेने तुम्हारी परवरिश की है l तुम्हें इतने सालों तक सम्भाला l अब तुम्हारी बारी l मे कर्ज मे डूब गई थी तब मेने कर्जा लिया था l और उस कर्जे को चुकाना अब मेरे बस मे नही है l कालिंदी जी ने उस कर्जे को माफ़ कर दिया है l लेकिन उसके बदले उन्होंने गौरव के लिए तुम्हें चुना है l अगर तुमने सच मे कभी भी मुजे माँ माना है तो उनके साथ चली जाओ और अपनी मनहूस शक़्ल कभी भी मुजे मत दिखाना l "
इतना कहकर आरती जी वहा से चली जाती हैं l आरती जी के शब्द ईशा के दिल में तीर की तरह चुभ रहे थे l
अब आगे क्या होगा ईशा का फेसला? क्या ईशा जाएगी कालिंदी जी के साथ l