Bedardi se Ishq - Chapter 3
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अवनी बालकनी का दरवाजा खोलकर बाहर निकल आई , उसने सामने देखते हुए अपनी आंखें बंद की , फिर अपने शरीर को ढीला छोड़ते हुए हाथों को पूरी तरह से फैला कर खड़ी हो गई , और लंबी सांस लेने लगी। ये तरीका उसने अपनी मां से सीखा था , जब कभी भी तुम्हें घुटन महसूस हो , खुद को अकेला महसूस करो , तो अकेले में अपनी आंखें बंद कर अपने हाथों को फैला कर खड़ी हो जाना , फिर शांति से खुद को महसूस करना , तुम्हारा अकेलापन पल भर में दूर हो जाएगा ... तुम्हें ऐसा लगेगा जैसे कोई है जो तुम्हें गले लगा कर खड़ा है , कोई है जो तुम्हें थामे हुए खड़ा है , क्योंकि उस वक्त बेसक तुम्हारे पास कोई मौजूद न हो , लेकिन उस वक्त तुम अकेली होकर भी अकेली नहीं होओगी , उस वक्त तुम खुद से मिलोगी , अपने वजूद से मिलोगी।
और सच में अब ऐसा करने से अवनी को बहुत अच्छा महसूस होता था , जब कभी भी उसे घुटन महसूस होती थी अकेलापन महसूस होता था, वो ऐसा ही करती थी पिछले कुछ सालों से जैसी उसकी जिंदगी थी , तब से उसने इस तरीके को न जाने कितनी बार अपनाया था .. जिससे उसे सुकून और राहत दोनों मिलते थे!
अब आगे -
अभी अवनी अपने कमरे की बालकनी में आंखें बंद करके खड़ी हुई थी। कुछ देर वो ऐसे ही खड़ी रही , फिर उसके बाद आंखों में उमड़ती नींद को महसूस कर वो अंदर अपने कमरे में आ गई , उसने बालकनी का दरवाजा बंद किया और अपने बिस्तर की ओर जाने लगी , कि तभी एक झटके के साथ उसके कमरे का दरवाजा खुल गया , जिस पर अवनी ने चौक कर दरवाजे की तरफ देखा ... जहां पर ध्रुव खड़ा हुआ था जो इस वक्त बेहद गुस्से में लग रहा था उसके हाथों की मुठ्ठिया बंधी हुई थी! लेकिन अवनी का ध्यान उसके गुस्से से भरे चहरे पर नहीं था , उसका पूरा ध्यान तो इस वक्त ध्रुव पर था ... वो हैरानी से ध्रुव को देख रही थी , शादी के 1 साल बाद ये पहली बार था , जब ध्रुव उसके कमरे के दरवाजे पर खड़ा था ... वरना ध्रुव उसके कमरे में आना तो दूर उसकी तरफ देखने की भी जहमत नहीं उठाता था , इस फ्लैट में एक साथ रहने के बावजूद भी दोनों की मुलाकात महीनों तक नहीं हो पाती थी , आज से पहले अवनी ने उसे दो महीने पहले देखा था ... जब वो दिल्ली अपनी एक मीटिंग के लिए जा रहा था !
अभी वो कुछ कहती कि उससे पहले ही ध्रुव तेज कदमों से उसके सामने आकर खड़ा हो गया। उसने एक जोरदार तमाशा अवनी के गाल पर जड़ दिया, जिससे अवनी का सर घूम गया , उसका चेहरा एक तरफ को झुक गया.. ध्रुव ने उसे बहुत जोर से थप्पड़ मारा था , उसकी पांच उंगलियों के निशान उसके गाल पर छप गए थे .. अवनी ने अपने गाल पर हाथ रखे हैरानी से अपना चेहरा घूमाकर वापस से ध्रुव की तरफ देखा , की तभी वापस से ध्रुव ने उसे एक और थप्पड़ मार दिया ... जिससे अवनी पीछे की तरफ लड़खड़ा गई , पर उसने खिड़की के पास रखी चेयर को पड़कर खुद को गिरने से बचा लिया ... दर्द से उसकी आंखें डबडबा गई आंसू बहकर उसके गालों पर आ गए... वो अपने गाल पर हाथ रख ध्रुव को देखने लगी , फिर रुंधी आवाज में उससे बोली!" मैंने किया क्या है जो आप इस तरह से मेरे साथ बिहेव कर रहे हैं?"
उसकी बात पर ध्रुव ने गुस्से में उसे एक तेज धक्का देते हुए कहा!" क्या कहा तुमने , तुमने क्या किया है .. क्या तुम्हें सच में नहीं पता तुमने क्या किया है?
उसके धक्का देने से अवनी खिड़की से जा कर टकरा गई जिससे उसकी कोहनी में चोट आ गई , दर्द की वजह से उसने अपने दूसरे हाथ से कोहनी को पकड़ लिया और उसे सहलाते हुए ध्रुव की तरफ देखकर बोली!" मेरा यकीन कीजिए , मुझे सच में नहीं पता आप किस बारे में बात कर रहे हैं !
तो ध्रुव उसकी तरफ बढ़ते हुए !" तो तुम्हें नहीं पता तुमने क्या किया है , ठीक है मैं ही तुम्हें बता देता हूं ... इतना कहकर बेड के पास जाकर बल्ब का स्विच ऑन कर दिया! जिससे अवनी की नजर उस पर पड़ी तो वो उसे हैरानी से देखने लगी , ध्रुव की पूरी बॉडी पर उसके चेहरे पर बड़े-बड़े लाल रैशेज उभरे हुए थे , जैसे उसे किसी चीज से एलर्जी हुई हो।
वो हैरानी से ध्रुव को देखते हुए बोली!" ये आपके चेहरे को क्या हुआ ,?
तो ध्रुव गुस्से भरी हंसी हंसते हुए उससे बोला!" कितना अच्छा नाटक करती हो तुम भोली बनने का ... पर अफसोस मेरे सामने तुम्हारा ये नाटक बिल्कुल नहीं चलेगा...
फिर उसके पास आकर गुस्से में दांत भिंचते हुए उससे बोला !" अब बोलो क्यों किया तुमने ये सब , क्या मिला तुम्हें ये करके (उसके कंधों को कसकर पकड़ते हुए) तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे ड्रग्स देने की , ऊपर से अब इतनी भोली बन रही हो जैसे तुमने कुछ किया ही नहीं ... (उस पर चिल्लाते हुए) बोलो क्यों किया , तुम्हारी वजह से आज मेरे हाथ से मेरी डील चली गई ... इतना कह कर उसे ज़ोर से जमीन की तरफ धक्का दे दिया , जिससे अवनी फर्श पर गिर गई!
उसके इस तरह रिएक्ट करने से अवनी घबराने लगी , ध्रुव आज बहुत गुस्से में लग रहा था और जिस तरह की वो हरकतें कर रहा था , उससे इतना साफ चल रहा था कि आज वो अवनी को किसी भी हालत में जिंदा नहीं छोड़ेगा .. यही सब सोचते हुए अवनी घबराने लगी ... वो किसी तरह खुद को संभाल कर खड़ी हुई , और पलट कर ध्रुव की तरफ देखते हुए डरते हुए उससे बोली!" मैंने , मैंने आपको कोई ड्रग्स नहीं दी , मुझे तो पता भी नहीं आप किस बारे में बात कर रहे हैं , प्लीज मेरा यकीन कीजिए मैंनें कुछ नहीं किया।
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कहानी आगे जारी रहेगी दोस्तों रेटिंग और कमेंट देना ना भूले।