Ruby (Story Of Revenge) - Chapter 1
दिसंबर आखिर की दोपहर, स्कूलों और कॉलेजों में आज से छुट्टियाँ शुरू थीं और बच्चे इसी छुट्टी के चलते खुशी-खुशी अपने घरों को जा रहे थे। बाज़ार भरे हुए थे। यहाँ पर फूलों की दुकानें सजी हुई थीं और वहीं पर कार्ड भी दिखाई दे रहे थे। साल बीतने और नए साल के आने की खुशी अलग ही थी चारों तरफ।
सर्दी की दोपहर भी दोपहर ना लग रही थी। धूप तो थी पर उसका आनंद भी अलग था, जिसके चलते लोग भी घरों में ना थे। वो भी अपनी रोजमर्रा की जरूरी चीजें खरीद रहे थे। कुछ औरतें ग्रुप में थीं तो कुछ अपने में ही थीं।
वहीं इस ठंडी सी दोपहर में दो लड़कियाँ, जो दिखने में चौबीस की ही लग रही थीं, वो दोनों सामने के स्कूल की बिल्डिंग के गेट से बाहर निकलीं जो के अपनी ही बातें कर रही थीं। उनके पीछे बच्चे भी आ रहे थे। उस गेट पर बड़े-बड़े अक्षरों में विस्डम स्कूल लिखा था। और वो दोनों बातें करती हुई सड़क के दूसरी तरफ दुकान पर चली गईं।
"यार छुट्टियाँ पड़ ही गईं आखिर", पहली लड़की ने मुस्कुरा कर कहा। तो दूसरी लड़की भी मुस्कुरा दी और दोनों दुकान के अंदर जाने लगीं कि तभी दूसरी लड़की का ध्यान एक तरफ बने स्टैंड पर रखे नए साल के कार्ड पर चला गया, जिनको देख वो मुस्कुरा दी और उन कार्ड को देखने लगी। वही पहली लड़की अंदर चली गई। पर दूसरी लड़की जो कार्ड देख रही थी वो मुस्कुरा रही थी और स्टैंड से कार्ड उठा-उठा कर एक के बाद एक कार्ड देख रही थी जिन पर बीते साल और आने वाले साल लिखे थे, कि तभी उसका ध्यान एक कार्ड पर गया जिस पर प्यारा सा दिल बना था और नए साल की कुछ लाइनें भी लिखी हुई थीं, जिसे देख उस लड़की के चेहरे पर स्माइल आ गई।
जिससे उसकी वो छोटी-छोटी आँखों में एक प्यार की लहर सी उठी ।इन गुलाबी होंठों पर थिरक रही मुस्कान तो जैसे कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी और चेहरे पर आई लाली जिस से गोरे गाल गुलाबी हो चुके थे।
वो मंद-मंद मुस्कुराती उस कार्ड की लाइनों को होंठों ही होंठों में पढ़ रही थी। जिसकी वजह से उसके चेहरे की मासूमियत भी साफ-साफ दिख रही थी। साड़ी पहने खड़ी ये लड़की बहुत ही प्यारी लग रही थी।
के तभी उस बिजी सड़क पर एकदम से शोर मच गया और भागम-भाग हो गई, कुछ रोने की आवाज तो कुछ धूल उड़ता हुआ दिखा, जिसे देख उस लड़की के हाथ से कार्ड गिर गये और वो उस तरफ देखने लगी। दुकानदार और अंदर जितने भी लोग थे वो भी बाहर आकर देखने लगे आखिर यहां पर हो क्या गया। तभी धुएँ का गुब्बार हटा और सामने दो बच्चे लहूलुहान दिखे, वहीं सड़क के दूसरी तरफ एक बाइक गिरी पड़ी थी और एक आदमी वहां पर गिरा हुआ था, जिसके सिर से खून बह रहा था और कुछ दूरी पर एक गाड़ी खड़ी थी जिसके टायर्स के निशान उस सड़क पर घिसने की वजह से छप चुके थे। कुछ पल के लिए जो शांति छाई थी वो अब एकदम से शोर में बदल गई थी।
पर कोई भी उन घायल पड़े बच्चों और आदमी के पास नही गया। तभी वो लड़की जो कार्ड देख रही थी वो भागते हुए आगे आई जिसके साथ उसकी सहेली भी थी।
"हेल्प करो कोई तो मदद करो", उसने कहा और उस बच्चे को उठाने लगी, जिसे देख कर आस पास के लोग जल्दी से आगे बड़े और उन तीनो को उठा पास के ही एक नर्सिंग होम में ले गये।
वही वो कार जो कुछ समय के लिए रूकी थी वो आगे बढ़ गई और वो लोग बिना किसी की नजर में आये निकल गये।
"डॉक्टर आप अच्छे से चैक करें ना ये बच्चा सांस ले रहा है", उस टीचर ने कहा तो वही डॉक्टर उसे देखने लगे।
"देखे बाइक का टकराव सीधे गाड़ी से हुआ है जिसकी वजह से एक बच्चा जो उछल कर गाड़ी के पहिये के नीचे आ गया था उसने उसी समय दम तोड़ दिया और दूसरे बच्चे की हालत भी खस्ता है और शायद जो इनके साथ है वो फिलहाल खतरे से बाहर है", डॉक्टर ने कहा और साथ ही उस बच्चे के चेहरे पर सफेद कपड़ा डाल दिया और वो लड़की बस देखती ही रह गई।
उसने जल्दी से उस बच्चे के चेहरे से कपड़ा हटाया और उसके चेहरे को थपथपाने लगी, "गोलू उठो गोलू जल्दी उठो देखे तुम्हारी मेम तुमको बुला रही है, इस बार हम अच्छे से सब काम कर लेंगे", उस लड़की ने कहा।
पर वो बच्चा कुछ नही बोला तभी उस लड़की के कंधे पर दूसरी लड़की ने हाथ रखा जिस से वो लड़की पीछे देखने लगी।
"देख ना गोलू बोल ही नही रहा क्लास में तो चुप नही करता और अब बोल नही रहा तू बोल ना इसे के कुछ तो बोल", उसने कहा।
"रूबी बस", उस लड़की ने कहा और उसे गले से लगा लिया वहीं नर्स उनको देखती ही रह गई।
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दिल्ली दिलों की धड़कन कहा जाने वाला शहर, जिसका नाम अब देश ही नही विदेशों में भी धूम मचा रहा है। उसी दिल्ली के एक नामी कॉलेज, दिल्ली कॉलेज (मेरी कहानी के लिए काल्पनिक), अपनी रैंकिंग और कल्चरल एक्टिविटी के लिए जाना जाता है। वहीं इस कॉलेज में अच्छे घरों के बच्चे ही पढ़ने आते है। आम परिवार के बच्चे भी आते है जिनके पास स्कॉलरशिप हो या यहां की पढ़ाई अफोर्ड कर सकते हो, क्यूंकि यहां पर बच्चो का फ्यूचर एक दम सिक्योर रहता है। इस कॉलेज में आने का मतलब है के आप एक अच्छी जॉब लेकर ही बाहर जायेंगे।
उसी कॉलेज के गेट पर खड़ी लड़की जो कि आम सी ही थी दिखने में, जो जीन्स टॉप में थी, बालों को बांध रखा था, कंधे पर बैग टंगा हुआ, पैरों में बूट और आंखो पर चश्मा लगाये उस कॉलेज को देख रही थी। चेहरे पर इस समय दूनिया जहान की घबराहट थी उसके और वो बस एकटक उस कॉलेज को ही देख रही थी के तभी पीछे से आ रहे बच्चो के ग्रुप में से किसी ने उस लड़की की कलाई पकड़ कर उसे एक तरफ करा और आगे बढ़ गया। वही वो लड़की अभी अभी जो हुआ उसे देखती ही रह गई और वो ग्रुप आगे बढ़ गया।
रब राखा।