Billionaires accidental wife Ch. 3

Billionaire's accidental wife - Chapter 3

Posted by Jahnavi Sharma • May 23, 2025 11:04 PM

आयुष्का इंटरव्यू देने के लिए ड्रीमलैंड कलेक्शन के ऑफिस में आई हुई थी। उसे इस इंटरव्यू से काफी उम्मीदें थीं, क्योंकि यह उसकी आखिरी उम्मीद थी। वह वहाँ पर वेटिंग रूम में बैठी, अपनी बारी आने का इंतज़ार कर रही थी, कि तभी आयु के पास मंथन का कॉल आया। वेटिंग रूम में बहुत शोर हो रहा था, तो आयु बात करने के लिए बाहर आ गई।

आयुष्का ने इधर-उधर देखते हुए, धीमी आवाज़ में कहा, "बोलो मंथन... क्यों डिस्टर्ब किया? तुम जानते हो ना, मुझे इस तरह काम के वक़्त कॉल पर रहना अच्छा नहीं लगता है।"

"हाँ जानता हूँ, पर मुझे तुम्हारी फ़िक्र हो रही थी। कहीं तुम नर्वस तो नहीं हो रही?" मंथन ने काफ़ी प्यार से पूछा।

आयुष्का काफ़ी देर से वहाँ पर बैठकर अपनी बारी आने का इंतज़ार कर रही थी। इस वजह से वह थोड़ा इरिटेट हो गई थी। ऊपर से मंथन का कॉल आने की वजह से उसे और भी गुस्सा आ रहा था।

आयु ने चिढ़ते हुए जवाब में कहा, "आर यू मेड, मंथन? यह कौन सा मेरा पहला इंटरव्यू है, जो मैं नर्वस होऊँगी। बट यहाँ पर तो बहुत भीड़ लगी है यार... होप सो मेरी डिज़ाइन्स इन्हें पसंद आ जाएँ।" आयु ने तुरंत ही अपने गुस्से को शांत कर लिया था।

मंथन ने उसे समझाते हुए कहा, "डोंट वरी, आयु... इस बार तुम्हारी जॉब पक्की। अगर ना भी हो, तो स्ट्रेस मत लेना। और टाइम मिले, तो एक बार डिज़ायर्स में भी ट्राई कर लेना।"

आयु, जिसका गुस्सा शांत हो गया था, मंथन के मुँह से "डिज़ायर्स" का नाम सुनकर फिर से भड़क उठी। वह गुस्से में तेज आवाज़ में बोली, "प्लीज़ मंथन... मेरी ऐसी कोई डिज़ायर नहीं है कि मैं डिज़ायर्स में आऊँ... बाय।" आयुष्का ने गुस्से में कॉल कट करके मोबाइल ही ऑफ कर दिया था।

आयुष्का मंथन से बात करके वापस जा ही रही थी, कि उसने देखा कि उस कंपनी का मैनेजर किसी से फ़ोन पर बात कर रहा था। आयुष्का वहाँ खड़े होकर उसकी बातें सुनने लगी।

मैनेजर ने कॉल पर हँसते हुए कहा, "अरे मिस्टर आहलूवालिया, आप बिल्कुल फ़िक्र मत कीजिए... यह नौकरी तो आपकी भतीजी वंशिका की ही है। बोल दीजिएगा भाई साहब को, और इंटरव्यू तो हम ऐसे ही रख लेते हैं, नाम के लिए। अब इमेज भी तो बनाकर रखनी पड़ती है ना। और वैसे भी, यह इंटरव्यू के लिए जो कैंडिडेट्स आते हैं ना, इनके पास कई बार ऐसी डिज़ाइन्स मिल जाती हैं, जो बहुत यूनिक होती हैं।"

उसकी बातें सुनकर आयु की आँखें हैरानी से बड़ी हो गईं। वह गुस्से में बड़बड़ा कर बोली, "साले... चोर! मन तो कर रहा था इसका सिर फोड़ दूँ। बट काम डाउन, आयु... सस्ते में तो जाने नहीं दूँगी मैं इसे। मैं भी देखती हूँ, अगली बार ये ऐसे इंटरव्यू कैसे रखता है।"

आयु गुस्से में वेटिंग रूम में गई और वहाँ पर जाकर जोर से चिल्लाने लगी।

आयु ने तेज आवाज़ में चिल्लाते हुए कहा, "वंशिका... वंशिका..."

तभी दो लड़कियाँ खड़ी हो गईं, जिनका नाम वंशिका था।

आयु ने कन्फ़्यूज़न से उनकी तरफ़ देखा और कहा, "अरे वह जो आहलूवालिया की कोई रिश्तेदार लगती है... वह वाली वंशिका।"

तभी एक लड़की बैठ गई। दूसरी लड़की, जिसका नाम वंशिका आहलूवालिया था, वह खड़ी आयु को अजीब नज़रों से घूर रही थी।

वंशिका ने उसे इगोइस्टिक लुक दी और बाल झटकते हुए पूछा, "बोलो क्या काम है? मैं ही वंशिका आहलूवालिया हूँ।"

आयु ने उसे देखकर तिरछी मुस्कुराहट दी और कहा, "हाँ जी मैडम, पार्टी कब दे रही हैं आप... पहले यह बताइए।"

"और वह किस खुशी में?" वंशिका ने आगे पूछा।

आयु ने बाकी कैंडिडेट्स के चेहरों की तरफ़ देखा, जो काफ़ी मेहनत करके वहाँ पहुँचे थे। उसे गुस्सा तो बहुत आ रहा था, फिर भी उसने अपने गुस्से को काबू करके, जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा, "जॉब मिल गई आपको इस कंपनी में... पार्टी तो बनती है। चलो भाई लोग, आज की पार्टी वंशिका आहलूवालिया की तरफ़ से। अरे जॉब मिली है यहाँ पर।"

तभी एक लड़के ने कहा, "तो हम क्या यहाँ पर झक मारने आए हैं? इसका तो अभी इंटरव्यू भी नहीं हुआ।"

आयु ने सिर हिलाकर कहा, "लग तो मुझे भी ऐसा ही कुछ रहा है कि झक मारने ही आए हैं।"

वही वंशिका सकपका गई थी। उसे वहाँ जान-पहचान के दम पर नौकरी मिलने वाली थी, यह बात सबसे छुपाकर रखी जानी वाली थी। ऊपर से आयु ने तो यहाँ आकर खुले आम ऐलान कर दिया था।

दूसरे लड़के ने कहा, "जब इसे जॉब मिल रहा है, तो यहाँ पर हम लोग क्यों अपना टाइम वेस्ट कर रहे हैं। कंपनी वालों को जरूरत ही नहीं है... वह कोई बेवकूफ़ तो बैठे नहीं, जो यहाँ पर इंटरव्यू रखेंगे।" उसे आयु की बात पर यकीन नहीं हुआ।

आयु ने गुस्से में सख़्ती से कहा, "बेवकूफ़ नहीं, चोर हैं। अभी मैनेजर किसी से बात कर रहा था कि इन लोगों की डिज़ाइन चुराकर हम अपनी कंपनी को एक नए मुक़ाम पर लेकर जाएँगे।"

जैसे ही सच सामने आया, सब भड़क गए थे। एक लड़की ने खड़े होकर कहा, "अरे ऐसे कैसे चुराएँगे... मुँह तोड़ दूँगी मैं इनका।"

आयु यही चाहती थी कि वह सब लोग उनकी सच्चाई जानें। उसका काम हो गया था। आयु ने उसकी तरफ़ देखकर हाँ में सिर हिलाया और तेज आवाज़ में कहा, "चलो गाईज़, धावा बोलते हैं।"

वे सभी लोग मिलकर कंपनी में तोड़फोड़ करने लगे और मैनेजर को पीटने लगे। आयु चुपके से वहाँ से निकलकर वापिस घर जाने लगी।

आयु ने अंदर तो अच्छा-खासा तमाशा कर दिया था, पर बाहर आते ही उसके चेहरे पर मायूसी के भाव थे।

आयु ने उतरे हुए चेहरे से, धीमी आवाज़ में कहा, "आज फिर टाइम वेस्ट हो गया। अगर इन्हें सीधा ही कोई कैंडिडेट रखना होता है, तो फिर हम लोगों का क्यों टाइम वेस्ट करना। चोर कहीं के। एक काम करती हूँ, साक्षी दी के पास कोर्ट चली जाती हूँ। आयु, तेरी किस्मत में जॉब नहीं, धक्के हैं।"

आयु अपनी स्कूटी लेकर कोर्ट पहुँची, जहाँ पर उसे बाहर ही साक्षी मिल गई। आयु साक्षी को देखते ही उसकी तरफ़ बढ़ी।

आयु ने हवा में अपना हाथ हिलाते हुए, तेज आवाज़ में कहा, "साक्षी दी... इधर देखिए।"

वही आयुष्का को वहाँ पर देखकर साक्षी थोड़ा हैरान हुई। वह इंटरव्यू के लिए जाने वाली थी, यह बात साक्षी से छुपी हुई नहीं थी। साक्षी आयु के पास पहुँची और हैरानी जताते हुए पूछा, "तुम इस वक़्त यहाँ क्या कर रही हो? तुम्हारा तो आज इंटरव्यू होने वाला था?"

आयु कुछ भी बताकर साक्षी का मूड ऑफ़ नहीं करना चाहती थी। उसने बात को टालते हुए कहा, "मेरा छोड़िए दी... आप ठीक तो हैं ना। उस रितेश ने ज़्यादा ड्रामा तो नहीं किया ना।"

साक्षी ने अपने होंठ दबाए और जवाब में कहा, "उसे टियारा की कस्टडी चाहिए।"

आयु ने गुस्से में तेज साँस लेते हुए कहा, "अरे ऐसे कैसे कस्टडी दे दें... टिया तो उसे जानती भी नहीं है ठीक से।" आयु को वैसे भी काफ़ी छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता था। यहाँ तो आज सुबह से ही उसका दिन खराब चल रहा था। ऊपर से रितेश की शर्त सुनकर उसका गुस्सा और भी बढ़ गया था।

साक्षी ने उसका कंधा सहलाकर कहा, "हाँ, वह तो हम देख लेंगे। तुम्हें फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है। घर चलते हैं, और मुझे रास्ते में बताना, इंटरव्यू का क्या हुआ?"

आयु ने साक्षी को सब बताते हुए कहा, "बस नाम ही मत लो दी उनका। चोर कहीं के... जब पहले से ही किसी बंदे को हायर कर रखा था, तो मेरा टाइम वेस्ट करने की क्या ज़रूरत थी।"

साक्षी ने उसे एडवाइस देते हुए कहा, "तू डिज़ायर्स में क्यों नहीं ट्राई करती।"

सब जानते थे कि चंडीगढ़ की टॉप कंपनी थी डिज़ायर्स। ऐसे में आयु जैसे यंग टैलेंट को वहाँ पर सपोर्ट भी किया जाता था, लेकिन आयु ने आज तक वहाँ पर कभी इंटरव्यू नहीं दिया था। ऊपर से आरव की साक्षी के साथ जान-पहचान होने की वजह से उसके लिए वहाँ मिलना भी आसान था, फिर भी आयु अपनी ज़िद पर अड़ी हुई थी।

फिर से साक्षी के मुँह से "डिज़ायर्स" का नाम सुनकर आयु ने मुँह बनाकर कहा, "मुझे वह कैसानोवा आरव खुराना बिल्कुल भी नहीं पसंद है। और मैं किसी का एटीट्यूड नहीं झेलने वाली।"

साक्षी ने मुस्कुराकर कहा, "हे, मेरा बेस्ट फ़्रेंड है आरव... ऐसे तो मत बोलो यार। एक बार उसके बिहेवियर को साइड में रखकर, तुम प्रोफ़ेशनल होकर नहीं सोच सकती क्या? मेरे कहने पर ट्राई करके तो देखो।"

आयु ने गहरी साँस ली और कहा, "देखती हूँ कल कोई वैकेंसी होगी तो... बट आप उसे नहीं बताएँगी कि हम एक-दूसरे को जानते हैं। अगर उसे मेरी डिज़ाइन्स पसंद आईं, तभी मैं वहाँ जॉब करूँगी।" आख़िर में आयु ने साक्षी की बात मान ही ली, क्योंकि उसके पास भी अब दूसरा ऑप्शन नहीं बचा था।

आयु के हाँ कहते ही साक्षी ने खुश होकर कहा, "इसका मतलब तुम जाओगी।"

आयु ने उसे टालते हुए कहा, "देखेंगे... मैंने हाँ नहीं की है वैसे। चलिए अब चलते हैं। टियारा को स्कूल से भी लेना है और डिनर भी तो बनाना है।"

साक्षी ने हँसकर कहा, "आयु, 5:00 बज रहे हैं। टिया तो कब की आ गई होगी। सीधा-सीधा बोलो ना, तुम्हें आरव के बारे में बात नहीं करनी। वैसे तुम जानती हो कि हम जिस चीज़ से जितना दूर भागते हैं, वह उतनी ही हमारे करीब आती जाती है, जैसे कि तुम आरव खुराना की शक्ल तक नहीं देखना चाहती थीं, और अब देखो कल वहाँ इंटरव्यू के लिए जा रही हो। क्या पता तुम्हारा सिलेक्शन हो जाए, और फिर उम्र भर तुम्हें उसी की शक्ल देखनी पड़े।"

"प्लीज़ दीदी, शुभ-शुभ बोलिए। अगर मैंने वहाँ काम भी किया, तो मैं उसके सामने ना के बराबर आने वाली हूँ। जिस इंसान को मैं 1 मिनट नहीं झेल सकती, उसे आप पूरी उम्र झेलने के लिए कह रही हैं।" आयु ने जवाब दिया। वह तो ऐसे रिएक्ट कर रही थी, जैसे सच में उसे आरव की शक्ल उम्र भर देखनी पड़ेगी।

वही साक्षी ने आगे कुछ नहीं कहा। वह आयु के पीछे स्कूटी पर बैठते हुए, अपने मन में बोली, "ज़िन्दगी में बहुत अजीब चीज़ें होती हैं। मैंने भी कभी नहीं सोचा था कि मैं रितेश के बिना जी भी पाऊँगी, लेकिन आज हम दोनों अलग हो रहे हैं। क्या पता, जिस आरव खुराना की तुम शक्ल भी नहीं देखना चाहती थीं, तुम्हें एक दिन वो अच्छा लगने लगे।"

दूसरी तरफ़, डिज़ायर्स में ऑफ़िस टाइम ख़त्म होने से पहले आरव ने एक बार फिर से मीटिंग बुलाई थी। मीटिंग रूम में बैठे हर एक शख़्स के दिल की धड़कनें बढ़ी हुई थीं, और वह इसी बात की उम्मीद कर रहे थे कि अब आरव अपनी ज़िद छोड़कर, अपनी डेडलाइन का थोड़ा तो टाइम बढ़ा दे। अचानक मीटिंग से उन सबको यही लगा कि अब आरव उन पर दया आ गई होगी, क्योंकि सुबह की मीटिंग के बाद ऑफ़िस में अफ़रा-तफ़री मची हुई थी।

मीटिंग रूम में आते ही आरव ने उन सब की तरफ़ देखा और फिर वह उठकर बोला, "गाइज़, कुछ प्रोग्रेस है? मुझे 2 दिन के बाद हर हाल में कैटलॉग शूट करना है।"

माहिरा ने बीच में बोलते हुए कहा, "इतनी जल्दी कैसे हो पाएगा, आरव?"

आरव ने गहरी साँस ली और उसकी बातों को पूरी तरह इग्नोर कर दिया। फिर आरव ने मंथन की तरफ़ देखकर कहा, "ओके, मंथन... डू वन थिंग, न्यूज़पेपर में वैकेंसी डाल दो।"

मंथन ने उसकी बात पर सिर हिलाया और कहा, "कौन सी जॉब के लिए, सर..."

आरव ने कुछ पल रुककर, तिरछी मुस्कुराहट के साथ कहा, "द डिज़ायर्स को न्यू स्टाफ़ चाहिए।"

जैसे ही आरव ने न्यू स्टाफ़ के लिए वैकेंसी डालने को कहा, उन सब के चेहरों के रंग उड़ गए थे। इससे एक बात साफ़ थी कि आरव अब किसी भी हालत में अपनी ज़िद से पीछे नहीं हटने वाला था।

कियान ने जल्दी से कहा, "बट ए.के....."

कियान की बात पूरी होने से पहले ही आरव ने उसकी बात बीच में काटते हुए कहा, "व्हाट, कियान? मुझे मॉडल चाहिए, एट एनी कॉस्ट... तुम लोग मेरे लिए मॉडल नहीं ढूँढ़ पा रहे हो, तो मुझे तो नया स्टाफ़ ढूँढना ही होगा।"

आरव की बात सुनकर वहाँ पर शांति छा गई थी। कुछ पल की शांति के बाद रियान ने कहा, "ए.के., जब तक तुम अपने प्रोजेक्ट के बारे में कुछ बताओगे नहीं, उस हिसाब से हम कैसे लड़की ढूँढेंगे।"

आरव ने उसे देखकर सारकास्टिकली कहा, "रियान, मुझे मॉडल चाहिए, दुल्हन नहीं, जो अपनी रिक्वायरमेंट्स बताऊँ। और कियान, तुम फ़ोटोग्राफ़र हो या मैं... मुझे एक ऐसी लड़की चाहिए, जिस पर इंडियन वेस्टर्न हर आउटफ़िट सूट करें।"

माहिरा ने फिर से बीच में बोलते हुए कहा, "आरव, मुझ पर भी सभी ड्रेसेस अच्छी लगती हैं।" माहिरा की इच्छा हमेशा से मॉडल बनने की थी, पर आरव ने आज तक उसे चांस नहीं दिया था।

आरव ने तिरछी निगाहों से माहिरा की तरफ़ देखते हुए कहा, "माहिरा, मुझे कैटलॉग शूट के लिए मॉडल चाहिए, गर्लफ़्रेंड नहीं... और अगर एक वर्ड भी आगे बोला है ना, तो मैं तुम्हें तुम्हारी जॉब निकाल दूँगा।" बोलते हुए आरव ने अपनी टाई लूज़ की। वह अपने गुस्से को काबू नहीं कर पा रहा था।

आरव ऐसा तभी करता था, जब उसका गुस्सा उसकी कंट्रोल से बाहर हो जाता था। आँखों ही आँखों में सबने चुप रहने के लिए इशारा किया, तो वही आरव ने कुछ पल रुकने के बाद, तेज आवाज़ में कहा, "मैं पागलों की तरह सब से बोल रहा हूँ... मुझे मॉडल चाहिए। अगर मुझे तुम्हें लेना होता, तो मैं बेवकूफ़ तो हूँ नहीं, जो यहाँ सब को डेडलाइन देकर बैठा हूँ। या ये लोग बेवकूफ़ हैं, जो इतनी मेहनत करके मॉडल ढूँढ़ रहे हैं।"

माहिरा ने तुरंत ही अपनी गलती सुधारते हुए कहा, "सॉरी, बेबी..."

माहिरा की एक-एक बात आरव के गुस्से में इज़ाफ़ा कर रही थी। आरव ने गुस्से में तेज साँस लेते हुए कहा, "आई एम नॉट योर बेबी हियर।"

आरव जिस तरह से गुस्सा हो रहा था, किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह कुछ बोले। सबके मुँह पर ताले लग गए थे, उन्हें इंतज़ार था तो इस बात का कि अब आरव उन पर कौन सा नया बॉम्ब फोड़ने वाला है, क्योंकि उसकी दी डेडलाइन का एक दिन तो बीत चुका था।

इनके बीच मंथन ने हिम्मत करके कहा, "सर, आई थिंक हमें मॉडल मिल गई है।"

"अच्छा, और कौन है वो?" आरव ने झट से पूछा। हालाँकि उसे थोड़ी हैरानी हो रही थी, क्योंकि थोड़ी देर पहले सब यही कह रहे थे कि उन्हें मॉडल नहीं मिल पा रही है, तो वही अचानक से मंथन ने मॉडल मिलने की बात कह दी थी।

आरव की ही तरह बाकी सब अभी मंथन के चेहरे की तरफ़ देख रहे थे कि अचानक 5 मिनट में उसे कौन सी मॉडल मिल गई।

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