लाल जोडे़ का श्राप Ch. 3

लाल जोडे़ का शराप - Chapter 3

Posted by S✨ Sood • May 18, 2025 05:44 PM

लाल रंग की शाप

गाँव के सन्नाटे में घिरी हुई वह पुरानी हवेली एक खौफनाक किस्से के रूप में जानी जाती थी। हवेली की दीवारें बेजान सी, लेकिन रहस्यमय ढंग से खड़ी थीं, मानो वर्षों से किसी के बिना कदमों के दबाव के। गाँव में जब भी हवेली का नाम लिया जाता, तो सबके चेहरे पर एक अजीब सा डर और चिंता का भाव आ जाता। कहानी थी कि वहाँ किसी ने कदम रखा, तो वह कभी लौटकर नहीं आया। हर किसी के मन में इस हवेली के बारे में शंका और डर बैठा हुआ था, लेकिन उस दिन एक अजीब सा मोड़ आया, जिसने सबकी मान्यताओं को चकनाचूर कर दिया।

गाँव की एक मासूम लड़की, नंदिनी, इस गाँव की सख्त परंपराओं से अनजान थी। वह अपनी शादी की तैयारियों में व्यस्त थी, और उसकी माँ, लगातार उसे सलाहें दे रही थी। नंदिनी के चेहरे पर एक आभा थी, जो बताती थी कि वह इस नए अध्याय में पूरी तरह से खुश थी। उसके घर में उत्सव का माहौल था, लेकिन माँ कि आँखों में एक उदासी और चिंता छिपी हुई थी। हर काम बड़े धैर्य और समर्पण से किया जा रहा था, जैसे कि समय एक ठहरी हुई नदी हो। लेकिन माँ की परेशानी उसके मन में कहीं गहरे में छुपी हुई थी।

वह नंदिनी के पास आई, और एक ठहरी हुई आवाज में बोली, "तुम जानती हो ना, हमारी परंपरा?"

नंदिनी, जो शहर में पढ़ाई कर चुकी थी और इस गाँव की कठोर परंपराओं से पूरी तरह से अनजान थी, कुछ देर के लिए चुप हो गई। फिर उसने अपनी माँ से जिद करते हुए कहा, "माँ, मुझे लाल जोड़ा चाहिए। हर दुल्हन लाल रंग में बहुत सुंदर लगती है।"

माँ का चेहरा एकदम बदल गया। उसकी आँखों में एक गहरी चिंता और डर का मिश्रण था, जिसे नंदिनी ने कभी महसूस नहीं किया था। उसकी आवाज़ में कुछ ऐसा था जो नंदिनी को समझ नहीं आया। "नहीं, तुम लाल रंग नहीं पहन सकती। यह सब तुम्हारी भलाई के लिए ही है।"

नंदिनी ने थोड़ा चिढ़ते हुए कहा, "माँ, ये सब तो बकवास है! गाँव वालों को समझ में नहीं आता कि शराप और इस रंग का कोई रिश्ता नहीं है।"

माँ की आँखों में एक हल्का सा डर था, लेकिन उसने अपने आप को संभालते हुए कहा, "बेटा, तुम शहर से पढ़कर आई हो। तुम्हें यह सब विश्वास में नहीं आता, लेकिन यह सच है। देवगढ़ में जो भी दुल्हन लाल रंग पहनती है, वह या तो वो गायब हो जाती है हमेशा हमेशा के लिए | तुम्हें इस पर यकीन नहीं है, तो क्या फर्क पड़ता है? सच तो सच ही रहेगा।"

नंदिनी का दिल ज़रा सा काँप गया, लेकिन वह फिर भी अपनी जिद नहीं छोड़ी। उसकी माँ ने आखिरी बार कहा, "तुम जो चाहो पहन सकती हो, लेकिन ध्यान रखना, देवी माँ की आशीर्वाद से ही तुम्हारी शादी सफल होगी।"

यह सुनकर नंदिनी कुछ पल के लिए चुप हो गई, और उसकी आँखों में सवाल उठने लगे। क्या यह सच है? क्या वह भी अपनी माँ की तरह इस डर और विश्वास से बंधी हुई थी? लेकिन उसके मन में शादी की तैयारियाँ, सजावट और लाल रंग के जोड़े का ख्याल उसे हर वक्त परेशान कर रहा था। वह अपनी माँ की बातों को नजरअंदाज करते हुए, अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए तैयार थी।

तभी, कमरे के एक कोने में खड़ा वह उल्लू, जो इस पूरी बातचीत को चुपचाप सुन रहा था, अचानक चुप हो गया। उसकी आँखों में कुछ रहस्यमय चमक थी। उसने देखा कि नंदिनी के चेहरे पर अजीब सा डर था, लेकिन वह समझ नहीं पा रही थी कि उसकी माँ क्यों घबराई हुई थी। उल्लू, जो कई सालों से हवेली के आसपास था, धीरे-धीरे उड़कर खिड़की की ओर बढ़ा। उसकी आँखों में एक गहरी साजिश छिपी हुई थी, और उसकी दिशा भी किसी अज्ञात रास्ते की ओर थी। एक पल में, जैसे ही सभी की निगाहें दूसरी ओर मुड़ीं, उल्लू खिड़की से बाहर उड़ने लगा।

उसकी दिशा सीधे उस हवेली की ओर थी, जिसके बारे में गाँव में तमाम तरह की कहानियाँ थीं। उल्लू ने हवेली की ओर उड़ने की शुरुआत की, और हवा में जैसे अज्ञात दिशा में उसका सफर तय हुआ। हवेली की ऊँची और संकरी खिड़की से वह अंदर घुस गया, और फिर अंधेरे में उसकी आकृति ग़ायब हो गई। जैसे ही वह अंदर पहुँचा, हवेली की शांति और सन्नाटा उसकी उपस्थिति से और भी गहरा हो गया। हवेली के भीतर छाया, रहस्य और उन घटनाओं का आलंब था, जो वर्षों से अनकही थीं।

नंदिनी, जो अब तक अपनी माँ के आदेशों को नकारने की सोच रही थी, अपनी माँ के साथ बैठकर हल्के से सास ले रही थी। उसे लगा कि वह इस गाँव की पुरानी परंपराओं को छोड़कर अपनी दुनिया में पूरी तरह से घुसी हुई थी, लेकिन अब हवेली की ओर एक अजीब आकर्षण खींचता हुआ महसूस हो रहा था। क्या वह उसी रास्ते पर चलने जा रही थी, जिस रास्ते पर न जाने कितने लोग खतरों से गुजर चुके थे?

उल्लू की उपस्थिति, जो अब हवेली के अंधेरे में छुप चुका था, एक संकेत था कि कुछ अजीब घटित होने वाला था। उसकी आँखों में वह चमक जो पहले कभी नंदिनी ने देखी थी, अब उसकी आँखों में चमकने लगी थी। क्या वह भी किसी शाप से जूझने वाली थी?

वहीं, हवेली के भीतर, एक अदृश्य शक्ति जागृत हो रही थी। उस शक्ति के नीचे, हवेली की दीवारें धीरे-धीरे फड़फड़ाने लगीं, जैसे किसी पुरानी कहानी के अनकहे अध्याय फिर से शुरू हो रहे हों। हवेली की संकरी गलियाँ, जिनमें समय की धारा रुक सी गई थी, अब और भी गहरी हो रही थीं। उल्लू की उपस्थिति, नंदिनी के लाल रंग के जोड़े की जिद, और गाँव की अनकही परंपराएँ—सब कुछ एक बड़ी साजिश की ओर बढ़ रहा था।

क्या नंदिनी अपनी माँ के डर और चेतावनियों को समझ पाएगी? क्या वह लाल रंग में अपना जोड़ा पहनेगी, या फिर हवेली की छाया उसे एक नई दुनिया की ओर खींच लेगी, जहाँ अतीत और भविष्य एक साथ मिलकर डर और रहस्य की गाथा गाएंगे?

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