- Chapter 1
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मायरा ने अपनी आँखें खोलीं।
उसके सामने एक जोड़ी आँखें थीं, जिन्हें देखकर उसकी रूह काँप उठी और उसकी आत्मा तक सिहर गई।
"आह——"
उसकी पीली उंगलियाँ बिस्तर की चादर को कस कर पकड़ चुकी थीं।
फिर से, उसे अपने शरीर के टूटने-फटने जैसी पीड़ा सहनी पड़ रही थी।
क्या यह नर्क है?
मैं तो मर चुकी थी, फिर यहाँ इस शैतान के पास क्यों लौट आई?
उसका दिमाग इस आदमी की जलती हुई गर्मी की वजह से सुन्न हो चुका था और वह खुद-ब-खुद पीछे हटने लगी, "मुझे मत छुओ!"
एक ही झटके में ऐसा लगा जैसे बर्फ ने उसे छू लिया हो। उसके चेहरे पर खून पीने जैसी वहशी मुस्कान छा गई और उसके बर्फ जैसे ठंडे होंठों ने निर्दयता से मायरा के होंठों को काट लिया, जैसे वह उसे पूरा निगल जाना चाहता हो।
मायरा इतनी तकलीफ़ में थी कि कुछ सोच भी नहीं पा रही थी। वह अनजाने में बड़बड़ाई, "क्यों... क्यों मैं... तरुण... क्यों हमेशा मैं ही...?"
"क्योंकि ये सिर्फ तुम्हीं हो सकती हो।"
उसकी गहरी, रूखी आवाज सुनकर ऐसा लगा जैसे मायरा की आत्मा पर जंजीरें पड़ गई हों।
उसने वही जवाब दिया था, जो उसने पिछली ज़िंदगी में भी दिया था, और ये सुनते ही मायरा फिर बेहोश हो गई।
...
जब उसने फिर से आँखें खोलीं, तो रात का अंधेरा अब दिन की रौशनी में बदल चुका था।
हवा में फूलों की खुशबू थी और सूरज की गर्म किरणें कमरे में आ रही थीं, जिससे थोड़ी देर के लिए उसकी बेचैनी कम हो गई।
लेकिन अगले ही पल, मायरा का शरीर फिर से सख्त हो गया।
एक गहरी घबराहट उसके भीतर फैल गई, क्योंकि वो आदमी जाग चुका था।
उसकी कमर के चारों ओर उसकी बाँह कस गई थी। मायरा उसकी बाहों में एक तकिए की तरह फँसी हुई थी।
"अब भी जाने की सोच रही हो?"
उसके कानों के पास वही डरावनी आवाज़ फुसफुसाई।
ज़िंदा रहने की कोशिश में मायरा ने चुपचाप सिर हिला दिया।
उसे नहीं पता था कि उसने यकीन किया या नहीं। वो थोड़ी देर उसे घूरता रहा, फिर धीरे-धीरे नीचे झुककर उसके होंठों, ठुड्डी और गर्दन पर हल्के से किस करने लगा...
उसकी गरम साँसें जब उसकी गर्दन पर पड़ीं, तो उसके पूरे शरीर में खतरे की घंटियाँ बज उठीं।
वो एक हिरण की तरह थी, जिसे शिकारी ने दांतों से दबोच लिया हो। वह हिलने की हिम्मत भी नहीं कर पाई।
लंबे समय बाद, आखिरकार उसने उसे छोड़ा।
अगले ही पल, मायरा की नजरों के सामने एक हैरान कर देने वाला दृश्य आया।
वो बिना कपड़ों के बिस्तर से उठा, और पीछे से आती रौशनी में उसकी पतली कमर और गठीली शरीर साफ दिख रही थी।
लेकिन ये दृश्य कुछ ही पल का था, क्योंकि उसने झटपट बिस्तर के पास पड़े अपने कपड़े उठाए और बड़ी सावधानी से अपनी शर्ट के बटन ऊपर तक बंद कर लिए।
कुछ देर पहले जो आदमी जंगली जानवर की तरह था, अब उसकी चेहरा इतना ठंडा था जैसे उसमें इंसानियत की एक बूंद भी न बची हो।
जब तक दरवाज़े के बंद होने की आवाज़ नहीं आई, मायरा की नसों में फैला तनाव नहीं ढीला पड़ा।
अब जाकर वो अपने हालात के बारे में सोचने लगी।
उसने धीरे-धीरे कमरे की सजावट देखी, फिर सामने लगे शीशे में खुद को देखा।
शीशे में जो लड़की दिख रही थी, उसके होंठों पर इतनी काट-छांट हो चुकी थी कि उनका रंग तक उड़ चुका था। चेहरा आँसुओं और पसीने से ऐसा बिगड़ गया था कि मेकअप की पहचान तक नहीं बची थी। उसके पूरे शरीर पर नीले निशान और लव बाइट्स थे, और एक भयानक, खून से लथपथ टैटू उसकी त्वचा पर बना था।
उसे यकीन नहीं हो रहा था कि सिर्फ 20 साल की उम्र में वो ऐसी दिख रही थी!
उस समय, तरुण से दूरी बनाने के लिए उसने जान-बूझकर खुद को बदसूरत और घिनौना बना लिया था।
अब वो सचमुच... फिर से जन्म ले चुकी थी...
अचानक, डर और बेबसी की एक लहर उसके सीने में उठी और वो घुटने लगी।
क्यों...
मैं सात साल पहले क्यों लौट आई?!
मैं मर जाना पसंद करती, लेकिन इस शैतान के पास लौटना नहीं।
उसे साफ याद था कि यहीं पर तरुण ने पहली बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे, और इसके बाद कई रातों तक उसे लगातार तड़पाया था।
उसने अपना प्यार खोया, अपने परिवार को खो दिया, यहाँ तक कि अपनी इज्ज़त और आज़ादी भी। उसने सब कुछ खो दिया था।
क्या अब वो सब कुछ फिर से सहना होगा?
नहीं! अगर भगवान ने मुझे दोबारा जीने का मौका दिया है, तो अब सब कुछ बदलना होगा!