Obbsesion of billionaire - Chapter 2
झलक रात के 12 बजे के बाद पार्ट टाइम डिलीवरी का भी काम किया करती थी और केवल दो से चार घंटे ही उसे आराम करने के लिए मिल पाए थे। उसी में वह सोया करती थी ।।
फिलहाल झलक ने प्राची से बिना किसी इमोशंस के कहा, "अभी मुझे नहीं पता मेरी ज़िंदगी में कितना ज़्यादा स्ट्रगल लिखा हुआ है, पर मुझे पूरी उम्मीद है एक ना एक दिन मेरी किस्मत ज़रूर चमकेगी।" फिलहाल झलक जल्दी ही प्राची से विदा लेकर अब वापस से अपने घर की ओर रवाना हो चुकी थीं।
वेल, झलक सही-सलामत अपने घर पहुँच चुकी थी। रास्ते में उसे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आई थी।
घर जाकर झलक ने थोड़ी देर रेस्ट किया। फिलहाल तो उसकी माँ वहाँ मौजूद नहीं थी। क्योंकि उसकी माँ अस्पताल में उसके पापा के साथ मौजूद थी।
फिलहाल झलक फ़्रेश होकर एक-दो घंटा आराम करने के बाद उठी।
वेल... तब तक झलक का नशा काफी हद तक कम हो चुका था। उसके बाद झलक सीधा अपनी पार्ट टाइम डिलीवरी की जॉब पर पहुँची थी।
तब उसके मालिक ने उसे कहा था कि अभी एक ऑर्डर मिला है और तुम्हें फटाफट यह ऑर्डर जल्दी पहुँचाना होगा! काफी बड़ा ऑर्डर मिला है किसी के यहाँ पर पार्टी हो रही है! वह खाना कम पड़ गया है।
तो तुम्हें यह खाना जल्दी टाइम पर पहुँचाना होगा! तब झलक ने फटाफट से खाना अपनी स्कूटी पर सवार किया और खाना लेकर लोकेशन सेट करने के बाद वह अपनी डेस्टिनेशन की ओर गुनगुनाते हुए रवाना हो चुकी थी
लेकिन तभी अचानक... रास्ते में जब डिलीवरी गर्ल बनकर झलक उस बड़े ऑर्डर की डिलीवरी देने के लिए जा रही थी, तभी उसने देखा कि एक ब्लैक रंग की कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी।
अब यह देखकर झलक की चीख निकल गई। उसने घबराते हुए देखा कि वह कार जमीन पर उल्टी गिर गई है।
वह कार बुरी तरह से टूट-फूट गई थी। उसकी काँच, खिड़कियाँ सब कुछ टूट गई थीं! इतना ही नहीं उसमें से गैसोलीन की हल्की-हल्की गंध आनी भी शुरू हो गई थी
इसका मतलब साफ़ था कि यह कार किसी भी वक़्त फटने के लिए तैयार थी।
अब झलक जो पूरी तरह से घबरा गई! उसने तुरंत अपनी मोटरसाइकिल वहीं छोड़ दी थी और वह उस कार को ड्राइव करने वाले ड्राइवर को बचाने के लिए दौड़ पड़ी!
और जमीन पर झुककर उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और खून से लथपथ आदमी के चेहरे को थपथपाया!
उस घायल आदमी का चेहरा पूरी तरह से खून से सना हुआ था, जिसकी वजह से वह आदमी कौन था, कौन नहीं और कैसा दिखता था, यह कुछ भी फिलहाल समझ में नहीं आ रहा था।
तब झलक ने उस घायल आदमी के गालों को जोरों से थपथपाते हुए कहा, "कौन हो तुम? अरे उठो... तुम्हारी कार फटने वाली है! बाहर निकलो, प्लीज़!"
"आँखें खोलो, प्लीज़... आँखें खोलो..."
लेकिन उस आदमी की ओर से किसी तरह की कोई आवाज़ उसे सुनाई नहीं दे रही थी।
अब तो झलक ने उस घायल आदमी की जान बचाने के लिए अपना सर उसकी कार की खिड़की वाली साइड से अंदर घुसा दिया था।
फिर उसने उसकी सीट बेल्ट खोली और उसे बाहर जोरों से बाहर की ओर खींचने की कोशिश करने लगी।
लेकिन उस घायल आदमी का पैर अटका हुआ था और धीरे-धीरे जब झलक उसे निकालने की कोशिश कर रही थी...
तब उस घायल आदमी को हल्का सा होश आया और उस आदमी ने बेहोशी की हालत में कमज़ोरी से कहा, "मेरी मदद करो, प्लीज़... बचाओ मुझे..."
लेकिन तभी झलक घबराते हुए बोली, "लेकिन मैं तुम्हें बाहर नहीं निकाल सकती हूँ! तुम बहुत बुरी तरह से कार में फंसे हो!"
क्योंकि उसने कितनी ही कोशिश की थी, लेकिन वह उसका पैर तक नहीं हिला पाई! और अब गाड़ी में गैस की बहुत तेज बदबू आनी शुरू गई!
और अब झलक को लगा कि अगर वह इसी तरह से उसकी जान बचाने की कोशिश करती रही, तो गाड़ी में विस्फोट हो जाएगा और उसकी भी जान चली जाएगी!
उसे अपनी जान की कोई ख़ास परवाह नहीं थी।
लेकिन झलक अपनी जान किसी भी कीमत पर जाने नहीं दे सकती थी क्योंकि उसके ऊपर उसकी बुढ़ी माँ और एक छोटे भाई की ज़िम्मेदारी थी।
लेकिन वह उस घायल आदमी को हिला तक नहीं पा रही थी और ऊपर से गाड़ी में से तेज़ बदबू आ रही थी...
और झलक अपनी जान किसी भी कीमत पर जोखिम में नहीं डाल सकती थी।
इसीलिए उसने उस घायल आदमी की ओर देखकर गिल्टी टोन में कहा, "देखो मुझे माफ़ करना, लेकिन मैं तुम्हें नहीं बचा पाऊँगी।"
"फिलहाल अभी मुझे खाना डिलीवरी करने के लिए जाना है और मैं पहले ही बहुत लेट हो चुकी हूँ! अगर मैंने यह खाना सही समय पर नहीं पहुँचाया, तो पक्का मेरा मालिक मेरे पैसे काट लेगा।"
अब जैसे ही झलक ने किसी मरते हुए घायल इंसान को छोड़कर खाना डिलीवरी करने की बात कही...
वह ज़ख़्मी आदमी, जो कि गाड़ी के अंदर बैठा हुआ था, वह अंदर ही अंदर गुस्से से उबलने लगा था। हालांकि उसकी आधी बेहोशी की हालत थी।
लेकिन वह सोच रहा था कि अगर एक बार मैं ज़िंदा बच जाता हूँ, तो सबसे पहले इस लड़की की अपने हाथों से गला घोंट कर जान ले लूँगा।
मेरी ऐसी सिचुएशन में इस बेवकूफ़ को खाना डिलीवर करने की पड़ी है।
लेकिन इससे वह यह बात तो समझ चुका था कि इस लड़की के लिए पैसे कितने ज़्यादा ज़रूरी हैं। हालांकि झलक उसे बचाना चाहती थी।
अब जैसे ही झलक ने यह कहा, वह घायल आदमी ने अपना गुस्सा दबाते हुए बड़े ही कमज़ोर आवाज़ में बोला, "देखो मुझे बचा लो! अगर आज तुम मुझे बचा लोगी..."
"तो मैं तुम्हें एक करोड़ रुपये दूँगा।"यह सुनकर झलक की आँखें चमक उठी थीं! और तब उसने उस कार पर गौर किया। वह कार वास्तव में एक बड़ी ही महँगी कार थी।
और वह इतना तो समझ चुकी थी कि ज़रूर यह कोई अमीर आदमी है। लेकिन वह घायल आदमी पूरी तरह से खून में लथपथ है।
ऊपर से उसकी टांग फँसी हुई है! तो भला वह उसे कैसे बचाने की कोशिश कर सकती है।
तब उस खून से लथपथ आदमी ने अपनी आँख खोलने की कोशिश की थी और साथ ही साथ वह झलक का चेहरा देखने की भी कोशिश कर रहा था।
लेकिन क्योंकि उसके सर पर, माथे पर हर जगह खून ही खून निकला हुआ था, तो उसकी आँखें धुंधली हो गई थीं।
तब पैसों के बारे में सुनकर झलक ने एक और कोशिश की और वह जैक लेने के लिए दौड़ी! और उसने वह सीट और कंसल के बीच में टिका दिया! तभी उस आदमी को अपनी पूरी शरीर की ताकत लगाकर बाहर जैसे-तैसे उसने खींचा... और जैसे ही वह उस आदमी को सम्हालते हुए कुछ मीटर दूर चली...
एक जोरदार धमाके के साथ कार में विस्फोट हो गया! और वह धमाके से घायल आदमी और झलक जमीन पर एक-दूसरे के ऊपर गिर गए!
वह आदमी अब झलक के ऊपर था। जमीन पर गिरते ही फिर वह आदमी बेहोश हो गया था।
झलक का चेहरा डर से पीला पड़ गया। उसने उसकी छाती थपथपाई क्योंकि वह उस वक़्त उसके बेहद करीब था।
थोड़ी देर राहत की साँस लेने के बाद उसने उस आदमी को अपनी स्कूटी पर खींच लिया और उसे डिलीवरी बॉक्स को ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रस्सी से बाँध दिया।
वह अस्पताल की ओर उसे लेकर जाने लगी।
और जैसे ही अस्पताल में गई, काउंटर पर नर्स ने उससे पूछा, "आपका नाम क्या है?"
तब झलक ने सोचा कि वह उसे अपना नाम बता दे! लेकिन जैसे ही वह अपना नाम बताना चाहती थी...
नर्स ने उसे बीच में टोक दिया और बोली, "तो आप तो मिस आकांक्षा ओबेरॉय हैं ना... The Famous Model!" आकांक्षा झलक की जुड़वा बहन थी।
उन दोनों के चेहरे और कद एक जैसे थे, लेकिन उनकी किस्मत बिल्कुल अलग-अलग थी।
(हालाँकि झलक अपना चेहरा हमेशा छुपाकर रखा करती थी। इतना ही नहीं, अपनी ख़ूबसूरती रंगत पर वह एक साँवली रंग की परत ओढ़े रहा करती थी। और कुछ मेकअप से झाईयाँ बना दिया करती थी ताकि उसकी रियल ख़ूबसूरती किसी को दिखाई ना दे! और साथ ही साथ कोई भी उसे आकांक्षा ना समझे...)
लेकिन उस आदमी को बचाने के चक्कर में उसका अपना लड़कों वाला वह गेटअप भी हट चुका था, जिसकी वजह से उसने चेहरे पर भी कोई मेकअप नहीं किया था।
तो नर्स ने उसे आकांक्षा समझ लिया था।
फ़्लैशबैक—
(क्योंकि उसे उसके जन्म के समय ही उसके असली माँ-बाप ने झलक को एक परिवार को गोद दे दिया था।
वह भी सिर्फ़ और सिर्फ़ एक बेकार की वजह से कि झलक उनके लिए अपशगुनी, मनहूस है।
हालाँकि दोनों बहनें जुड़वाँ हुई थीं, दोनों को ही एक समान प्यार और सम्मान मिलना चाहिए था।
लेकिन झलक के खुद के अपने सगे माँ-बाप ने झलक को बड़ी ही बुरी तरह से ट्रीट किया था। और जब झलक एक मासूम सी, केवल छह दिन की बच्ची थी, ठीक उसी वक़्त उन्होंने उसे एक परिवार को सौंप दिया था।
हालाँकि वह तो झलक की जान लेना चाहते थे।
लेकिन जब एक परिवार ने इस तरह से रात के अंधेरे में झलक को उसके सगे माँ-बाप के द्वारा फेंकते हुए देखा... आगे की स्टोरी के लिए बने रहिए दोस्तों like shere comment jrur करे।