दो ल़डकियों का बाथरूम मे रोमांस - Chapter 2
इंडिया - अल्फा इनफिनिटी इंडस्ट्री -
बहुत बड़ी बिल्डिंग थी जिसके शीशे दूर से ही चमक रहे थे। देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता था कि यह करोड़ों की बिल्डिंग होगी और यह वेदांत कटारिया की तरक्की की मेहनत दर्शाता था। जो देखकर कोई भी कह सकता था कि आखिर वेदांत कटारिया साल भर में इतनी तरक्की कैसे हासिल कर लिया। पर वेदांत के पास अपनी मेहनत का सबूत था; उसने बहुत सारे नए बिज़नेस स्टार्ट किए थे, इंडिया से लेकर विदेश तक, और वह बहुत तेज़ी से तरक्की करने लगा था।
वहीँ टॉप फ्लोर पर वेदांत बड़े से केबिन में एक पैर दूसरे पैर पर रख, बड़े शान से बैठा था। उसके सामने उसके भरोसेमंद लोग बैठे थे। और सबसे खास बात यह थी कि वह वीडियो कॉल पर बात कर रहा था। टेढ़ा मुस्कुराते हुए उसने कहा, "अब कैसी हो अदा..? मैं तुमसे पर्सनली मिलकर बात करना चाहता था, बल्कि तुम्हें थैंक्स भी तो कहना है, और हाँ, सबसे खास बात, तुम्हारा इनाम तुम्हें देना ही पड़ेगा..!"
वेदांत के हाथ में उस वक्त आईपैड था और वह मुस्कुराते हुए बोल रहा था। वीडियो कॉल की दूसरी साइड से उस लड़की ने कहा, "थैंक यू बॉस, वैसे आप आज बहुत हैंडसम दिख रहे हैं..!"
उस लड़की का इतना कहना ही था कि वेदांत के चेहरे का रंग बदल गया। वह बहुत गंभीर दिखाई दे रहा था और वह गुस्से भरे लहजे में बोला, "अपनी औकात भूल रही हो तुम? यह मत भूलो कि मैंने तुम्हें खरीदा है, बहुत बड़ी कीमत लगाई है, तो अपनी हैसियत में रहो, मुझ पर अपना जादू मत चलाना, वरना? पता है ना? तुम्हारे साथ क्या होगा..!"
वेदांत का इतना कहना ही था कि आईपैड में जो लड़की का चेहरा दिखाई दे रहा था, वह तुरंत माफ़ी मांगते हुए बोली, "सॉरी बॉस, आइंदा ऐसा कभी नहीं होगा, आपकी सारी शर्तें सिर आँखों पर..!"
"Good."
वेदांत इतना बोलकर कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया और अपने दोनों हाथों को आपस में जोड़ते हुए बोला, "किसी को भी अपने करीब ज़्यादा दिन नहीं रखना चाहिए, वरना वह अपनी औकात भूल जाता है, वक़्त रहते उसे उसकी औकात दिखा देनी चाहिए और अब तुम्हारी बारी है..!"
इतना बोलकर वह शैतान की तरह हँसने लगा!
न्यू दिल्ली - कोऑपरेट कंपनी
यह दिल्ली की सबसे बड़ी कॉरपोरेट कंपनी थी, जहाँ हज़ारों एम्प्लॉइज़ काम करते थे। यहाँ दिल्ली के ही नहीं, बल्कि ना जाने कहाँ-कहाँ के लोग आकर जॉब करते थे। इस कॉरपोरेट कंपनी में लड़के-लड़कियाँ अनगिनत डे-नाइट शिफ्ट में काम करते थे। जहाँ लड़के-लड़कियाँ हों, वहाँ जाहिर सी बात है कि अफ़ेयर, प्यार, या आसान शब्दों में कहें तो लव बर्ड्स होते ही हैं, भले ही वे मैरिड हों या अनमैरिड!
इस कॉरपोरेट बिल्डिंग का रंग एकदम ब्लैक था। वहीँ थर्ड फ्लोर पर हंसिका नाम की एक लड़की लगभग दो साल से जॉब कर रही थी। हंसिका का शिफ्ट चेंज होता रहता था, पर उसे अपने काम या टाइम से कोई आपत्ति नहीं थी। पर हाँ, वह शिफ्ट तभी चेंज करवाती थी जब उसकी फ़्रेंड आयशा का शिफ्ट चेंज होता था।
क्योंकि हंसिका और आयशा की जोड़ी बहुत बेस्ट थी। उन्हें देखकर बहुत लोगों को जलन भी होती थी, यूँ कहें तो वे दोनों लव बर्ड्स की तरह रहती थीं। कई लोगों को तो उन पर शक भी होता था कि कहीं इन दोनों के बीच में कुछ गड़बड़ तो नहीं है ना? और अक्सर यह सब कुछ लड़के ही सोचा करते थे, पर वे सामने से उन्हें कह नहीं पाते थे। अगर उन्होंने उन्हें कुछ कहा तो यह बहुत बड़ा मुद्दा बन जाता, जिसकी वजह से वे सिर्फ़ अंदाजा लगाया करते थे।
कुछ लड़कियों को भी उन पर शक होता था, बल्कि वे उन दोनों पर नज़र भी रखती थीं, पर कुछ फ़ायदा नहीं क्योंकि उन्हें कोई सबूत नहीं मिलता था। लड़कियों में आपस में गॉसिप भी होती थी कि हंसिका का चाल-चलन एकदम मर्दाना जैसा है, तो वहीँ आयशा भी कोई कम नहीं है। देखा नहीं कैसे टच करती है, मुझे तो बिल्कुल भी उसका छूना, देखना पसंद नहीं है!
आयशा और हंसिका 15 दिन डे शिफ्ट में जॉब कर रही थीं, पर जब नाइट शिफ्ट उनका आता तो दोनों बहुत खुश हो जाती थीं, जैसे उन्हें आजादी मिल जाती। कल से उन्हें नाइट शिफ्ट दे दिया गया था। और वे दोनों अपने-अपने घर से बहुत जल्दी निकलती थीं। वे दोनों साथ में बैठकर काम भी करती थीं और उन दोनों का आपस में छूना, देखना, बोलना, मज़ाक-मस्ती बहुत ही अलग तरीके से होता था।
जो कोई नया इंसान अगर उन दोनों को देख ले तो वह समझने में बहुत कंफ्यूज़ हो जाएगा। उन्हें तो यही लगेगा कि ये दोनों कपल हैं, भले ही दिखने में लड़कियाँ दिखती हैं।
कल से वे दोनों टाइम से पहले जाकर कैंटीन में बैठकर गॉसिप करती रहीं, उसके बाद अपना काम जाकर करती थीं। पर कुछ रातें वे दोनों साथ में ही बाथरूम में जाती थीं और बहुत देर से निकलती थीं।
रात करीब 1:00 बजे वे दोनों साथ में बाथरूम के अंदर घुस गईं। वहीं हंसिका ने आयशा की गर्दन पकड़कर उसे अपने करीब किया और उसके होंठों पर अपने होंठ रखकर पैशनेट किस करने लगी। बल्कि दोनों भूखी शेरनियों की तरह एक-दूसरे को किस कर रही थीं, और दोनों का हाथ दोनों के शरीर पर घूम रहा था। वहीं हंसिका को कंट्रोल नहीं हो रहा था और उसने तुरंत अपना एक हाथ आयशा के पेंट के अंदर डाल दिया। तभी दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई जिससे दोनों एक झटके में एक-दूसरे से अलग हो गईं!
आयशा फटाफट अपने आप को और ड्रेस को ठीक करने लगी। वहीँ हंसिका भी अपने आप को ठीक कर रही थी और दोनों साथ में दरवाज़ा खोला। बाहर एक लड़की खड़ी थी और दोनों को देख उसकी आँखें फैल गईं। मुस्कुराते हुए बोली, "अरे तुम दोनों अंदर क्या कर रही हो..?"
उसका इतना कहना ही था कि हंसिका मुस्कुराते हुए बोली, "अरे! वो आयशा को डर लग रहा था, इसलिए मैं इसके साथ अंदर आ गई..!"
"डर! किस बात का डर..? कौन है यहाँ जिससे तुम्हें डर लग रहा है..?"
हंसिका आयशा का हाथ पकड़ बाहर जाते हुए बोली, "तुम नहीं समझोगी..!"
इतना बोलकर वह चली गई। वहीँ वह लड़की अपने कंधे ऊपर करते हुए बाथरूम के अंदर गई। उसे बहुत अजीब सा फील हो रहा था, पर उसने बगैर किसी रिएक्शन के दरवाज़ा बंद कर दिया।
दोनों लड़कियाँ अपने डेस्क पर आकर बैठ गईं। वहीं थोड़ी देर बाद हंसिका का हाथ आयशा की जांघ पर था। अब दोनों लड़कियाँ थीं इसलिए उन पर कोई ध्यान नहीं देता था।
यहाँ क्या? बहुत से लड़के-लड़कियाँ थे जो मज़ाक-मस्ती करते थे और यह तो कॉरपोरेट कंपनी थी, यहाँ तो यह सब चलना मामूली सी बात थी।
To be continued....