Billionaire's accidental wife - Chapter 1
एक होटल रूम के कमरे में शराब की बोतले चारों तरफ फैली थी। उसी कमरे के फर्श पर नशे में बेसुध एक 28 साल का आदमी हाथ में बोतल पकड़े बैठा था। उसका सिर बेड पर लगा था, और वो आंखों में आंसू लिए सीलिंग को देख रहा था। उसकी खूबसरत आँखें रोने की वजह से बेहद लाल हो रखी थी। कपड़े पूरी तरह बेतरीब हो रहे थे
वो कड़वाहट से हंसा, “कल का दिन दुनिया याद रखेगी.. मैं आरव खुराना, अपनी ही पत्नी की शादी उसके प्यार के साथ करवाने जा रहा हूं। बस उसी की खुशी के लिए... वो खुश है तो फिर मुझे तकलीफ क्यों हो रही है? मेरे प्यार का मजाक बना दिया उसने, फिर उसे किसी ओर का होते देख मुझे दर्द क्यों हो रहा है।” चेहरे पर कड़वाहट भरी मुस्कुराहट लिए उसकी आंखों से आंसू का कतरा बह गया।
इस वक्त उसके दिल से एक ही आवाज निकल रही थी, “काश मैं एक साल पहले उससे मिला ही नहीं होता.. या मुझे उससे प्यार नहीं होता।”
अगर उसे कोई उस हालात में देखता तो उसे सच में अफसोस होता। दुनिया की नजरों में एक केसोनोवा डिजाइनर, जो फैशन इंडस्ट्री का एक चमकता सितारा था, वो एक लड़की के लिए रो रहा था।
“सोचा था अपनी आंखों के सामने तुम्हे किसी और का होते देखूँगा, पर नहीं हो रहा। नहीं हो रहा मुझसे आयु.. शादी मुबारक हो।” आरव लड़खड़ाती आवाज में बोला और अपनी आँखें बंद कर ली।
उसकी आंखों के सामने आयु का खूबसूरत चेहरा आ रहा था। बेहद खूबसूरत और दिखने में मासूम। इसी के साथ उन लम्हों में खो गया, जहां से ये सिलसिला हुआ था
लगभग एक साल पहले..!!
सुबह के 8 बज रहे थे। किचन में एक लगभग 28 साल की लड़की, जिसने जींस पर लंबा कुर्ता डाला हुआ था, हड़बड़ाहट में जल्दी-जल्दी हाथ चला रही थी। अचानक उसका ध्यान घड़ी की ओर गया।
टाइम देखते ही उसने वहीं से चिल्लाते हुए कहा, “मंथन, जल्दी उठ जाओ! ऑफिस जाने में लेट हो जाएँगे। आयुष्का... आयु जल्दी करो बाबा! इतना लेट करोगे, तो कैसे चलेगा?”
उसके आवाज लगाने पर आयुष्का, जिसे उसने आवाज लगाई थी, वह जाग चुकी थी।
उसने वहीं से अधखुली आँखों से आवाज दी,“ओके, साक्षी दीदी। आप हॉस्पिटल जाओ। फ़िक्र मत करो, मैं टियारा को स्कूल छोड़ दूँगी।” आयु ने जवाब दिया।
साक्षी ने तेज आवाज में कहा, “वो तो ठीक है आयु, लेकिन मैं हॉस्पिटल नहीं जाऊँगी। आज मुझे कोर्ट जाना है। शायद तुम भूल गई होगी, आज मेरे और रितेश के डिवोर्स की पहली सुनवाई है।”
साक्षी के मुँह से कोर्ट जाने की बात सुनकर आयुष्का भाग कर साक्षी के पास गई। उसके बाल सोकर उठने से थोड़े बिखरे हुए थे और लंबे होने की वजह से रबर बैंड से निकल चुके थे। उसकी हाइट लगभग 5 फ़ीट 6 इंच के आसपास थी। कमर को छूते हुए हनी ब्राउन स्ट्रेट बाल, गोरा रंग, छोटी लाइट एम्बर आँखें, वह दिखने में बेहद खूबसूरत थी। उसकी उम्र लगभग 24 साल के आसपास थी।
आयुष्का ने उसके पास आकर धीमी आवाज में कहा, “मैं आपके साथ चलूँगी। आप अकेले कैसे हैंडल करेगी?” उसके चेहरे पर उदासी थी। उसे साक्षी के लिए बुरा लग रहा था।
जबकि साक्षी बिल्कुल नॉर्मल थी। उसने हल्का मुस्कुराते हुए कहा, “आयु, जब हमने अकेले रहने का फ़ैसला कर ही लिया है, तो अब अकेलेपन से क्या डरना? तुम एक काम करना, मंथन को उठा देना। पता चला छोटू आज फिर लेट उठा और क्लास लग गई। ऑफिस में थोड़ी सी भी लेट हो जाएँगी तो तुम आरव को तो जानती ही हो ना...”
आरव का नाम सुनकर आयुष्का ने मुँह बनाते हुए कहा, “नहीं दीदी। ना मैं आपके आरव को जानती हूँ और ना ही उसे जानना चाहती हूँ।”
“ओके। मैं जा रही हूँ। तुम देख लेना प्लीज़।” साक्षी ने हल्का हँसकर कहा। जाते वक़्त उसने धीरे से बड़बड़ाया, “ना जाने ये आरव से इतना क्यों चिढ़ती है।”
कहकर साक्षी वहाँ से अपने वकील से मिलने चली गई। वही उनके घर पर एक बार फिर आरव का नाम सुनकर उसका मूड उखड़ गया था।
“मुझे नफरत है उस इंसान से।” आयु ने गुस्से में तेज सांसे लेकर कहा।
वही मंथन उठा, तो उसने देखा आयुष्का कुछ पेपर असेंबल करने में लगी थी। वह उसके पास गया और उसके गले लगते हुए प्यार से बोला, “गुड मॉर्निंग, माय लव! उठ गई तुम।” फिर इधर-उधर देखते हुए पूछा, “साक्षी दीदी गई?” वह उम्र में लगभग 26 साल का था। हाइट लगभग 5 फ़ीट 11 इंच के करीब, और गेरुआ रंग। दिखने में हैंडसम और शक्ल से मासूम।
आयु ने मुस्कुरा कर हाँ भरी और मंथन से दूर हो गई।
मंथन ने बालों में हाथ घुमाकर कहा, “अच्छा हुआ साक्षी दीदी चली गई। चलो मिलकर अच्छा सा रोमांटिक वाला ब्रेकफ़ास्ट तैयार करते हैं।”
आयु ने हल्का हँसते हुए कहा, “अच्छा, अब ब्रेकफ़ास्ट भी रोमांटिक होने लगा। सो, लिसन मेरे ओवर रोमांटिक बॉयफ़्रेंड, तुम्हारे रोमांटिक ब्रेकफ़ास्ट के चक्कर में मेरा आज एक और इंटरव्यू मिस हो जाएगा। और याद है ना, मुझे टियारा को स्कूल भी छोड़ना है।”
मंथन ने उसी के अंदाज़ में मुँह बनाकर कहा, “ओके, मेरी अनरोमांटिक सी गर्लफ़्रेंड। कभी तो मुझे सीरियसली ले लिया करो। और क्यों इधर-उधर धक्के खा रही हो जॉब के लिए? तुम आयुष्का सिंह ओबरॉय हो। तुम्हारे डैड का भी टेक्सटाइल का बिज़नेस है, उसको क्यों नहीं ज्वाइन कर लेती?”
“मुझे अपनी अलग पहचान बनानी है। मैं चाहती हूँ कि मुझे लोग आयुष्का सिंह ओबरॉय के नाम से नहीं, बल्कि फ़ैशन डिज़ाइनर आयुष्का के नाम से जानें। मुझे सब कुछ एक्सपीरियंस करना है। तुम जानते हो ना। हमारी कंपनी में मुझे अपनी काबिलियत के दम पर नहीं, नेपोटिज्म के दम पर जॉब मिलेगा।” आयुष्का ने सीरियस अंदाज़ में कहा।
उसकी बात सुनकर मंथन ने आँखें घुमाईं और कहा, “आयु, बेबी, ये कॉफ़ी वाले शोज़ थोड़ा कम देखा करो। क्या नेपोटिज्म-नेपोटिज्म लगा रखा है। तुम्हारा हक़ है अपने पापा की प्रॉपर्टी पर।”
आयुष्का ने जवाब देते हुए कहा, “हाँ, हक़ भी जमाऊँगी, पर उस दिन, जब मैं काबिल हो जाऊँगी। अरे, खुद की कंपनी खोलेगी ये आयुष्का सिंह ओबरॉय! तो मिस्टर मंथन आहूजा, क्या आप अपनी गर्लफ़्रेंड की कंपनी में पीआर की जॉब करेंगे?” कहकर आयु ने अपना हाथ उसकी ओर बढ़ाया।
मंथन ने हँसते हुए कहा, “तुम्हें तो रुको, मैं बताता हूँ कि मैं तुम्हारी कंपनी में कौन सी जॉब करूँगा...” कहकर वह आयु को गले लगाने के लिए आगे बढ़ा, लेकिन आयु उसे परेशान करने के लिए उससे दूर भागने लगी।
मंथन उसके पीछे आ रहा था। आयु और मंथन एक-दूसरे के पीछे दौड़ रहे थे कि तभी साक्षी की 4 साल की बेटी टियारा वहाँ आई।
टियारा ने मासूम चेहरा बनाकर कहा, “अरे मामू और होने वाली मामी! क्या सुबह-सुबह पकड़म-पकड़ाई खेलने लग गए आप दोनों? चलिए, मुझे लेट हो रहा है स्कूल जाने के लिए। मेरा वहाँ कोई वेट कर रहा है।”
मंथन और आयु ने एक साथ कहा, “अच्छा जी... कौन?”
टियारा ने कहा, “मेरा नया फ्रेंड।”
मंथन ने आगे बढ़कर टियारा को अपनी गोद में उठा लिया। उसने आयु की ओर देखकर मुँह बनाकर कहा, “देखा, एक छोटी सी बच्ची को भी अपने नए फ्रेंड की इतनी चिंता है। जबकि यहाँ मैडम अपने बॉयफ़्रेंड के साथ में रह रही है, फिर भी उसे मेरी फ़ीलिंग्स की कोई परवाह नहीं।”
“हाँ तो मैं तुम्हारे घर पर किरायेदार के तौर पर रहती हूँ, ना कि तुम्हारी गर्लफ़्रेंड के तौर पर। जानते हो ना, यहाँ चंडीगढ़ में अच्छा घर मिलना कितना मुश्किल है। ऊपर से अचानक यहाँ आने पर डैड भी नाराज़ हो गए। वह यही चाहते थे कि मैं उनकी कंपनी ज्वाइन करूँ। ऐसे में तुमने और साक्षी दीदी ने मेरी बहुत हेल्प की है, उसके लिए थैंक यू सो मच।” आयु ने मंथन की आँखों में देखते हुए धीरे से कहा।
“अच्छा, बस करो। तुम कोई गैर थोड़ी ना हो। हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं और सेटल होने के बाद शादी करने वाले हैं। चलो, अब ये थैंक यू गिविंग स्पीच देना बंद करो। रोमांटिक ब्रेकफ़ास्ट ना सही, जो बना है, वही दे दो। ऑफ़िस जाने में देर ना हो जाए, वरना आरव सर गुस्सा करेंगे।” मंथन ने टॉपिक बदलते हुए कहा और फिर बाथरूम में चला गया। वहीं उसके मुँह से आरव का नाम सुनकर फिर से आयु का मुँह बन गया था।
“पता नहीं ये सब उससे इतना डरते क्यों हैं? उस जैसे इंसान का तो खुलकर सामना करना चाहिए। ब्लडी कैरेक्टरलेस कहीं का!” आयु ने हल्के गुस्से में कहा।
कोई नहीं जानता था, आयु आरव से इतनी नफ़रत क्यों करती है। उसने कभी किसी को बताया तक नहीं, पर ये नफरत यू ही, बेवजह नहीं थीं।
आयु सब कुछ भूलकर टियारा को पकड़कर तैयार करने के लिए ले गई और वहीं मंथन के ऑफ़िस जाने की तैयारी करने लगा।
दी डिज़ायर्स का ऑफ़िस!
दी डिज़ायर्स चंडीगढ़ की टॉप टेक्सटाइल्स कंपनी में से है, जिसका ओनर आरव खुराना था। आरव खुराना, जिसके बारे में पूरा चंडीगढ़ जानता था। आरव खुराना को अपने लाइफ़ में सिर्फ़ एक चीज़ से मतलब होता है और वह है सिर्फ़ और सिर्फ़ काम। उसे अपने आस-पास के लोग भी हमेशा काम करते दिखने चाहिए। वह वक़्त का पाबंद और एक वर्कोहोलिक इंसान था। अपनी कंपनी को आगे लाने के लिए आरव किसी भी हद तक जा सकता है।
आज डिज़ायर्स के पूरे ऑफ़िस में हंगामा मचा हुआ था, क्योंकि आरव ने अपना नया ड्रीम कलेक्शन डिज़ाइन किया था, और उसी कलेक्शन के लॉन्च के लिए मीटिंग होने वाली थी।
इसी अफ़रा-तफ़री के बीच एक लड़की चिल्लाते हुए आई, “कम ऑन, गाइज़, डू फ़ास्ट! आरव को एक मिनट की भी देरी बिल्कुल पसंद नहीं है।” वह लगभग 26 साल के आसपास थी। गोरा रंग, गोल्डन ब्राउन कंधे तक के बाल और लगभग 5 फ़ीट 3 इंच हाइट, और दिखने में किसी मॉडल की तरह लगती थी। उसने हाई हील्स पहनी हुई थीं, जिसकी वजह से उसकी हाइट काफी ज़्यादा लग रही थी।
मंथन ने उसकी ओर देखा और इरिटेट होकर कहा, “ओह, प्लीज़, माहिरा, यहाँ सब अपने काम में लगे हैं, यहाँ कोई भी बेकार नहीं है।”
माहिरा ने उसके बाद को अनसुना किया और आगे पूछा, “हेड डिज़ाइनर रियान और उसकी सेक्रेटरी दिशा कहाँ हैं?”
“मैं कोई सबका सेक्रेटरी नहीं हूँ, पीआर मैनेजर हूँ और तुमसे सीनियर भी। समझी तुम? जाकर खुद पता कर लो।” मंथन ने फ़ाइल उठाकर कहा।
माहिरा ने अपने बाल झटके और पूरे एटीट्यूड में जवाब दिया, “सो व्हाट? मैं यहाँ सबसे सीनियर ही मानी जाऊँगी क्योंकि मैं आरव की गर्लफ़्रेंड हूँ।”
“ये कोई पोस्ट नहीं होती।” मंथन ने सिर हिलाकर कहा।
वह दोनों बहस कर रहे थे, कि तभी आरव की सेक्रेटरी युवानी आई। वह काफी जल्दी में लग रही थी।
युवानी ने हाँफते हुए कहा, “जल्दी करो, गाइज़! आरव सर का मूड थोड़ा सड़ा हुआ है।”
“वो कब नहीं रहता।” मंथन ने जवाब दिया।
वहाँ से वह सब मीटिंग रूम में पहुँचे। वहाँ पहले से आरव की टीम मौजूद थी, जो उसके ड्रीम कलेक्शन पर काम कर रही थी। मीटिंग रूम में माहिरा, जो कंपनी की जूनियर मैनेजर थी। माहिरा को यह पोस्ट इसलिए मिली थी क्योंकि वह आरव की गर्लफ़्रेंड थी। उसके अलावा वहाँ पीआर मैनेजर मंथन आहूजा, हेड डिज़ाइनर रियान और उसकी सेक्रेटरी मीशा, आरव की सेक्रेटरी युवानी और हेड फ़ोटोग्राफ़र कियान भी थे।
जल्द ही आरव भी वहाँ आ गया। आरव लगभग 27 साल का था, और इतनी कम उम्र में वह एक कामयाब बिज़नेसमैन था। छह फ़ीट के आसपास हाइट, ओसियन ब्लू आँखें, गोरा रंग, फ़िट फ़िज़िक और दिखने में काफी हैंडसम। डिज़ायर्स की सफलता का एकमात्र कारण आरव खुराना था। आरव स्वभाव से काफी सख्त और जुनूनी था। उसे एक बार कोई चीज़ पसंद आ जाती, वह उसे हासिल करने के लिए सही-गलत का भी नहीं सोचता था।
आरव के वहाँ पहुँचते ही सबके चेहरे के भाव गंभीर हो गए थे। आरव ने उनकी ओर देखते हुए इंटेंस वॉयस में कहा, “हैलो टीम! कलेक्शन कॉन्फ़िडेंशियल है। ऑल प्रिपरेशन डन?”
हेड डिज़ाइनर रियान ने जल्दी से कहा, “लेकिन सर, जब कलेक्शन का ही नहीं पता है सबको, तो मीटिंग क्यों? यह पहली मीटिंग है, तो हम सारी तैयारी कैसे करके रख सकते हैं?”
रियान की तरह वहाँ बाकी सभी लोग भी कंफ़्यूज़न में थे। किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह आरव के सामने कुछ कह सके।
माहिरा ने पूरा मामला अपने हाथ में लिया। उसने सबके बिहाफ़ में खड़े होकर हल्का मुस्कुराकर कहा, “ओह, कम ऑन, आरव, मुझे तो तुम बता ही सकते हो।”
माहिरा को लगा कि आरव की गर्लफ़्रेंड होने की वजह से वह उस पर गुस्सा नहीं करेगा, लेकिन आरव ने माहिरा की ओर सख्त निगाहों से देखते हुए कहा, “मैंने कॉन्फ़िडेंशियल वर्ड यूज़ किया है, माहिरा। शायद तुम्हें उसका मतलब पता होगा। मैं किसी को नहीं बता सकता। वैसे, मैंने यह मीटिंग इसीलिए बुलाई है क्योंकि मुझे एक नई मॉडल चाहिए।”
आरव के मिजाज़ देखकर किसी ने कलेक्शन के बारे में कुछ नहीं पूछा।
लेकिन नई डिज़ाइनर हायर करने की बात सुनकर फ़ोटोग्राफ़र कियान ने कहा, “पर सर, जन्नत परफ़ेक्ट है। फिर भी आपको कोई प्रॉब्लम है तो और किसी फ़ेमस ऐक्ट्रेस या मॉडल को हायर कर लेते हैं।”
माहिरा ने आगे कहा, “मैं किसी मॉडल से कांटैक्ट करूँ, आरव?”
आरव ने जवाब में कहा, “नहीं, मेरा कलेक्शन मेरे लिए बहुत स्पेशल है और कोई भी ऐक्ट्रेस या मॉडल जस्टिफ़ाई नहीं कर पाएगी।”
“मैं ट्राई करूँ?” माहिरा ने काफी उम्मीद से पूछा, वह कब से मॉडलिंग करना चाहती थी।
आरव ने ना में सिर हिलाकर कहा, “मुझे कोई मासूम दिखने वाली लड़की चाहिए। लाइक कोई कॉमन लड़की।”
आरव ने इनडायरेक्टली माहिरा को मना कर दिया।
कियान ने हल्का हैरानी जताते हुए कहा, “पर कॉमनर ही क्यों? कोई मॉडल या ऐक्ट्रेस क्यों नहीं? एक प्रोफ़ेशनल की तरह वह शूट कर पाएगी? आई मीन, उनमें वह स्पार्क नहीं होगा।”
आरव ने जवाब में कहा, “क्योंकि मेरा कलेक्शन कॉमनर्स के लिए है, ना कि किसी मॉडल या ऐक्ट्रेस के लिए। वह किसी भी ड्रेस को सिर्फ़ एक बार पहनते हैं। और आप लोगों को यह क्यों गलतफ़हमी है कि कॉमन लोगों में वह स्पार्क नहीं होता, जो एक मॉडल-ऐक्ट्रेस में होता है।”
आरव ने काफी लॉजिक के साथ बात को रखा था, किसी ने आगे कोई सवाल नहीं पूछा।
मंथन ने आरव की ओर देखकर कहा, “ओके, सर, मैं वैकेंसी डाल देता हूँ मॉडलिंग के लिए। जो आएगा, आप देख लीजिएगा और किसी को भी सेलेक्ट कर लीजिएगा। तब तक आप वेटिंग लिस्ट में जितने भी पोर्टफ़ोलिओज़ हैं, उन्हें देख लीजिए।”
“नहीं, मंथन, यहाँ वेटिंग में जितने भी पोर्टफ़ोलिओज़ मिले, मुझे कोई भी परफ़ेक्ट नहीं लगी और मेरे पास इतना वक़्त भी नहीं है कि मैं इंटरव्यू लेकर एक-एक को सेलेक्ट करूँ।” आरव ने सिर हिलाकर कहा। उसने फिर अपनी असिस्टेंट युवानी की ओर देखा।
युवानी ने जल्दी से हड़बड़ाकर कहा, “मैं कोशिश करती हूँ, सर। यहाँ कोई आसपास में किसी और कंपनी से निकाली गई मॉडल हो तो...”
युवानी की बात पूरी होने से पहले ही आरव ने गुस्से में उसकी बात काटते हुए कहा, “आर यू मैड, युवानी? मुझे अपने ड्रीम कलेक्शन के लिए मॉडल चाहिए, ना कि रिजेक्टेड कलेक्शन के लिए। मुझे नहीं पता, तुम सब लोगों के पास में दो दिन का टाइम है। मुझे अपने कलेक्शन के लिए मॉडल चाहिए।”
आरव के डेडलाइन देने का क्या मतलब था, यह पूरा डिज़ायर्स जानता था। पूरी कंपनी में तूफ़ान आ जाता था।
दो दिन का नाम सुनकर सभी ने एक साथ कहा, “पर सर, दो दिन में कैसे?” उन्हें लगा आरव उन्हें थोड़ा और टाइम देगा।
आरव ने कुछ पल सोचा और फिर बेपरवाही से कहा, “ठीक है, तो फिर सभी मिलकर अपना रेज़िग्नेशन लेटर साइन करके मेरे ऑफ़िस में भेजवा देना।”
आरव के कहते ही सब हड़बड़ा गए थे। उन सब में माहिरा बेपरवाह थी। आरव ने उसकी ओर देखा और भौंहें उठाकर कहा, “मिस गर्लफ़्रेंड, यू टू।”
माहिरा ने जल्दी से कहा, “बट आरव, मैं...”
माहिरा की पूरी बात सुने बिना ही आरव वहाँ से गुस्से में चला गया। वह सब लोग परेशान होकर एक-दूसरे की शक्ल देख रहे थे।
मंथन ने वहाँ से उठते हुए जल्दी से कहा, “कम ऑन, गाइज़, जल्दी करो, या फिर कोई नई जॉब ढूँढ लो।”
आरव ने दो दिन का टाइम दिया था, तो फिर दो दिन में उन लोगों को उसका काम करना ही था। वरना नतीजा वही होना था, जिसकी धमकी आरव ने उन्हें दी थी।
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आखिर क्या है, आयु की नफरत की वजह? क्या आरव की तलाश पूरी हो पाएगी, या फिर सबको काम छोड़कर जाना पड़ेगा। जानने के लिए पढ़ते रहिए। ओके, तो पहला पार्ट आपको कैसा लगा, पढ़कर जरूर बताइएगा। देखते है फर्स्ट चैप्टर पर कितनी समीक्षा आती है।