हौले हौले हो जाएगा प्यार ❤️❤️ - Chapter 3
उसका लड़कियों से कोई वास्ता नहीं था। वह लड़कियों से दूर रहता था, भले ही वह अपने चाचा-चाची के साथ रह रहा था। मगर उसने अपना घर तैयार करवाना शुरू कर दिया था क्योंकि वह अपनी ज़िन्दगी में किसी का दखल पसंद नहीं करता था। बहुत जल्दी वह वहाँ से शिफ्ट होकर अपने नए घर जाने वाला था। उसके जाने से रत्ना अपने मन में बहुत खुश थी, मगर वह ऐसा दिखाती नहीं थी।
रणवीर की बहुत मिन्नतें करने के बाद सैम उसके साथ पटियाला जाने के लिए तैयार हो गया था। रणवीर मन ही मन सिकंदर खन्ना से ईर्ष्या करता था, मगर यह बात वह दिखाता नहीं था। रणवीर और रत्ना दोनों ही सैम खन्ना से जलते थे क्योंकि वह अपने काम में सफल था और रत्ना का पति रवि खन्ना सैम की हर बात मानते थे। वह हर बात पर रणवीर की तुलना सैम से करते थे। यह बात रत्ना और रणवीर दोनों को पसंद नहीं थी, मगर वे यह बात जताते नहीं थे।
रात को, जब सभी लोग नाश्ता करने के लिए इकट्ठा हुए, तो सिकंदर खन्ना रवि खन्ना से बोला,
“चाचू, आप और चाची जी पटियाला के लिए निकल जाएँ। मैं और रणवीर कल सुबह जल्दी निकलेंगे। मुझे थोड़ा काम है। मैं भी आपके साथ पटियाला चलूँगा। मैं काम से थक गया हूँ, थोड़ा वहाँ पर रेस्ट कर लूँगा।”
“यह तो बहुत अच्छी बात है बेटा। वैसे भी हम लोग पटियाला के हैं। वहाँ पर हमारा घर भी है, वह चाहे बहुत समय से बंद पड़ा है। मैंने शिव से कह दिया है कि वह घर की साफ़-सफ़ाई करवा दे। वह घर ज़्यादा बड़ा तो नहीं, फिर भी तुम्हें अच्छा लगेगा। तुम्हारे माँ-बाप की यादें हैं वहाँ पर।”
“सही बात है चाचू।”
“हम आज ही निकल जाएँगे। तुम लोग कल आ जाना।”
“ठीक है, हम लोग कल अर्ली मॉर्निंग निकलेंगे। वैसे भी दिल्ली से पटियाला का रास्ता इतना लंबा भी नहीं है।” सिकंदर खन्ना ने कहा।
“हम तो फ़्लाइट से जाएँगे।” रवि ने कहा।
“आप फ़्लाइट से चले जाएँ, मगर चाचू हम दोनों तो गाड़ी से आएंगे।”
“ठीक है। जैसे तुम लोगों की मर्ज़ी। मैं तुम्हारी वजह से रणवीर को यहाँ छोड़कर जा रहा हूँ। मुझे पता है तुम इसको ले ही आओगे।” रवि खन्ना ने कहा।
“हमारे आने से पहले आप घर को अच्छे से सेट कर लेना।” रणवीर बोला। तो फिर उन सबका प्लान बन गया था। रवि खन्ना जी और उनकी पत्नी रत्ना जी आज ही निकलने वाले थे। सिकंदर खन्ना और रणवीर खन्ना अगले दिन जल्दी, अर्ली मॉर्निंग अपनी गाड़ी से जाने वाले थे।
“रात को जल्दी घर वापस आ जाना। हम लोग तभी सुबह जल्दी निकल सकेंगे।” सैम ने शाम को रणवीर को फ़ोन किया।
“भाई, आप फ़िक्र मत करो, मैं जल्दी आ जाऊँगा।”
“आ जाऊँगा नहीं, अभी घर आ जाओ। मैं घर पहुँचने वाला हूँ।” सैम ने कहा।
“आप इतनी जल्दी घर आ रहे हैं?”
“बिल्कुल। पटियाला जाने की तैयारी भी तो करनी है। मेरा ऑफ़िस में काम ख़त्म था, इसलिए मैं घर आ गया।”
“ठीक है भाई, मैं आ रहा हूँ।” रणवीर क्लब में था। उसका कोई इरादा नहीं था आने का, मगर फिर भी उसे जल्दी आना पड़ा क्योंकि सैम तो उसी की वजह से पटियाला जा रहा था। वे दोनों ही शाम को घर जल्दी वापस आ गए। सैम तो जल्दी खाना खाकर सोने चला गया, मगर रणवीर अपने कमरे में बैठकर पीता रहा और रात को लेट सोया।
सुबह सैम ने उसे जल्दी जगा दिया था।
“भाई, इतनी जल्दी क्या है उठने की? दिन को आराम से चलेंगे हम।”
“अगर तुम्हें मुझे साथ में पटियाला लेकर जाना है तो अभी उठ जाओ, वरना मेरा प्रोग्राम कैंसिल है।” सिकंदर ने उससे कहा। ना चाहते हुए भी रणवीर को जल्दी उठना पड़ा।
“चलो, गाड़ी स्टार्ट करो।” सिकंदर रणवीर से बोला।
“हम ड्राइवर लेकर नहीं जा रहे क्या?”
“बिल्कुल नहीं, हम दोनों ही जा रहे हैं। वहाँ पर ड्राइवर की कोई ज़रूरत नहीं है।”
वे दोनों दिल्ली से पटियाला के लिए निकल गए थे। थोड़ी देर तो रणवीर ने गाड़ी चलाई, मगर रात को वह लेट सोया था, तो उसे नींद आने लगी।
“तुम साइड पर बैठकर सो जाओ, मैं चलाता हूँ।” सैम बोला। सैम यह बात अच्छी तरह समझता था कि रणवीर गाड़ी का एक्सीडेंट कर देगा, जिस तरह से वह गाड़ी चला रहा था।