Fated to be yours - Chapter 3
आशना अर्नव से बातें कर रही थी और वह खामोशी से उसकी बातें सुन रहा था। अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला और कुछ लोग अंदर आने लगे। आशना आँखें बड़ी-बड़ी करके उन्हें देखने लगी। उन सब ने काली वर्दी पहनी हुई थी, हाथों में कई शॉपर्स थे। उन्होंने सारे शॉपर्स वहाँ लगे सोफ़े पर रखे और अर्नव को देखकर बोले,
"सर ने अथर्व सर ने मैडम के लिए भेजे हैं और कहा है कि वह रेडी हो जाएँ।"
अर्नव पहले ही उन्हें यहाँ देखकर हैरान था, अब तो उसकी हैरानी की कोई सीमा ही नहीं थी। अपना काम करके वे सब वहाँ से चले गए। आशना ने अर्नव को देखते हुए सवाल किया,
"ये सब कौन थे?... और आपको सर क्यों कह रहे थे?... वह दूसरे सर कौन हैं और इतनी सारी चीज़ें क्यों और किसके लिए भेजी हैं?"
अर्नव खुद ही कंफ्यूज़ था। उसे क्या समझाता? पर जवाब भी तो देना था। उसने बड़े आराम से जवाब दिया,
"कल आप जिनकी गाड़ी के सामने आई थीं, वे मेरे बॉस हैं। उन्होंने ही आपको यहाँ एडमिट करवाया है और सारे बिल भी उन्होंने ही पे किए हैं। जब आप हमारी गाड़ी के सामने बेहोश हुईं, तब मैं उनके साथ था, इसलिए उन्होंने ही मुझे यहाँ आपके साथ रुकने को कहा था। ये सब शायद उन्होंने आपके लिए ही भिजवाया होगा।"
उसकी बात सुनकर आशना ने चहकते हुए कहा,
"मतलब कॉम्पेन्सेशन? मेरा कल उनकी गाड़ी से एक्सीडेंट होने वाला था?"
अर्नव ने हाँ में सर हिला दिया। आशना झट से नीचे उतरी और सोफ़े की तरफ़ दौड़ गई। उसने शॉपर्स खोलकर चेक किए। एक से बढ़कर एक डिज़ाइनर ड्रेस वहाँ मौजूद थीं, जो देखने में ही काफी महँगी लग रही थीं। मेकअप का सामान, हेयर एक्सेसरीज़, घड़ी, सब था वहाँ।
आशना आँखों में चमक लिए सब देखते हुए बोली,
"ये सब मेरे लिए हैं?"
"जी... आप फ्रेश होकर तैयार हो जाइए, मैं बाहर आपका इंतज़ार करता हूँ।" उसने बाहर जाते हुए कहा। आशना ने हाँ में सर हिला दिया। इतने कपड़ों में से उसने सबसे सिम्पल ड्रेस ली और बाथरूम में घुस गई। वह वीआईपी रूम में थी, तो यहाँ सभी सुविधाएँ मौजूद थीं। अर्नव परेशान सा बाहर टहल रहा था।
कुछ देर में अंदर से आशना की आवाज़ आई,
"आप अंदर आ सकते हैं।"
उसके कहने पर अर्नव ने गेट खोला और अंदर कदम रखा। पर दो कदम चलते ही उसके कदम रुक गए, नज़रें सामने खड़ी आशना पर ठहर गईं। आशना ने हल्के नीले और सफ़ेद रंग के कॉम्बिनेशन से बना हुआ फुल लेंथ गाउन पहना हुआ था। बालों को मैसी बन बनाया हुआ था, जिससे कुछ लटें निकलकर उसके गालों पर झूल रही थीं। कोई मेकअप नहीं था, बस नैचुरल ब्यूटी और चेरी जैसे लाल उसके पतले-पतले होंठ, जिन पर मोहिनी मुस्कान फैली हुई थी। अर्नव की नज़रें जैसे ही उस पर पड़ीं, उसकी सारी दुनिया उसी पर ठहर गई।
आशना इतनी खूबसूरत लग रही थी कि अभी अगर कोई उसे देख ले, तो हँसते-हँसते उस पर अपनी जान वार दे। बिलकुल सुन्दर सी परी लग रही थी, जो सपनों की जादुई दुनिया से निकलकर उसके सामने आकर खड़ी हो गई हो। अर्नव को ऐसे खुद को देखता पाकर आशना की भौंहें इकट्ठी हो गईं। उसने उसे घूरते हुए कहा,
"क्या है... ऐसे ताड़ क्या रहे हो?"
उसकी बात सुनकर अर्नव ने हड़बड़ाहट में उस पर से अपनी नज़रें हटाते हुए कहा,
"सॉरी... आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं... तो बस..."
"तो आपकी नज़रें मुझ पर से हट नहीं रही थीं। आई नो।" आशना ने उसकी अधूरी बात पूरी की। अर्नव असमंजस में उसे देखने लगा। आशना ने मुस्कुराकर आगे कहा, "चाँदनी चौक में भी सब यही कहते थे, पर मैं आपको बता दूँ कि मुझे यह ज़रा भी पसंद नहीं कि कोई मुझे ऐसे ताड़े।
अभी तो मैंने आपको छोड़ दिया, क्योंकि आप मुझे डिसेंट लगे, पर अगली बार ऐसा हुआ तो मेरा पंच और आपका थोपड़ा होगा, इसलिए आगे से ध्यान रखिएगा।" उसने अपना मुक्का दिखाते हुए उसे वार्निंग दी। अर्नव ने मुस्कुराकर हामी भर दी।
"शुक्रिया आपका जो आपने मेरी इस गलती को माफ़ कर दिया। आगे से यह गलती दोबारा कभी नहीं होगी, क्योंकि मुझे आपके हाथों अपनी पिटाई बनवाने का कोई शौक नहीं है।" इतना कहकर वह हँस दिया। आशना भी खिलखिला उठी। उसकी निश्छल हँसी अर्नव का ध्यान अपनी तरफ़ खींच रही थी, पर उसने खुद को संभाल लिया।
आशना हँस ही रही थी कि एक बार फिर उसके कमरे का दरवाज़ा खुला। आशना एकदम से चुप हो गई और आँखें बड़ी-बड़ी करके और मुँह खोले सामने देखने लगी। सामने गेट से काला थ्री-पीस डिज़ाइनर सूट पहने अथर्व ने अंदर कदम रखा, अपने कोट को बड़े स्टाइल से सेट करते हुए वह आशना की तरफ़ बढ़ गया। जेल से सेट किए बाल, आँखों पर काले गॉगल्स, गुलाबी पतले होंठ, गंभीर चेहरा, हाथों में ब्रांडेड घड़ी और पैरों में महँगे ब्रांडेड बूट्स। क्या कमाल का जानलेवा एटीट्यूड था उसमें... रौबदार चेहरा, दमदार पर्सनैलिटी, अकड़ से तना सीना और फिटिंग सूट से उभरकर बाहर नज़र आती उसकी बॉडी की शेप जो किसी मॉडल से कम नहीं थी।
चलने का तरीका तो और भी अलग था, क्या स्वैग था उसका, उसके आस-पास एक अलग ही आभा बनी हुई थी, जैसे कहीं का शहंशाह वहाँ पधारा हो। आशना ने आज तक इतना हैंडसम लड़का नहीं देखा था, वह आँखें फाड़े उसे देख रही थी।
अथर्व के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। अर्नव उसे वहाँ देखकर आँखें फाड़े हैरान-परेशान सा उसे देख रहा था। अथर्व आशना के सामने जाकर खड़ा हो गया, बड़े ही स्टाइल से अपने गॉगल्स उतारे और अपनी काली-काली आँखों को उसके चेहरे पर जमाते हुए बोला,
"कैसी हैं आप?"
"जी... जी... मैं ठीक हूँ, आप कौन?" उसके अचानक सवाल करने पर पहले तो आशना हड़बड़ा गई थी। फिर उसने खुद को संभाला और आखिर में उसने अपने मन में चल रहे सवाल को पूछ ही लिया। उसके सवाल को सुनकर अथर्व ने अर्नव की तरफ़ नज़रें घुमाईं। अर्नव झट से आगे आते हुए जवाब दिया,
"मैंने आपको बताया था ना, आप मेरे बॉस की गाड़ी के आगे आकर बेहोश हो गई थीं। यही हैं मेरे बॉस, मि. अथर्व सिंघानिया, सिंघानिया ग्रुप्स के सीईओ।"
अर्नव ने उसका परिचय दिया। आशना अथर्व को ऊपर से नीचे तक देखते हुए बोली,
"हम्म, पर्सनैलिटी पर नाम जचता है, काफी हैंडसम भी हो, हीरो जैसी बॉडी है, अमीर घर से आते हो। तभी चलने के ढंग, बोलने के अंदाज़ में रईसी झलकती है और यह अकड़ भी खानादानी लगती है... क्यों...?"
आशना ने भौंह उठाकर अथर्व से सवाल किया। उसके बोलने के ढंग को देखकर अथर्व की भौंहें सिकुड़ गईं। वह उसे खा जाने वाली नज़रों से घूरने लगा। आशना भी उनकी आँखों में आँखें डाले उन्हें घूरने लगी।
दोनों के लड़ने वाले खतरनाक लुक्स देखकर अर्नव बीच में आते हुए मुस्कुराकर बोला,
"सर, इनका नाम आशना है।"
उसकी बात सुनकर अथर्व ने नज़रें उसकी तरफ़ घुमाईं। उसके ठंडे लुक्स और घूरती डरावनी आँखें देखकर अर्नव थूक गटककर पीछे हट गया और खामोशी से खड़ा हो गया। इतने में एक बार फिर दरवाज़ा खुला और काला कोट पहने एक आदमी अंदर आया। अर्नव चौंक गया। यह अथर्व का वकील था जो उसके सभी लीगल काम देखता था।
वह वकील अथर्व की तरफ़ बढ़ गया। अथर्व ने उसे देखे बिना ही अपना हाथ उसकी तरफ़ बढ़ाया। वकील ने कुछ पेपर्स उसकी हथेली पर रख दिए। अथर्व ने वे पेपर्स आशना की तरफ़ बढ़ा दिए। आशना असमंजस में कभी उसे तो कभी पेपर्स को देखने लगी। जब उसने पेपर्स नहीं पकड़े, तो अथर्व ने अपने दूसरे हाथ से उसकी हथेली पकड़ी और पेपर्स उसके हाथ में थमा दिए।
आशना ने पहले कंफ्यूज़ नज़रों से पेपर्स देखे, फिर सवालिया नज़रों से उसे देखते हुए सवाल किया,
"ये क्या है?"
"देखने में अनपढ़ तो नहीं लगती, तो पढ़ना आता ही होगा... खुद पढ़ लो।" अथर्व की अकड़ में ज़रा भी कमी नहीं आई थी। उसकी बात सुनकर आशना ने मुँह बनाते हुए मन ही मन कहा, "अकड़ू कहीं का, बता देता तो क्या इसकी नाक कट जाती... पर नहीं। इसे तो अपनी अकड़ दिखानी है... हूँ।"
उसने अब पेपर्स पर नज़रें डालीं। ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा शब्द पढ़कर ही उसके होश उड़ गए। वह आँखें फाड़े पेपर्स पढ़ने लगी। जैसे-जैसे वह सब पढ़ रही थी, उसके चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे। आखिर में उसने पेपर्स बेड पर पटक दिए और अथर्व को गुस्से से घूरते हुए बोली,
"क्या बकवास है यह?"
"बकवास नहीं, पेपर्स हैं हमारी शादी के... तो साइन करो इन्हें।" एक बार फिर अथर्व ने अकड़ के साथ जवाब दिया। इसे सुनकर आशना का पारा चढ़ गया, दिमाग गुस्से से भड़क उठा और वह चीखकर बोली,
"आर यू आउट ऑफ़ योर माइंड?! शादी वह भी तुमसे, मैं करूँगी... कभी नहीं। माना तुम हैंडसम हो, अमीर हो, पर मैं बिकाउ नहीं हूँ। अगर तुम मेरे बारे में कुछ उल्टा-सीधा सोच रहे हो, तो मैं तुम्हें पहले ही क्लियर कर देती हूँ। मैं उन लड़कियों में से नहीं हूँ, जो चंद पैसों के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाती हैं। हाँ, मुझे पैसे कमाने हैं, पर उसके लिए मैं खुद को बेचने को बिल्कुल तैयार नहीं हूँ...
मुझे तो हैरानी है, इतने बड़े आदमी होकर आपकी सोच इतनी छोटी कैसे हो सकती है? मतलब हद होती है किसी चीज़ की, जान-पहचान और चले हैं मुझसे शादी करने... मिस्टर, मैं गरीब हूँ, पर अपने जिस्म का धंधा करने वाली बाज़ारू लड़की नहीं हूँ... समझे?
मैं इस जन्म तो क्या अगले सात जन्मों में से किसी एक जन्म में भी तुम जैसे बदतमीज़, अकड़ू, घमंडी और इतनी घटिया सोच वाले आदमी से शादी नहीं करूँगी। अगर तुम दुनिया के आखिरी कुंवारे लड़के हो, तब भी मैं कुंवारी मरना पसंद करूँगी, पर तुमसे शादी... कभी नहीं। मैं अपनी शादी छोड़कर यहाँ क्या इसलिए आई हूँ?... अपने पेपर्स और अपनी घटिया शक्ल लो और दफ़ा हो जाओ मेरी नज़रों के सामने से। अगर तुम कुछ देर और मेरे सामने रहे, तो जाने मैं क्या कर जाऊँ तुम्हारे साथ।"
आशना बेहद गुस्से में लग रही थी, पर उसकी बातों का अथर्व पर कोई असर नहीं हुआ था। उसने पहले वकील को, फिर अर्नव को देखा। दोनों उसका इशारा समझते हुए वहाँ से बाहर जाने लगे।
आशना ने अर्नव को जाते देखा, तो उसके पीछे जाते हुए बोली,
"अरे, इस साइको आदमी के साथ मुझे अकेला छोड़कर कहाँ जा रहे हो? मुझे भी अपने साथ ले चलो।"
वह गेट तक पहुँची ही थी कि अथर्व लंबे डग भरते हुए उसकी तरफ़ आया और वह गेट खोलकर बाहर जा पाती, उससे पहले ही उसकी बाँह पकड़कर उसे पीछे खींच लिया। आशना अब उसके सामने खड़ी थी। उसने उससे अपनी बाँह छुड़ाने की कोशिश करते हुए छटपटाने लगी,
"छोड़ो मुझे... मुझे नहीं रहना तुम्हारे साथ, मुझे भी बाहर जाना है... छोड़ो मुझे।"
"तुम तब तक यहाँ से बाहर नहीं जा सकती, जब तक तुम मेरी बात ना मान लो।" एक बार फिर अथर्व की रौबदार आवाज़ वहाँ गूंज उठी। उसकी बात सुनकर आशना भड़क गई,
"नहीं मानूँगी आपकी बात और इस कमरे से बाहर भी जाऊँगी, आप मुझे रोक नहीं सकते।"
"अच्छा तो ठीक है। छूटकर दिखाओ मेरी पकड़ से, अगर तुम यह कर पाईं तो तुम आज़ाद हो और अगर तुम हार गईं तो तुम्हें मेरी बात माननी होगी।" अथर्व ने अपने ही अंदाज़ में उसके साथ शर्त रख दी। आशना चिढ़ उठी।
"चाहते क्या हैं आप मुझसे? क्यों मेरे पीछे पड़े हैं...?" वह चिढ़कर बोली। अथर्व टेढ़ा मुस्कुराया और उसके करीब जाते हुए बोला,
"तुम्हें चाहता हूँ।"
उसकी बात सुनकर आशना जड़ हो गई और आँखें फाड़े उसे देखने लगी। उसके भाव देखकर अथर्व के लबों पर शातिर मुस्कान उभर आई,
"ऐसा मुझे दुनिया को दिखाना है कि हम साथ हैं। उसके लिए तुम्हें इन कॉन्ट्रैक्ट पेपर्स पर साइन करना होगा। वैसे तो तुमने पेपर्स पढ़े हैं, फिर भी मैं तुम्हें बताना चाहूँगा कि इस कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से अगले एक साल तक तुम मेरी पत्नी बनकर मेरे साथ मेरे घर में, मेरे बेडरूम में रहोगी। इस एक साल में हम बिलकुल वैसे ही रहेंगे जैसे हर पति-पत्नी रहते हैं, इसके बदले एक साल बाद तुम्हें मेरी प्रॉपर्टी का 25% हिस्सा मिलेगा, जिससे तुम अपने सपने पूरे कर सकती हो।
इस एक साल में तुम्हें वह सब मिलेगा जिस पर मेरी पत्नी का अधिकार है, बस एक चीज़ को छोड़कर और वह एक चीज़ हूँ... मैं खुद। तुम वहाँ रह सकती हो, सब कर सकती हो, बस मेरे करीब नहीं आ सकती... डोंट वरी, मैं भी तुम्हें छूने की, तुम्हारे करीब जाने की कोशिश नहीं करूँगा। तुम्हें दुनिया और मेरी फैमिली के सामने ऐसा दिखाना होगा कि हमारे बीच सब ठीक है, हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और साथ में बहुत खुश हैं। एक साल बाद कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म, उसके बाद तुम अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते। उसके बाद तुम्हारे और मेरे बीच में कोई संपर्क नहीं होगा।
मेरे हिसाब से तुम्हें इस कॉन्ट्रैक्ट को साइन कर लेना चाहिए, क्योंकि इसमें मुझसे कहीं ज़्यादा फ़ायदा तुम्हारा है। तुम दुनिया के सामने मिसेज़ आशना अथर्व सिंघानिया बनकर जाओगी, तुम्हें नाम और शोहरत दोनों मिलेगा, आलीशान घर में रहोगी, सारे ऐशो-आराम मिलेंगे तुम्हें। फिर एक साल बाद जो पैसे तुम्हें मिलेंगे, उससे तुम अपनी ज़िंदगी फिर से शुरू कर सकती हो। अपने उस सपने को पूरा कर सकती हो जिसके लिए तुम यहाँ आई हो, पर उसे पूरा करने की औकात नहीं है तुम्हारी।
न ही तुम्हारे पास रहने का ठिकाना है, न ही खाने-पीने का ख़र्चा उठाने भर के भी पैसे हैं। मुंबई जैसे शहर में अकेली सर्वाइव नहीं कर पाओगी तुम, उस पर अब तो तुम पर मेरे 10 लाख से भी ज़्यादा का कर्ज़ है, जिसे चुका पाना तुम्हारे लिए नामुमकिन है, इसलिए तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम चुपचाप मेरी बात मान लो।"
"10 लाख से ज़्यादा का कर्ज़, मैंने आपसे कब कर्ज़ लिया?" आशना जो खामोशी से उसकी सारी बात सुन रही थी, उसकी आखिरी बात सुनकर वह आँखें फाड़े और मुँह खोले अचंभित सी उसे देखने लगी। अथर्व अब दो कदम पीछे हट गया और दुष्ट मुस्कान के साथ बोला,
"जिस रूम में तुम कल से आराम फरमा रही हो, उसका बिल 2 लाख का है, जिसे मैंने पे किया है। तुम्हारे ट्रीटमेंट पर 1 लाख रुपए ख़र्च हुए हैं।"
"पर आपकी गाड़ी से मुझे टक्कर लगी थी, तो इसके पैसे तो आप ही देंगे ना। वैसे भी मैंने तो आपको नहीं कहा था इतने महँगे अस्पताल में लेकर आने को, किसी सस्ते से अस्पताल में भी मेरा इलाज हो सकता था... आपको शौक था अपने पैसों को उड़ाने का, तो मैं क्यों आपको वे पैसे लौटाने लगी भला?"
आशना ने झट से बात साफ़ की। अथर्व ने उसे गहरी नज़रों से देखा, फिर उसके तरफ़ बढ़ते हुए बोला,
"शायद तुम्हें याद नहीं, कल तुम्हारी टक्कर नहीं हुई थी मेरी गाड़ी से। तुम मेरी गाड़ी के आगे आकर बेहोश हो गई थीं, इसलिए गलती तुम्हारी थी और पैसे भी तुम्हीं भरोगी... रही बात सस्ते अस्पताल की, तो वे मेरे स्टेटस से मैच नहीं करते। इसलिए अस्पताल का बिल भी तुम्हें ही देना होगा... और शायद तुम्हें पता नहीं, जैसे तुम मेरी गाड़ी के आगे आई थीं, अगर मैंने तुम पर केस कर दिया कि तुमने मेरी गाड़ी के आगे आकर सुसाइड करने की कोशिश की, तो तुम्हारे साथ क्या-क्या हो सकता है?"
"आप गलत बोल रहे हैं, मैं सुसाइड नहीं कर रही थी। मैं तो बेहोश हो गई थी।" आशना ने घबराकर झट से कहा। उसकी बात सुनकर अथर्व ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा,
"हम्म, पर यह तो तुम जानती हो, मैं जानता हूँ... पर पुलिस तो उसी को सच मानेगी ना जो मैं उन्हें बताऊँगा?"
"यू... शर्म नहीं आती तुम्हें मुझे धमकाते हुए?" आशना बमुश्किल अपने गुस्से को कंट्रोल कर रही थी। अथर्व पर इसका भी कोई असर नहीं हुआ, वह आगे बोला,
"तुम्हीं ने तो कहा कि मैं बदतमीज़ हूँ, तो अब देखो मेरी बदतमीज़ी... हाँ, मैं आगे बताना तो भूल ही गया।" अब उसने गहरी निगाहों से उसके दूध से गोरे बदन को देखते हुए कहा, "जिन प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करके तुम इतना चमक रही हो ना, वे प्रोडक्ट्स ही 5 लाख से ज़्यादा के हैं, जिनके पैसे अब तुम्हें मुझे देने हैं।"
"अरे... पर मैंने तो कुछ इस्तेमाल ही नहीं किया, फिर मैं क्यों दूँगी उसके पैसे? मुझे किसी प्रोडक्ट्स की ज़रूरत नहीं है, मेरी स्किन वैसे ही बहुत अच्छी है।" आशना ने झट से कहा। उसकी बात सुनकर अथर्व शॉक हुआ कि उसने कुछ इस्तेमाल नहीं किया। उसकी स्किन नैचुरली इतनी गोरी, चमकदार और मुलायम है। फिर उसने अपना ध्यान उस पर से हटाया और तिरछी मुस्कान के साथ बोला,
"ठीक है, तुमने प्रोडक्ट्स इस्तेमाल नहीं किए, पर यह जो ड्रेस पहने तुम मेरे सामने तनकर खड़ी हो ना, इसकी अकेले की कीमत 5 लाख से ज़्यादा है और तुमने इसे पहना हुआ है, तो इसके पैसे तो तुम्हें देने होंगे।"
"पाँच लाख की ड्रेस!" आशना का मुँह हैरानी से खुला का खुला रह गया और वह आँखें फाड़े उसे देखने लगी, जबकि अथर्व शातिर मुस्कान लबों पर सजाए उसे देख रहा था।