Fated to be yours- Chapter 1
चांदनी चौक की तंग गलियों से एक लड़की, दुल्हन के लाल जोड़े में सजी-धजी, निकली। पीठ पर नागिन जैसी लहराती चोटी कमर तक पहुँच रही थी, जिस पर लगा गजरा अपनी खुशबू से चारों ओर महका रहा था। मांग में सजा सोने का मांगटिका भागने की वजह से उसके माथे पर इधर-उधर झूल रहा था। नाक में बड़ी सी नथ, सुर्ख लाल रंग में रंगे गुलाब की पंखुड़ियों जैसे कोमल लब धीरे-धीरे कुछ बुदबुदा रहे थे। गले में पहना भारी हार उसके हर बढ़ते कदम के साथ गर्दन पर इधर-उधर झूल रहा था। कानों में भारी सोने के झुमके, बाजू पर बाजूबंद, मेहँदी रची कलाइयों में भरा-भरा चूड़ा, पतली गोरी कमर पर बंधा मोतियों का सुंदर कमरबंद उसकी कमर पर बहुत सज रहा था। पैरों में घुंघरू वाली भारी पायल जिसकी आवाज़ सबको उसके आने का संदेश दे रही थी।
पैरों में स्पोर्ट शूज़ पहने वह चांदनी चौक की गलियों में ऐसे भाग रही थी जैसे किसी मैराथन में भाग रही हो। मार्च की चिलचिलाती गर्मी, शाम पाँच बजे का वक्त जब सूरज देवता अभी भी आसमान में जगमगा रहे थे, उस पर शादी का भारी जोड़ा और गहने। उसका सारा मेकअप पसीने से धुल चुका था, पर उसकी प्राकृतिक सुंदरता कहर ढा रही थी। पीठ पर छोटा सा पिट्ठू बैग लटकाए और अपने लेहंगे को अपनी हथेलियों से ऊपर उठाए वह बेधड़क भागी जा रही थी।
मेन रोड पर जाकर उसने एक ऑटो रुकवाया और झट से उसके अंदर बैठ गई। उसने बैग से एक दुपट्टा निकाला और अपना चेहरा ढँक लिया। ड्राइवर को रेलवे स्टेशन चलने को कहा और बैग से बोतल निकालकर पानी पीने लगी। ड्राइवर उन्नीस साल का लड़का था और लड़की की खूबसूरती उसके होश उड़ा चुकी थी। वह फ्रंट मिरर से उसे ही ताड़ रहा था।
पानी पीते हुए लड़की की नज़र उस पर पड़ी। तो उसने बोतल नीचे की ओर रखी और उसे घूरते हुए बोली,
"ओ भैया... ऐसे न घूरों, नज़र लग जाएगी मुझे। चलो चुपचाप ऑटो चलाओ। वरना तुम्हें नीचे फेंककर मैं खुद ही ड्राइव कर लूँगी और इसी ऑटो के नीचे तुम्हें कुचल दूँगी। फिर दोबारा कभी किसी लड़की को ताड़ने से पहले सौ बार सोचोगे।"
उसके एटीट्यूड और बोलने के ढंग से वह लड़का हैरान हो गया। पर जैसे ही उसकी नज़रें लड़की की आँखों पर पड़ीं, जो उसे गुस्से से घूर रही थीं, तो उसने अपना ध्यान ड्राइविंग पर लगा दिया। लड़की ने अपना फ़ोन निकाला और उसमें से सिम निकालकर उसे तोड़कर बाहर फेंक दिया और गहरी साँस छोड़ते हुए एक ईर्ष्यालु मुस्कान के साथ खुद से बड़बड़ाने लगी,
"अब ढूँढ़कर दिखाओ मुझे, बड़े आए मेरी शादी करवाने वाले। मैंने आज तक वही किया है जो मैंने चाहा है और आगे भी मेरी ज़िंदगी में वही होगा जो मैं चाहूँगी।"
ड्राइवर उसकी बात बड़े गौर से सुन रहा था। आखिर में उसने पूछ ही लिया,
"तो आप अपनी शादी से भागी हैं?"
"हाँ, भागी हूँ तो तेरे बाप का क्या जाता है? चुपचाप ऑटो ड्राइव कर, उसी के पैसे मिलेंगे तुझे। मेरी जासूसी करने के स्पेशल पैसे नहीं देने वाली मैं तुम्हें… हद होती है! ये नहीं अपने काम से काम रखें, दूसरों के फटे में टांग अड़ाना बहुत ज़रूरी होता है लोगों को।"
लड़की ने उसकी अच्छे से इज़्ज़त उतार दी। तो लड़का खामोशी से ड्राइव करने लगा। कुछ आधे घंटे बाद वे रेलवे स्टेशन पहुँचे। तो लड़की ने उसे पैसे दिए और वहाँ से जल्दी से भाग गई। अगली ट्रेन की टिकट ली और प्लेटफ़ॉर्म पर चली गई। कुछ ही देर में ट्रेन भी आ गई। तो लड़की झट से ट्रेन में चढ़ गई और एक खाली सीट देखकर बैठते हुए खुद से बोली,
"जब तक आप सबको ये पता चलेगा कि मैं भाग गई हूँ तब तक तो मैं यहाँ से बहुत दूर निकल चुकी होंगी।"
उसके लबों पर विजयी मुस्कान फैल गई। अगले ही पल उसकी नज़रें बाहर प्लेटफ़ॉर्म पर पड़ीं। तो उसकी आँखें बड़ी-बड़ी हो गईं। वह झट से खिड़की की ओट में हो गई। बाहर पुलिसवालों के साथ कुछ लोग भी थे, शायद किसी को या उसी को ढूँढ़ रहे थे। उनके साथ वह लड़का भी था जिसने लड़की को यहाँ ड्रॉप किया था।
उसे देखते ही लड़की ने चिढ़कर खुद से कहा,
"तो इस कमीने ने मुझे पकड़वाने का पूरा प्लान किया है… हरामखोर… तुझे तो मैं देख लूँगी, पहले यहाँ से तो निकल जाऊँ।"
वह झट से सीट के नीचे घुस गई। कुछ देर बाद वहाँ और भी लोग आकर बैठ गए और गाड़ी चल पड़ी। जैसे ही ट्रेन प्लेटफ़ॉर्म से आगे निकली, लड़की झट से सीट के नीचे से बाहर निकल गई। उसे देखकर आसपास बैठे लोगों की आँखें फटी की फटी रह गईं। उनकी हैरानी की दो वजहें थीं।
पहला, लड़की ट्रेन की सीट के नीचे से निकली और दूसरी वजह थी कि वह दुल्हन के जोड़े में थी। लड़की ने सबको ऐसे घूरते देखा। तो अपनी बत्तीसी चमका दी और "सॉरी" बोलकर आगे बढ़ गई। सबसे पहले उसने बाथरूम में जाकर अपने कपड़े बदले, सारे गहने अपने बैग में डाले।
अब उसने सिंपल सा व्हाइट शॉर्ट कुर्ता और उसके नीचे ब्लैक जीन्स पहनी हुई थी, गले में दुपट्टा। एकदम अलग अंदाज़ पर उतनी ही खूबसूरत लग रही थी वह इन कपड़ों में भी। वह अब दूसरी तरफ़ चली गई। वैसे भी वह तो जनरल से थी तो ऐसे ही वक़्त काटना था उसे। एक बोगी में उसे सीट भी मिल गई। तो वह आराम से बैठ गई। इत्तफ़ाक से वह इस वक़्त मुंबई राजधानी ट्रेन में थी जो दिल्ली से मुंबई जाने वाली सबसे फ़ास्ट ट्रेन है। वह लड़की सारा वक़्त लबों पर मुस्कान और आँखों में चमक लिए बाहर देखती रही।
शाम गहराने लगी, बाहर अंधेरा हो गया, धीरे-धीरे सभी यात्री खाना खाकर सोने चले गए। लड़की एक तरफ़ बैठी रही। अगले दिन सुबह जाकर उसने हल्का-फुल्का कुछ खाया और फिर से बाहर देखने लगी। करीब ग्यारह बजे ट्रेन मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर आकर रुकी। तो सभी धीरे-धीरे नीचे उतरने लगे। लड़की ने ट्रेन के गेट से नीचे कदम रखा। फिर अपनी दोनों बाहों को फैलाकर आँखें बंद करते हुए मुस्कुरा उठी।
"वेलकम टू मुंबई मेरी जान… सपनों के शहर मुंबई में आपका स्वागत है।"
उसने अब अपनी आँखें खोली और बैग पकड़ते हुए आगे बढ़ गई। जैसे ही रेलवे स्टेशन से बाहर निकली एक तेज रफ़्तार बाइक उसके बगल से गुज़री और उस पर पीछे बैठे लड़के ने उसका बैग छीन लिया। तो लड़की उस बाइक के पीछे भागते हुए चिल्लाई,
"चोर-चोर! मेरा बैग ले गया… कोई पकड़ो उसे…"
वह चिल्लाते हुए उनके पीछे भागी पर बाइक का पीछा कब तक कर पाती? वह देखते ही देखते उसकी आँखों से ओझल हो गए। बदहवास भागते हुए वह बुरी तरह थक गई थी। तो अपनी कमर पकड़कर नीचे झुककर गहरी साँसें लेने लगी। थोड़ा रिलेक्स हुई। तो उसने आसमान की तरफ़ देखा और मुँह बिचकाकर बोली,
"बहुत अच्छा स्वागत किया है आपने मेरा इस शहर में। आते ही बैग चुरा दिया। जानते हैं पैसों से लेकर मेरा आईडी तक सब उसी में था, अब मुंबई जैसे शहर में बिना पैसों के मैं क्या करूँगी?"
उसकी आँखों में आँसू आ गए पर उसने उन्हें बाहर नहीं आने दिया। आस-पास के लोगों से पूछते हुए पुलिस स्टेशन पहुँची पर वहाँ का अलग ही नज़ारा था। कोई उसकी बात ही सुनने को राज़ी नहीं था। आखिर में दो घंटे बाद उसे बुलाया गया। सामने एक इंस्पेक्टर बैठा था।
"जी मैडम, कहिए हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं?" पुलिस वाले ने बड़े अदब से पूछा। तो लड़की झट से बोली,
"मेरी कोई सेवा नहीं करनी है, आपके शहर में कदम रखते ही उन कमीने चोरों ने मेरा बैग चुरा लिया है। उसमें मेरे डॉक्यूमेंट और पैसे… सब हैं। इसलिए कैसे भी करके मुझे बस मेरा बैग वापस दिला दीजिए।"
"जी मैडम, हम पूरी कोशिश करेंगे, आप वहाँ जाकर FIR लिखवा दीजिए और अपना कॉन्टैक्ट नंबर भी लिखवा दीजिएगा, जैसे ही हमें कुछ पता चलेगा हम आपको इन्फ़ॉर्म कर देंगे।" पुलिस वाले ने दूसरे डेस्क की तरफ़ इशारा करते हुए कहा। वही उसकी बात सुनकर लड़की ने मुँह लटकाकर कहा,
"पर मेरा फ़ोन तो उसी बैग में था।"
"कोई बात नहीं, आप FIR लिखवा दीजिए उसके बाद आप यहाँ आकर पता करती रहिएगा या अगर नया नंबर लें तो यहाँ आकर दर्ज करवा दीजिएगा। हम आपका बैग ढूँढ़ने की पूरी कोशिश करेंगे।" पुलिस वाले ने उसे आश्वासन दिया। तो वह लड़की थोड़ी रिलेक्स हुई। FIR लिखवाते हुए और वहाँ से निकलते हुए ही दोपहर के चार बज गए थे। सुबह की चाय पी हुई थी। तो अब ज़ोरों की भूख लगी थी। उसने अपने पेट पर हाथ फेरा और चल पड़ी मुंबई की सड़कों पर।
ना रास्ता पता था, न मंज़िल। बस चलती ही जा रही थी। ऐसे ही रात हो गई, पिछले कुछ दिनों से ढंग से खाना नहीं खाया था क्योंकि उसकी शादी उसकी मर्ज़ी के खिलाफ़ करवाई जा रही थी। तो वह भूखे रहकर अपना गुस्सा दिखा रही थी। फिर यहाँ आने के बाद भी कुछ नहीं मिला था। तो उसका सर घूमने लगा। उसके सामने से एक तेज रफ़्तार गाड़ी चल आ रही थी। जैसे ही वह गाड़ी उसके पास पहुँची उसने हॉर्न बजाया पर लड़की की आँखें खुल ही नहीं रही थीं।
अगले ही पल वह बीच सड़क पर मुँह के बल गिर गई। इसके साथ ही सामने से आती गाड़ी में बैठे शख्स ने उसे देखकर झटके से ब्रेक लगाया और पीछे बैठे आदमी ने अपनी दो उंगलियों को अपनी भौंहों पर फिराया, चेहरे पर झुंझलाहट और गुस्से के भाव उभर आए, भौंहें सिकुड़ गईं। अब वह शख्स बेहद खतरनाक और डरावना लग रहा था। उसके एक्सप्रेशन देखकर बगल में बैठे लड़के ने आगे बैठे ड्राइवर को देखते हुए सवाल किया,
"क्या हुआ? ऐसे झटके से गाड़ी क्यों रोकी?"
"साहब, एक लड़की गाड़ी के सामने बेहोश हो गई है।" ड्राइवर ने कुछ डरते हुए जवाब दिया। उसकी बात सुनकर उस लड़के ने अपने बगल में बैठे लड़के को देखते हुए कहा,
"सर, मैं अभी देखता हूँ।"
इतना कहकर वह जल्दी से बाहर निकल गया, ड्राइवर भी उसके साथ नीचे उतर गया। उस लड़के ने लड़की की नब्ज़ चेक की और गहरी साँसें छोड़ते हुए बोला,
"बस बेहोश है।"
वह वापस गाड़ी की तरफ़ बढ़ गया और पीछे की विंडो से अंदर झाँकते हुए बोला,
"सर, लड़की बेहोश है, उसे हॉस्पिटल लेकर जाना होगा।"
उसकी बात सुनकर उस लड़के ने गुस्से से उसे घूरा और अपनी सख्त आवाज़ में बोला,
"जल्दी करो जो करना है, वक़्त नहीं है मेरे पास।"
उसकी बात सुनकर लड़का वापस लड़की की तरफ़ दौड़ पड़ा। ड्राइवर की मदद से उसने लड़की को पीछे बिठाया, फिर खुद उसे संभालकर बैठ गया। गाड़ी फिर से स्टार्ट हो गई। आगे चलकर एक रेड लाइट पर गाड़ी रुकी। तो लड़की बेहोश होने के कारण पहले वाले लड़के की तरफ़ लुढ़क गई और सीधे उसकी गोद में जा गिरी।
लड़के की आँखें गुस्से से छोटी सी हो गईं। उसने बुरी तरह से लड़की को घूरा जो उसकी गोद में बड़े आराम से लेटी हुई थी। उसके बगल वाले लड़के ने घबराकर जल्दी से लड़की को उठाया और उसे "सॉरी" बोल दिया। पहला वाला लड़का बिना किसी भाव के फ़ोन को घूरने लगा। अचानक ही वह उस लड़की की तरफ़ पलटा जिसके चाँद से सोने मुखड़े पर खिड़की से छनकर आती चाँद की रोशनी पड़ रही थी, जिससे उसका चेहरा चमक रहा था, अलग ही कशिश उसके चेहरे पर बिखरी हुई थी।
लड़का कुछ पल एकटक उसके चेहरे को देखता रहा, कुछ तो चल रहा था उसके दिमाग में पर उसके चेहरे को देखकर इस बात का अंदाज़ा लगाना थोड़ा कठिन था कि वह क्या सोच रहा था। गाड़ी सिटी हॉस्पिटल के आगे आकर रुकी। लड़का लड़की को लेकर उतरने लगा। तो पहले वाले लड़की की कड़क आवाज़ सुनकर वह रुक गया।
"तुम यही रहना इसके पास, देखना कहीं भाग न पाए। जैसे ही इसे होश आए मुझे इन्फ़ॉर्म करना।" उसकी बात सुनकर दूसरा वाला लड़का उसकी तरफ़ मुड़ते हुए बोला,
"सर, आप क्या करने वाले हैं इनके साथ?"
"कुछ ख़ास नहीं अभी के लिए, जो कहा है वो करो, बाकी बातें बाद में पता चल जाएंगी।" उसने सख्त आवाज़ में कहा। तो दूसरा लड़का सहमति जताते हुए वहाँ से चला गया। ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी।