mafia's dark desire Ch. 3

mafia's dark desire - Chapter 3

Posted by alfariya sheikh • Mar 19, 2025 12:18 PM

अध्याय ३

जैसे-जैसे अंश पेपर्स पढ़ रही थी, मायरा का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। उसने अपने हाथों की कसकर मुट्ठी बना ली और गुस्से में अबीर की ओर बढ़कर झटके से उसका कॉलर पकड़ लिया। अपना कॉलर पकड़े देख अबीर की आँखें डार्क हो गईं। धीरे-धीरे वहाँ का तापमान भी गिरने लगा और कुछ ही देर में वहाँ का माहौल सर्द हो गया। अबीर की आँखें गुस्से में लाल हो गईं। अबीर की आँखों में देखकर मायरा के अंदर डर की लहर दौड़ गई, फिर भी उसने अपने डर को छिपाते हुए अबीर का कॉलर पकड़ा रहा।

"आपकी हिम्मत कैसे हुई मेरा सौदा करने की? मैंने तो आपको अच्छा इंसान समझा था! आप इतने घटिया निकलोगे, मैंने कभी नहीं सोचा था!" मायरा ने अपने डर को काबू करते हुए गुस्से में कहा।

अबीर ने मायरा के हाथों को झटके से अपने कॉलर से हटाकर उसके हाथ उसकी पीठ से लगा दिए। मायरा दर्द से अपनी आँखें बंद कर ली। अबीर ने व्यंग्यात्मक मुस्कान करते हुए कहा, "त्छत्छत्छ सनशाइन! मानना पड़ेगा तुम्हारी हिम्मत को! तुम्हारी माँ हास्पिटल के बेड पर है और जो इंसान तुम्हारी मदद करना चाहता है, तुम उसी का कॉलर पकड़ रही हो!"

मायरा ने अबीर से अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उस छोटी-सी लड़की के लिए अबीर जैसे तगड़े व्यक्ति को हटाना नामुमकिन था।

"आप मेरी मदद नहीं कर रहे, आप मेरा सौदा कर रहे हैं! आप बहुत घटिया इंसान हैं! नफरत है मुझे आपसे!" मायरा गुस्से में बोली।

"तुम्हारे पास सोचने के लिए पाँच मिनट हैं, तुम्हारी माँ के पास एक घंटा है। तुम जितना वक्त लोगी, तुम्हारी माँ की साँसें उतनी ही कम होती जाएँगी। अगर खुद का सौदा नहीं करोगी, तो कहाँ से लाओगी तीस लाख?" अबीर ने उसकी बात सुनकर तिरछी मुस्कराहट के साथ कहा।

"कुछ भी करूँगी, लेकिन आपकी मदद नहीं लूँगी, समझे आप?" मायरा ने खुद को छुड़ाने की एक बार फिर कोशिश करते हुए गुस्से में कहा।

अबीर ने उसके हाथों को झटके से छोड़ दिया। मायरा जमीन पर गिर गई। उसके मुँह से आह निकल गई और वह अबीर को घूरने लगी। उसे खुद को घूरते देख अबीर ने तिरछी मुस्कराहट के साथ कहा, "ठीक है, तो जाओ कर लो तीस लाख का इंतज़ाम। और अगर नहीं हो पाया, तो मेरे पास चली आना। ऑफ़र अभी भी उपलब्ध है।"

मायरा गुस्से में उठी और अपने हाथ साफ करते हुए अबीर को एक नज़र देखकर वहाँ से चली गई। कुछ देर में सड़कें बारिश के पानी से भीग रही थीं और मायरा रोते हुए बेसुध होकर सड़क पर चल रही थी। उसे कोई होश ही नहीं था। आस-पास के लोग उसे देख रहे थे। वह रोते-रोते सड़क पर बैठ गई। उसके सड़क पर बैठने से जाम लग गया और आने-जाने वाले लोग उस पर गुस्से में बरसने लगे, लेकिन वह दुनिया से बेखबर रो रही थी।

थोड़ी देर रोने के बाद उसने हिम्मत करके उठकर एक टैक्सी में बैठकर एक ऑफिस निकल गई। यह वही ऑफिस था जहाँ मायरा पार्ट-टाइम जॉब करती थी, जहाँ उसने एक साल पहले ही जॉब शुरू की थी।

मायरा ऑफिस में आकर रिसेप्शन पर आई और रिसेप्शनिस्ट से पूछा, "बॉस कहाँ हैं? क्या वह ऑफिस में हैं?"

रिसेप्शनिस्ट ने उसकी बात सुनकर कहा, "सॉरी मैडम, लेकिन बॉस एक महीने के लिए मलेशिया गए हैं।"

रिसेप्शनिस्ट की बात सुनकर मायरा की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई। उसकी आँखों से झर-झर आँसू निकलने लगे। उसके पास ज़्यादा वक़्त नहीं था। डॉक्टर के दिए हुए वक़्त में से सिर्फ़ आधा घंटा बचा था। वह रोते हुए वहाँ से निकल गई। उसकी टैक्सी एक बार फिर ए.के. विला आकर रुकी।

वह टैक्सी से बाहर आई और आसमान की तरफ़ देखकर बोली, "आज मैं अपना सौदा करने जा रही हूँ। भगवान जी, आपने मुझे ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। कुछ घंटों में मेरी ज़िंदगी बदल गई। जिस इंसान से नफ़रत करती थी, आज उसी से खुद का सौदा करने जा रही हूँ। अगर मेरी माँ को बचाने के लिए मुझे खुद को बेचना पड़े, तो मैं वो भी करूँगी।"

मायरा ने अपने आँसू साफ़ करके अंदर गई। कोई भी गार्ड उसे नहीं रोका। वह अंदर गई। अबीर सोफ़े पर बैठा फ़ाइल पढ़ रहा था। उसने एक नज़र मायरा को देखा और दुबारा अपनी नज़रें फ़ाइल की तरफ़ कर लीं।

मायरा उसके सामने आकर खड़ी हो गई और अपने हाथों की मुट्ठी बनाकर बोली, "मुझे आपका ऑफ़र मंज़ूर है।"

यह सुनकर अबीर के चेहरे पर तिरछी मुस्कराहट आ गई। वह अपनी फ़ाइल बंद करके खड़ा हुआ और अपनी पॉकेट में हाथ डालकर व्यंग्यात्मक मुस्कान करते हुए बोला, "यही औक़ात है तुम्हारी मेरी मिस्ट्रेस बनने की? मेरे नीचे रहने का मज़ा आएगा, जब तुम्हारी इज़्ज़त को मैं हर रोज़ अपने नीचे कुचलूँगा।"

अबीर की बात सुनकर कुछ आँसू मायरा के गाल पर लुढ़क कर आ गए। अबीर ने उन पेपर्स को मायरा के मुँह पर फेंक दिया। मायरा ने कसकर अपनी आँखें बंद कर लीं। अबीर ने उसे देखकर कहा, "साइन करो।"

मायरा ने काँपते हाथों से जमीन पर पड़े पेपर्स उठाए और उन पेपर्स को एक नज़र देखकर अपनी माँ का ख्याल करके काँपते हाथों से साइन कर दिए। ये पेपर्स साइन करना उसके लिए सौ मौतों के बराबर था। एक औरत के लिए उसकी इज़्ज़त उसकी जान से बढ़कर होती है, जिसे वह हीरे की तरह संभालकर रखती है, लेकिन अपनी माँ के लिए मायरा सौ तो क्या हज़ार मौतें भी मर सकती थी।

उसके साइन करते ही अबीर ने किसी को फ़ोन करके कहा, "सुधा वर्मा की सर्जरी शुरू करो।"

वह फ़ोन डिस्कनेक्ट करके सामने देखा जहाँ मायरा खड़ी थी। मायरा ने उसे पेपर्स देते हुए कहा, "मैं हास्पिटल जा रही हूँ।"

वह बाहर जाने के लिए मुड़ी, तभी उसके कानों में भारी आवाज़ पड़ी। अबीर शैतानी मुस्कान करते हुए बोला, "क्या मैंने तुमसे कहा था जाने को? पहले मुझसे परमिशन लो और मेरी इजाज़त लेने की आदत डाल लो।"

मायरा ने उसकी बात सुनकर कसकर मुट्ठी बना ली और कहा, "क्या मैं अपनी माँ से मिलने हास्पिटल जा सकती हूँ, Mr. Khanna?"

अबीर ने उसकी बात सुनकर कहा, "जाओ देख लो अपनी माँ को आखिरी बार। उसके बाद तुम उनसे जब मिलोगी, जब मैं चाहूँगा। और हाँ, शाम को घर पर मिलना।"

अबीर की बात सुनकर मायरा ने सर हिलाया और चुपचाप वहाँ से निकल गई। उसके जाते ही अबीर शैतान की तरह हँसने लगा। उसे देखकर लग रहा था जैसे उसने कितनी बड़ी जंग जीत ली है आज।

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