Golden trap of billionaire - Chapter 1
एक क्लब के अंदर लाइट थोड़ी डिम थी। वहां की स्पॉटलाइट और वहां मौजूद लोगों का ध्यान इस वक्त एक ही तरफ था। सब अपने हाथ में ड्रिंक का गिलास पड़े हुए सामने स्पॉटलाइट पर खोई हुई नजरों से देख रहे थे, जहां एक लड़की पियानो बजा रही थी।
पियानो की धुन शानदार थी और उतनी ही शानदार और खूबसूरत वो लड़की। उम्र लगभग 23 साल के करीब, डार्क ग्रे आईज, गोरा रंग, मिड बैक तक लाइट ब्राउन वेवी हेयर और दिखने दुबली पतली सी। उसने व्हाइट कलर का स्लीवलेस शिफॉन फ्रॉक पहनी थी।
वह लड़की पियानो बजाने में खोई हुई थी। हालांकि उसका मन अशांत था।
उसके दिल में हजारों बातें चल रही थी। “मैंने यहां आकर सही तो किया ना? ना जाने क्यों डर सा लग रहा है लेकिन रक्षित साथ है तो थोड़ा राहत महसूस हो रही है। वह मेरे साथ कुछ गलत नहीं होने देगा। फिर उसने यही तो कहा था कि मुझे यहां पियानो बजाना है और उस आदमी के साथ मीटिंग करनी है। उसे अच्छे से होस्ट करना है, ड्रिंक सर्व करनी है, एक डिनर होगा और छोटी सी बातचीत। उसके अलावा और कुछ नहीं। फिर भी क्यों डर लग रहा है।”
अचानक उसकी नज़रें ऊपर उठी। उसकी नजरों के सामने एक लगभग 27 साल का आदमी खड़ा था, जिसके हाथ में ड्रिंक थी। लड़की से नजरें मिलते ही उसने अपनी ड्रिंक उठाकर मुस्कुराते हुए उसे चीयर किया।
वो आदमी मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था, तभी उसके पास खड़े एक लगभग पचास साल के आदमी ने कहा, “मिस्टर रक्षित दीवान, तुमने बिल्कुल सही कहा था। ये लड़की तो कमाल का पियानो बजाती है। दिखने में भी खूबसूरत है, पर ये वर्जिन तो है ना?” वो आदमी अपनी उम्र के मुकाबले काफी फिट लग रहा था। अभी भी वो हवस भरी निगाहों से उस लड़की को घूर रहा था।
रक्षित ने उसकी तरफ तिरछा मुस्कुराते हुए देखा और कहा, “आप मुझ पर शक कर रहे हैं मिस्टर सिंह। आपकी जो भी रिक्वायरमेंट थी, उसमें दीवा गोयंका बिल्कुल फिट बैठती है। पिछले चार साल से डेट कर रहा हूं मैं इसे। हमारे बीच अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। उससे पहले यह सिंगल थी। ”
मिस्टर सिंह ने सिर हिलाया और बोला, “ठीक है पर अब मुझे और इंतजार नहीं करना। इसे बोलो, जल्दी मेरे पास आए। ये रात और इसकी खूबसूरती मुझे ओर मदहोश कर रही है।”
“हां, एक बार यह पियानो कॉन्सर्ट खत्म हो जाए, उसके बाद यह आप ही की है। मैंने इसकी ड्रिंक में ड्रग्स मिला दिए हैं, तो दिक्कत भी नहीं होगी। बस आप पहले इसके साथ अच्छे से पेश आइएगा क्योंकि मैंने इसे यही कहा है कि आप इसके बाप के डूबते हुए बिजनेस को फिर से आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते है। थोड़ी नकचढ़ी भी है, तो संभाल लीजिएगा।” रक्षित ने उसे सब समझाते हुए कहा।
“मुझे ऐसी लड़कियों को संभालना अच्छे से आता है मिस्टर दीवान।” मिस्टर सिंह तिरछा मुस्कुराते हुए बोला और सामने दीवा को देखने लगा।
पियानो बजा रही लड़की मुंबई के एक अमीर बिजनेसमैन नवीन गोयंका की बेटी दीवा गोयंका थी। गोयंका इंडस्ट्रीज इन दिनों बैंकरप्ट होने की कगार पर थी। मिस्टर चिराग सिंह भी एक बिजनेसमैन थे, जिनके साथ गोयंका इंडस्ट्रीज एक डील करने वाली थी। डील फिक्स करने के लिए ही रक्षित का सहारा लेकर दीवा आज उसके साथ इस क्लब में आई थी।
जब दीवा ने रक्षित की तरफ देखा तो उसके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आए। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।
दीवा को अंदर से अच्छी फीलिंग नहीं आ रही थी और यह गलत नहीं था। रक्षित के इरादों से बेखबर दीवा उसके साथ एक डील के लिए आई थी जबकि वह ना तो मुंबई के बारे में अच्छे से जानती थी और ना ही बिजनेस वर्ल्ड के बारे में। थोड़े टाइम पहले ही वह लंदन से अपनी मेडिकल की स्टडी कंप्लीट करके वापस आई थी।
दीवा ने घबराई हुई नजर से चारों तरफ देखा तो सब उसी को देख रहे थे। दीवा ने फिर से पियानो की तरफ ध्यान दिया और बड़बड़ा कर बोली, “पता नहीं ठीक से हो रहा है या नहीं भी। पूरे 4 साल बाद पियानो बजा रही हूं। उस एक्सीडेंट के बाद से मैंने कभी पियानो को हाथ भी नहीं लगाया। प्लीज आज संभाल लेना गॉड और सब कुछ अच्छा करना। ”
दीवा फिर से एक धुन बजाने में खो गई, जो उसने बहुत साल पहले अपने किसी खास के लिए बनाई थी। इन सब के बीच एक और शख्स था, जो दीवा को पैनी निगाहों से देख रहा था।
उसके हाथ में वाइन का गिलास था। उसकी गहरी काली आंखें दीवा को ही देख रही थी। दीवा को देखते हुए उसने एक घूंट में वाइन का गिलास खाली कर दिया था। वो पूरी तरह खोया हुआ था, तभी लोगों की तालियों की आवाज सुनकर उसका ध्यान टूटा। दीवा ने मिस्टर सिंह की इच्छा अनुसार एक अच्छा पियानो कॉन्सर्ट दे दिया था। वह लग्जीरियस क्लब उन्हीं का था।
पियानो बजाने के बाद दीवा स्टेज से नीचे उतरी तो रक्षित उसके पास आया और उसका हाथ पकड़ कर उसे मिस्टर सिंह के पास लेकर गया।
मिस्टर सिंह ने अजीब नजरों से दीवा की तरफ देखा और फिर मुस्कुराते हुए कहा, “मिस गोयंका, मानना पड़ेगा, आप खूबसूरत होने के साथ-साथ टैलेंटेड भी काफी है। मैंने अपनी जिंदगी में काफी सारे म्यूज़िक कॉन्सर्ट अटेंड किए हैं और वह सब दिग्गज पियानो प्लेयर थे, लेकिन आप भी उन्हें अच्छी टक्कर दे रही है, वह भी इतनी कम उम्र में। ”
“थैंक यू मिस्टर सिंह। ” दीवा ने अपनी घबराहट को काबू करके धीरे से जवाब दिया और फिर रक्षित की तरफ देखा।
दीवा के चेहरे की घबराहट रक्षित से छुपी हुई नहीं थी। उसने सिर हिलाया और दीवा को एक गिलास देते हुए कहा, “सॉफ्ट ड्रिंक है बेबी, पी लो, तुम काफी थक गई होगी। थोड़ी ही देर की बात है।”
दीवा को रक्षित पर पूरा विश्वास था और उसने ड्रिंक का गिलास लेकर उसे एक झटके में खाली कर दिया था। वैसे भी वह लगभग 1 घंटे से स्टेज पर थी और इतने टाइम में उसे प्यास लग रही थी।
सब की बातचीत के बीच में वो लड़का अभी भी उन्हें देख रहा था। वह आर्यांश कपूर था। मुंबई की सबसे बड़ी एंटरटेनमेंट कंपनी कपूर इंटरनेशनल्स का मालिक। उम्र लगभग 27 साल के आसपास। दिखने में बिल्कुल बेइंतहा हैंडसम। उसने गहरी सांस ली और अपने पास खड़े एक आदमी को गहरी आवाज में कहा, “ये वही लड़की है।”
“तो अब आप क्या करने वाले हैं?” उसके पास खड़े आदमी ने तिरछा मुस्कुराते हुए कहा, जो कि उसका मैनेजर और राइट हैंड सार्थक खन्ना था।
“बस देखते जाओ। ” आर्यांश ने तिरछा मुस्कुराते हुए कहा। वह कहीं भी जाने के बजाय वहां बैठा उनकी तरफ देख रहा था।
वही एक ड्रिंक लेने के बाद रक्षित ने दीवा के कमर पर हाथ रख कर कहा, “चलो अब डिनर करते हैं, वैसे भी काफी टाइम हो गया। ”
डिनर करने के लिए उन्होंने क्लब का प्रेसिडेंशियल रूम बुक किया था। दीवा को मिस्टर सिंह काफी अजीब लग रहे थे क्योंकि वह लगातार उसे चेक आउट कर रहे थे।
दीवा ने अपने मन में कहा, “बस थोड़ी देर की बात है। रक्षित भी साथ है। अगर पापा के बिजनेस की बात नहीं होती तो मैं इस घटिया आदमी को 1 मिनट के लिए नहीं झेलती।”
मिस्टर सिंह दीवा के पास आने लगे, तभी वो कुछ कदम पीछे हटकर बोली, “आप लोग चलिए, मैं बाथरुम जाकर आती हूं।”
“ठीक है फिर जल्दी आना।” रक्षित ने मुस्कुरा कर कहा और फिर रूम नंबर बता दिए थे।
दीवा जल्दी से बाथरूम की तरफ बढ़ने लगी। उसने मन ही मन कहा, “पता नहीं, अचानक इतनी गर्मी क्यों लग रही है।” उस पर ड्रग्स का असर होने लगा था।
दीवा को बाथरूम की तरफ जाते हुए देखकर आर्यांश के चेहरे के भाव गंभीर हो गए, तभी सार्थक खन्ना ने उससे कहा, “इस आदमी को तो आप जानते ही हो। यह चिराग सिंह है। इसे पियानो बजाने वाली कम उम्र की लड़कियां पसंद है। लड़कियों पर काफी पैसा खर्च करता है ये। इसके क्लब में इसे आसानी से ऐसी लड़कियां मिल जाती है। लगता है यह लड़की आज बच नहीं पाएगी। क्या हमें उसकी मदद करनी चाहिए सर?”
“मुझे नहीं लगता कि हमें कुछ करना चाहिए। इसकी किस्मत में आज की रात बर्बाद होना लिखा है, तो ये नहीं बच सकती हैं खन्ना।” आर्यांश ने काफी रहस्यमई तरीके से कहा और फिर वहां से उठकर जाने लगा।
आर्यांश की कही हर बात का मतलब सार्थक को समझ आ रहा था। वह उसके पीछे नहीं गया। आखिर अपने बॉस को उससे बेहतर कौन जान सकता था। हां, आज रात दीवा गोयंका के साथ जो होने वाला था, वह उससे बच नहीं सकती थी। खास कर तब, जब वह आर्यांश कपूर की नजरों में आ गई थी।
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कहानी का पहला भाग आपको कैसा लगा? क्या लगता है, दीवा की किस्मत में सच में आज की रात बर्बाद होना लिखा है, या आर्यांश इस मामले में कुछ करेगा? जानने के लिए अगला भाग जरूर पढ़िए। पढ़कर कमेंट और रेटिंग दीजियेगा।