Boss to husband Ch. 2

Boss to husband - Chapter 2

Posted by Beautiful stories ( R Mann) • Mar 15, 2025 05:50 PM

वेदांत सहगल

SS ग्रुप की शुरुआत वेदांत सहगल के दादा ने की थी, और उसके पिता बृजेश सहगल ने उसे बुलंदियों तक पहुंचाया। बृजेश सहगल के तीन बच्चे थे—दो बेटे और एक बेटी।

बड़ा बेटा, राजन सहगल, एक जाने-माने डॉक्टर थे। उनका खुद का एक बड़ा हॉस्पिटल था जो देशभर में मशहूर था। उन्हें बिज़नेस में कोई दिलचस्पी नहीं थी।

बेटी, बीनू सहगल, वेदांत से छोटी थी। उसमें बिज़नेस के प्रति थोड़ी बहुत रुचि थी। उसने अभी-अभी अपनी पढ़ाई पूरी की थी और शादी से पहले कुछ समय ऑफिस में काम करना चाहती थी। जब उसने वेदांत से कहा कि वह ऑफिस ज्वाइन करना चाहती है, तो वेदांत ने उसे हाँ कह दिया। मगर एक महीना बीत गया और अब तक उसने ऑफिस आना शुरू नहीं किया था।

बृजेश सहगल का छोटा बेटा था वेदांत—कॉलेज का टॉपर, मगर गुस्सैल, घमंडी और एक घोषित प्लेबॉय। उसका कोई भी रिश्ता ज्यादा दिन नहीं टिकता था क्योंकि उसे कभी किसी की परवाह नहीं होती थी। हमेशा अपने मन की करता था।

बिज़नेस में उसकी गहरी रुचि थी। एमबीए की पढ़ाई के बाद उसने जब ऑफिस ज्वाइन किया, तभी उसके पिता का गंभीर एक्सीडेंट हो गया। तभी से वेदांत ने पूरी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।

उसके परिवार में उसकी माँ और दादी भी थीं। दोनों ही बेहद प्यार करने वाली औरतें थीं। लेकिन घर की असली मुखिया थी उसकी दादी, जिनकी बात को कोई टाल नहीं सकता था—ना वेदांत, और ना ही उसका पिता।

वेदांत की माँ एक बेहद सरल और सौम्य महिला थीं। उन्हें परिवार में सबकी फिक्र रहती थी और वह किसी की भी बात आसानी से मान लेती थीं।

मगर दादी—वेदांत की तरह ही घमंडी, तुनकमिज़ाज और अपने सामने किसी को कुछ ना समझने वाली औरत थीं। वह आमतौर पर किसी के मामलों में दखल नहीं देती थीं, लेकिन जब बोलती थीं, तो फिर वही अंतिम फैसला होता।

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अंबर सक्सेना

अंबर, अपने माँ-बाप की इकलौती और बेहद प्यारी बेटी थी। दिखने में बेहद खूबसूरत—दूध जैसा गोरा रंग, बड़ी-बड़ी हल्की हरे रंग की आँखें, गुलाबी होंठ, पतली सी नाक और मीठी सी बोली। वह जितनी सुंदर थी, उतनी ही समझदार भी थी।

उसके पिता, अरुण सक्सेना, एक मॉडर्न सोच रखने वाले इंसान थे। उन्होंने अंबर को पूरी आज़ादी दी हुई थी—देश-विदेश घूमना, देर तक काम करना, बॉयफ्रेंड बनाना या न बनाना—उन्होंने कभी कोई सवाल नहीं उठाया।

वहीं उसकी माँ, अनीता सक्सेना, परंपरावादी थीं। उन्होंने अंबर को अच्छे संस्कार दिए थे और हमेशा उसे सही-गलत का फर्क समझाया।

अंबर ने अपने पिता की दी हुई आज़ादी का कभी ग़लत इस्तेमाल नहीं किया। उसका कभी कोई बॉयफ्रेंड नहीं रहा। उसने हमेशा अपने प्रोफेशनलिज़्म को सबसे ऊपर रखा।

वेदांत के साथ काम करने के तीन सालों में उसके माता-पिता ने उस पर कभी किसी बात का दबाव नहीं डाला। मगर अब उसकी माँ चाहती थीं कि अंबर शादी के बारे में सोचे और यह नौकरी छोड़ दे। पिता अब भी कहते थे, "जब उसे कोई मिलेगा, वो खुद ही हमें बता देगी। हमारी बेटी अपनी मर्ज़ी की ज़िंदगी जीने लायक है।"

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वेदांत और अंबर के बीच की दूरी...

इतनी खूबसूरत होने के बावजूद, वेदांत ने अंबर को कभी "उस नज़र" से क्यों नहीं देखा?

क्योंकि अंबर अपने काम में इतनी प्रोफेशनल थी कि उसने कभी भी वेदांत को अपनी ओर देखने का मौका ही नहीं दिया। वह हमेशा फॉर्मल कपड़ों में, ट्राउज़र-ब्लेज़र पहनकर ऑफिस आती थी। सिर्फ़ एक हल्की सी लिपस्टिक, बाल बंधे हुए, और पैरों में फ्लैट शूज़। कभी कोई अतिरिक्त सजावट नहीं, कभी कोई एक्स्ट्रा मुस्कान नहीं।

वेदांत को वह बाकी लड़कियों के मुक़ाबले "बोरिंग" लगती थी। उसे ऐसा कभी नहीं लगा कि अंबर के पीछे दिल लगाने लायक कुछ है।

और अंबर ने भी कभी वेदांत में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

मगर… क्या आप वाकई सोचते हैं कि जो पिछले तीन सालों में नहीं हुआ…

वो कभी भी नहीं होगा? 😉

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