The Haunting Murders Ch. 2

The Haunting Murders - Chapter 2

Posted by Simran Ansari • Mar 15, 2025 11:35 AM

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वह एक वीराने में काफी दिनों से बंद पड़ा घर था और उस के आसपास कई सारे जंगली पेड़ और जंगली झाड़ियां उग आए थे, साफ-सफाई का तो दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं था, बड़े-बड़े पत्थर और ईंट वगैरा बिखरी पड़ी थी साथ ही दीवार भी कई जगह से ऊंची नीची और टूटी हुई सी थी, इसलिए मोहित उस पत्थर पर चढ़ कर काफी आसानी से उस घर की बाउंड्री वॉल के अंदर कूद गया।

"तू आ रही है या मैं जाऊं अकेला ही हीरो बनने?" - दीवार के पास ही खड़े मोहित ने तृषा से कहा

"तेरे साथ ही मरना लिखा है मेरा तो, कहां फंस गई मैं? रुक आती हूं।" - बड़बड़ाती हुई तृषा भी उसी पत्थर के सहारे चढ़ कर दीवार पर बैठ गई और दूसरी तरफ से मोहित ने उसे पकड़ कर नीचे उतार लिया।

"हां तो अब..." - दीवार के पार आ कर तृषा अपना हाथ झाड़ती हुई बोली

"अब क्या... अब चलो एक रोमांटिक डिनर करते हैं ना बढ़िया सा" - मोहित फिर से अपने उसी व्यंगात्मक अंदाज में बोला

"रोमांटिक डिनर और तेरे साथ शक्ल देखी तूने अपनी" - इस बार तृषा उसका मज़ाक उड़ाती हुई बोली

"मजा़क था बस , ज्यादा पर्सनल होने की जरूरत नहीं है और मेरी शक्ल तुझ से तो अच्छी है चुड़ैल.." - मोहित चिढ़ कर तृषा के बाल खींचते हुए बोला तो तृषा ने भी उस के हाथ पर मारा

वह दोनों बचपन के दोस्त थे और आज तक हर उल्टे सीधे काम में एक दूसरे का साथ देते आए थे, चाहे हंस कर खुशी से या फिर जबरदस्ती, बेमन से, रोते, पछताते हुए लड़ झगड़ कर लेकिन जैसा भी हो आखिर वह दोस्त थे तो पार्टनर ऑफ क्राइम्स भी थे, सारी मुसीबत भी साथ में ही मोल लेते थे और फिर उस में से बाहर भी एक साथ ही निकलते थे लेकिन लड़ते झगड़ते, एक-दूसरे को ब्लेम करते हुए हर वक्त!

"पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में क्या बोला था, जल्दी बता" - मोहित आगे बढ़ता हुआ बोला तृषा भी लगभग भागती हुई उस के पीछे आई और बोली - "चिल्ला कर बताऊं क्या? मेरे लिए रुका तो कर यार!"

"एक तो तेरे ये लड़कियों वाले नखरे खत्म नहीं होते।" - मोहित थोड़ा सा इरिटेट होते हुए बोला

"हां, तो लड़की ही हूं मैं, याद रखा कर ना, और यह रही रिपोर्ट ले तू खुद ही पढ़ ले।" - अपने आईपैड में एक पेज ओपन कर के तृषा ने मोहित को थमा दिया।

"इस के हिसाब से तो घर के अंदर मिली थी लाश और उस के भी शरीर पर कोई भी चोट का निशान नहीं था, ठीक वैसे ही जैसे की पहली दो लाशों पर भी कोई चोट के निशान नहीं थे, यह कैसे हो सकता है?" - मोहित रिपोर्ट पढ़कर थोड़ा चौंकते हुए बोला

"जाहिर सी बात है ऐसी जगह पर ला कर कोई गोली तो मारेगा नहीं, कुछ और ही सोचा होगा खूनी ने ।" - तृषा मोहित से अपना आईपैड वापस लेती हुई बोली

"मतलब काफी तगड़ी प्लानिंग है।" - मोहित खुद ही में बुदबुदाया, वो और तृषा अब तक उस घर के गेट तक पहुंच चुके थे, जिस पर कोई ताला तो नहीं लगा था, लेकिन पुलिस की सील जरूर लगी थी।

"यार! तेरा यह जासूस बनने का शौक ना, मुझे बहुत भारी पड़ेगा किसी दिन..." - मोहित के पीछे ही तृषा भी उस पुलिस की लगाई हुई सील के नीचे से झुक कर निकलती हुई बोली

"चल कुछ तो भारी पड़ेगा तुझे, नहीं तो हर चीज हल्के में लेती है तू..." - मोहित फिर से उसी तरह उस की बात को हवा में उड़ाता हुआ बोला

"बाप रे! कितनी डरावनी जगह है, मेरे हिसाब से तो हार्ट अटैक ही आया होगा उस बंदे को..." - उस घर के अंदर पहुंचकर चारों तरफ देखते हुए तृषा अपने सीने पर हाथ रखते हुए बोली और फिर मोहित की तरफ मुड़ कर कुछ बोलने ही वाली थी कि तभी उस ने देखा कि वह वहां पर अकेली थी मोहित वहां पर था ही नहीं...

"मोहित... मोहित... कहां चले गए तुम? देखो यह कोई मजाक करने का वक्त नहीं है, सामने आओ चुपचाप!" - तृषा अपने आगे की तरफ नपे तुले से कदम चलती हुई मोहित को आवाज लगाती हुई बोली

तभी उस घर में एकमात्र रोशनी का जरिया वह पुराना सा बल्ब भी अचानक बंद हो गया और वहां पर एक दम अंधेरा हो गया।

"आआआआआआह... मोहितत्......" - अंधेरा होते ही तृषा की ज़ोर से चीख निकल गई और वह लगभग डरती हुई फिर से चिल्लाई - "कहां हो तुम मोहित! मत करो यह सब.. " और थोड़ा संभलते हुए उस ने जल्दी से अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट ऑन कर ली और उस की रोशनी चारों तरफ देखने लगी लेकिन उसे कुछ भी नज़र नहीं आया।

मोबाइल के फ्लैश की रोशनी में, तृषा को वहां पर अपने अलावा कोई भी और नज़र नहीं आ रहा था, लेकिन फिर भी एक अजीब सा डर उस के मन में बैठा हुआ था इसलिए वह उस जगह पर अपने अकेले होने की वजह से और ज्यादा डर रही थी, क्योंकि इतनी सारी अफवाहें जो सुन रखी थी उस ने  इस घर के बारे में और इस के साथ ही अभी एक लाश भी तो मिली थी यहां पर, इस घर से ही; ऐसे हालातों में भला किस को डर नहीं लगेगा वह भी जब आप का साथी गायब हो जाए और अचानक से अंधेरा भी!

फिर भी हिम्मत कर के वह मोहित को आवाज लगाती हुई एक तरफ बढ़ रही थी, तभी उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कि उस के पीछे कोई है तो यह सोच कर ही डर के मारे उस की हलक सूख गई, तृषा ने अपने गले में फंसा हुआ थूक निगल कर अपना गला तर किया और डरते हुए उस ने एक तरफ अपने कदम बढ़ाए कि तभी उसे पीछे से अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस हुआ...

वह चौंक कर पीछे पलटी तो वहां पर काफी अंधेरा था, अपने कांपते हाथों से मोबाइल का फ्लैश ऊपर कर के उस ने देखा तो उस के सामने वहां पर मोहित खड़ा था।

"यू...हाउ डेयर यू मोहित! ऐसा कोई करता है क्या? वो भी ऐसी जगह पर।" - ये बोलते हुए घबराई हुई सी तृषा जल्दी से मोहित के गले लग गई।

"लेकिन मैंने क्या किया?" - मोहित ने इस तरह से पूछा जैसे कि उसे कुछ पता ही ना हो।

"कहां गायब हो गए थे तुम, इडियट कहीं के और यह लाइट्स भी तुम ने ही ऑफ की थी ना, मुझे डराने के लिए..." - मोहित  के गले लगी हुई तृषा उस के कंधे पर मारती हुई बोली

"अरे पागल लड़की, मैं तो बस अभी आया हूं यहां पर, थोड़ा सा आगे चला गया था मैं उस तरफ , लेकिन तेरी चीख सुनी तो भागता हुआ आया यहां पर और...वह बल्ब.."  - मोहित की नज़र जब बल्ब पर पड़ी तो उसे देखता हुआ वह चुप हो गया।

क्रमशः

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