इश्क़ का सौदागर - Chapter 1
रिहान ने कहा, "तुम मेरी बात मान क्यों नहीं रहे हो? तुम समझो, वो लड़की तुम्हारे लिए बहुत अच्छी है। तुम्हें बहुत खुश रखेगी।"
"मुझे कुछ नहीं सुना।" रिहान ने कहा, "और नहीं, आपकी बात माननी है। मैंने कहा ना, मुझे शादी नहीं करनी। और वैसे भी, मुझे खुशी उस लड़की के साथ नहीं, हर लड़की के साथ मिल जाती है। और आप चाहते हैं कि मैं शादी कर लूँ? मैं बिल्कुल भी अपनी आजादी खराब नहीं करना चाहता!"
"आप मना कर दीजिए," उसने कहा और वहाँ से जाने लगा।
"तुम्हें मेरी बात माननी होगी," उसके पिता बोले, "अपनी मर्जी से या जबरदस्ती से, तुम्हें शादी तो करनी होगी, और वो भी उसी लड़की से।"
रिहान पीछे पलटा और बोला, "आपको ऐसा लगता है कि मैं आपकी बात मानूँगा?"
"हाँ, ज़रूर मानोगे," पिता ने कहा, "और तुम शादी भी करोगे।"
रिहान मुस्कुराते हुए बोला, "ओह अच्छा, वो भला क्यों करूँगा?"
"क्योंकि अगर तुमने शादी नहीं की तो मैं तुम्हें अपनी प्रॉपर्टी से बेदखल कर दूँगा," पिता ने कहा, "और जो तुम यह आजादी की ज़िन्दगी जीते हो ना, यह नहीं जी पाओगे। इसलिए तुम्हें शादी करनी होगी। मैं तुम्हें बर्बाद होते हुए नहीं देख सकता! जिस तरह तुम्हारी हरकतें हैं, उस हिसाब से तो तुम्हें कोई लड़की भी नहीं देगा। लेकिन शुक्र मानो मेरे दोस्त का जो तुम्हें अपनी लड़की देने को राजी हो गया। वरना तुम हमेशा ऐसे ही अकेले ज़िन्दगी भर रहते।"
अजान, अपने पिता की बात सुनकर, इरिटेट होकर बोला, "किसने कहा मैं अकेला हूँ? रोज़ नई लड़की आती है मेरे पास। और वैसे भी, मुझे फ़र्क नहीं पड़ता। आप प्रॉपर्टी से बेदखल करें या ना करें, क्योंकि आपका बिज़नेस मेरी वजह से चल रहा है। मैंने पहुँचाया है नंबर वन पोजीशन पर आपके बिज़नेस को। आप निकालना चाहते हैं?"
"तो निकाल दे, फिर आपकी कंपनी डूब जाएगी। फिर मुझसे मत कहना। वैसे भी, मेरे अंदर इतनी ताकत है, मैं खुद अपने आप कुछ कर सकूँ।"
रिहान की बात सुनकर, रिहान के पिता बोले, "तुम कभी एक अच्छे बेटे नहीं बन पाए। हर वक्त तुमने मुझे तकलीफ़ दी। जिस दिन तुम पैदा हुए थे ना, उस दिन मैं बहुत खुश हुआ था, यह सोचकर कि मेरा बेटा मेरा सहारा बनेगा। लेकिन अफ़सोस कि तुम तो सहारा क्या, घर में रहने के काबिल ही नहीं हो। निकल जाओ मेरे घर से, दोबारा अपनी शक्ल मत दिखाना। आज से मेरे लिए तुम मर गए। तुम्हारे लिए तो मैं कुछ मायने नहीं रखता, इसलिए चले जाओ यहाँ से।"
रिहान के पिता बहुत ज़्यादा हाफ़ रहे थे। रिहान अपने पिता की बात सुनकर बोला, "ठीक है, आप यही चाहते हैं तो मैं जा रहा हूँ।" यह कहकर रिहान वहाँ से चला गया। रिहान को जाता देख उसके पिता की आँखों में आँसू आने लगे। एकदम से उन्होंने अपने दिल पर हाथ रखा और गिरने लगे। एक औरत, जो वहाँ खड़ी कब से बाप-बेटों की लड़ाई देख रही थी, वो रिहान के पिता को गिरता देख जल्दी से उनके पास आई, उनको संभाला और घबराकर बोली, "आरिफ़, आपको क्या हो गया? आप ठीक तो हैं ना? अभी मैं डॉक्टर को बुलाती हूँ। राजू, जल्दी से गाड़ी निकालो। रिहान, जल्दी आओ! देखो तुम्हारे डैड को क्या हो गया। तुम्हारे डैड की आँखें नहीं खुल रही हैं!"
रिहान, जो अपने कमरे में दरवाजे पर खड़ा था, वो उस औरत की बात सुनकर जल्दी से भागते हुए आया और अपने पिता को ऐसी हालत में देखकर जल्दी से उनके पास आया और घबराकर बोला, "डैड, आँखें खोलो! क्या हो गया? आँखें खोलो डैड!" लेकिन उन्होंने अभी भी आँखें नहीं खोलीं। रिहान ने जल्दी से अपने पिता को उठाया और जल्दी से घर के बाहर लेकर आया।
क्रमशः...