Tum mere ho - Chapter 3
असल में उसका मन तानिया के पास जाने का हो गया था। फिर तानिया ने उसे खुद फोन करके बुलाया। पहले तो वह तानिया को फोन करने लगा। फिर उसने सोचा कि आज वह तानिया को सरप्राइज देगा। सोचते हुए वह मुस्कुराया।
वह लेट रात को तानिया के फ्लैट पर पहुँचा। उसने फ्लैट की घंटी बजाई। तानिया ने आकर जब दरवाज़ा खोला, तो उसे देखकर वह एकदम हैरान हो गई। इससे पहले कि वह कुछ बोलती, अर्जुन उसे धकेलता हुआ उसके फ्लैट के अंदर चला गया।
उसने देखा कि पहले ही वहाँ कोई और लड़का बैठा था। अर्जुन को समझने में देर नहीं लगी। तानिया असल में फोन करके उसे कन्फर्म कर रही थी कि कहीं वह आ तो नहीं रहा। उसे लड़के को देखकर अर्जुन तानिया से बोला,
"...मुझे मेरा फ्लैट कल खाली चाहिए..."
वहाँ पर वह बिल्कुल शांत बना रहा। मगर बिल्डिंग से बाहर निकलते ही उसको बहुत गुस्सा आया। उसका ध्यान उस छोटी बच्ची पर चला गया।
वह बहुत सोचने लगा, "...अगर वह सच में उसकी बेटी हुई, तो...और ऐसी ही किसी और औरत के पास हुई... तो उसका भविष्य क्या होगा...?" उसके दिमाग पर वह बच्ची हावी होने लगी।
वह उस बच्ची के बारे में पता करेगा। अगर वह उसकी अपनी बच्ची हुई, तो वह उसे अपने पास रखेगा। उसके दिमाग से और सारी बातें निकल गईं। वह सिर्फ़ उस बच्ची के बारे में सोच रहा था। वह एक पिता की तरह सोच रहा था।
अपने पेंटहाउस चला गया। उसने बड़ी मुश्किल से रात निकाली। सुबह होते ही वह पूरी तैयारी के साथ जयपुर के लिए रवाना हो गया। अपने प्राइवेट जेट से वह जयपुर गया था। उसकी सिक्योरिटी टीम उसके पीछे गाड़ियों से बाय रोड जा रही थी।
वह सुबह-सुबह ही जयपुर पहुँच गया था। उसे देखकर उसका दोस्त, जिसकी शादी थी, बहुत खुश हुआ।
"...तुम तो हल्दी के दिन आने वाले थे... अच्छा किया आज ही पहुँच गए..." उसका दोस्त विलियम खन्ना बोला।
व्हाइट पजामा-कुर्ते में वह बहुत हैंडसम लग रहा था। आज हल्दी के दिन सभी ने इंडियन ट्रेडिशनल कपड़े ही पहने हुए थे। असल में उसका दोस्त विलियम की फैमिली बहुत साल पहले विदेश बस गई थी। वैसे तो वह लोग पूरे विदेशी हो गए थे, मगर आज वे ट्रेडिशनल तरीके से शादी करने के लिए इंडिया आए हुए थे।
प्रोग्राम पैलेस की छत पर चल रहा था। सभी औरतें मेहँदी लगवाने में बिजी थीं। विलियम की मंगेतर सारा की भी मेहँदी लगाई जा रही थी, मगर विलियम और उसके दोस्त आज फ्री थे। उनको कोई खास काम नहीं था। बस वे टोलियाँ बनाकर इधर-उधर बैठे हुए थे।
पैलेस की छत पर सारे मेहमान ही हाजिर थे। वहीं पर खाने-पीने की स्टॉल लगी हुई थी। सभी लोग खा-पी रहे थे और मेहँदी लगवा रहे थे। लड़कियाँ साथ में डांस भी कर रही थीं और मेहँदी भी लगवा रही थीं। मगर वह बच्ची कहीं नज़र नहीं आई।
वह सोचने लगा। कहीं वह सगाई के बाद चली तो नहीं गई। एक बार उसका मन किया कि वह विलियम से पूछ ले। फिर वह कुछ सोचकर चुप हो गया। उसके पास उस बच्ची की कोई तस्वीर भी नहीं थी। उस तस्वीर के ज़रिए वह अपनी टीम को उसे ढूँढने के लिए लगा सकता था। जब मेहँदी वाले दिन की शाम हो गई,
वह छत की रेलिंग के साथ खड़ा हुआ, शहर को देखने लगा। शहर की तरफ़ देखते-देखते उसका ध्यान लॉन की तरफ़ गया। वहाँ पर वह बच्ची खेल रही थी। वह जल्दी से सीढ़ियाँ उतरकर लॉन की तरफ़ गया।
जब तक वह लॉन में पहुँचा, वह बच्ची वहाँ से जा चुकी थी। वहाँ पर कोई भी नहीं था। उसने इधर-उधर बहुत ढूँढा, पर उसे नहीं मिली। वह इतना तो समझ गया कि बच्ची है तो यहीं पर। कोई बात नहीं, वह यहीं पर है तो उसे मिल ही जाएगी। उसे मिले बिना तो वह वापस नहीं जाएगा।
रात को होटल के हाल में ड्रिंक और खाने-पीने का प्रोग्राम चल रहा था, मगर अर्जुन ने ड्रिंक नहीं की। वह किसी भी हाल में उस बच्ची को ढूँढना चाहता था। रात को खाने-पीने के बाद जब वह अपने रूम में जाने लगा, तो लिफ्ट में वही बच्ची दिख गई।
जब तक भागकर वह उसके पास आता, लिफ्ट बंद हो चुकी थी। उसके साथ दो लड़कियाँ भी थीं, जिनकी शक्ल अर्जुन नहीं देख पाया, क्योंकि लिफ्ट नीचे की तरफ़ गई थी और वह नीचे भागकर भी गया। मगर उसके नीचे पहुँचने से पहले ही लिफ्ट खाली थी, तो उसे समझ नहीं आया कि वह बच्ची किधर गई।
वह अपने कमरे में चला गया। अगले दिन हल्दी का प्रोग्राम था, तो उसने सोच लिया था कि वह हर हाल में उसे ढूँढकर रहेगा। अगली सुबह वह जल्दी ही उठ गया।
हल्दी के प्रोग्राम की पूरी अरेंजमेंट पैलेस के लॉन में की गई थी। जब वह लॉन में पहुँचा, तो उसने देखा कि लॉन को दो भागों में डिवाइड किया हुआ था। एक भाग में लड़के वालों की रस्में चल रही थीं। दूसरी तरफ़ लड़की वालों की।
हल्दी की रस्में चल रही थीं। सभी विलियम को हल्दी लगा रहे थे, मगर अर्जुन का ध्यान सिर्फ़ उस बच्ची को ढूँढने की तरफ़ था। जब उसे बच्ची नज़र नहीं आई, तो वह सोचने लगा कि शायद वह लड़की वालों की तरफ़ होगी।
लड़की वाली साइड पर तो कुछ ज़्यादा ही भूचाल मचा हुआ था। लड़कियों के नाचने-गाने की आवाज़ उसके कानों में पड़ रही थी। उसका मन चाह रहा था कि वह जाकर उस बच्ची को वहाँ पर ढूँढ ले।
मगर वहाँ पर लड़कियों ने पूरा इंतज़ाम किया हुआ था। किसी भी लड़के वाले को उस तरफ़ फटकने नहीं दिया उन्होंने। अर्जुन वहाँ पर पूरे सोच में ही बैठा रहा। हल्दी के प्रोग्राम के दौरान जब अर्जुन विलियम को हल्दी लगाने आया, तो विलियम उससे पूछने लगा,
"...क्या बात है? तुम कुछ परेशान लग रहे हो...?"
"...नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है..."
एक बार तो उसका मन किया कि वह विलियम से बात करके देखे। वह शायद उस बच्ची को जानता होगा। पर फिर वह कुछ सोचकर चुप हो गया।