दिल्लगी 🍁 🍁 (completed) Ch. 1

Tum mere ho - Chapter 1

Posted by Beautiful stories ( R Mann) • Feb 01, 2025 04:39 PM

"..आपकी बेटी हाल से बाहर जा रही है...आपका बच्चा छोटा है...कहीं गुम हो जाए..."। उसे एक साथ गुजरते अधेड़ उम्र के शख्स ने कहा। उसकी बात सुनकर वह हैरान हो गया। उसने गर्दन उठाकर, जिस तरफ उस शख्स ने इशारा किया था, देखने लगा।

तीन-चार साल की एक बच्ची थी, जो जिस हाल में प्रोग्राम चल रहा था, उस हाल से बाहर जा रही थी। वह उठकर खड़ा हो गया और बच्ची को अंदर लाने के लिए गोद में उठा लिया। उसने बच्ची का चेहरा देखा तो वह खुद हैरान रह गया। उसे समझ में आया कि वह शख्स उसे उसकी बच्ची क्यों कह रहा था। अर्जुन मल्होत्रा की आँखें बिल्ली जैसी थीं, भूरे बाल थे, और उसका रंग बहुत गोरा था। वह बच्ची, जिसे वह देख रहा था, बिल्कुल उसके जैसी ही थी; बिल्ली जैसी आँखें थीं। उस बच्ची के गोल्डन ब्राउन बाल थे, जैसे बचपन में उसके थे; हल्के-हल्के कर्ली हेयर थे और बच्ची का रंग बहुत गोरा था, बिल्कुल उसके जैसा। अगर कोई उसकी बचपन वाली फ़ोटो और इस बच्ची को देखे, तो कोई भी कहेगा कि दोनों कितने एक जैसे हैं। वह उसकी ही बच्ची लग रही थी।

वह बच्ची बहुत प्यारी थी ।अर्जुन को उसे देखकर सचमुच बहुत प्यार आया।

बच्ची को उठाकर वह अंदर ले आया। अर्जुन इधर-उधर देखने लगा था कि यह बच्ची किसकी है।

तभी एक औरत उसके पास भागती हुई आई, उससे बच्ची को पकड़ लिया और बोली, "...अच्छा हुआ भाई साहब आप इसे ले आए...इतनी शरारती बच्ची हैं...कहीं टिकती ही नहीं..."।

उसका दोस्त उसके पास आकर बोला, "...वैसे सचमुच उस बच्ची की शक्ल तुमसे कितनी मिलती है...ऐसा लग रहा था...वो तुम्हारी ही बेटी है...कहीं वो तुम्हारी किसी एक्स-गर्लफ्रेंड की बेटी तो नहीं...तुम दोनों की किसी गलती की निशानी हो...मेरे कहने का मतलब है...तुम दोनों के प्यार की निशानी हो..."। वह उसे छेड़ने लगा। वह उसकी रग-रग से वाकिफ था; उसे पता था कि इसकी कितनी सारी गर्लफ्रेंड हैं; वह रोज किसी नई लड़की के साथ होता है।

"..तुम्हारी यह बात तो ठीक है...मेरे रिश्ते बहुत सारी लड़कियों से रहे हैं...मगर मैंने इस बात का हमेशा ख्याल रखा है कि उसका नतीजा ऐसा ना निकले...तुम मुझे अच्छी तरह जानते हो...अर्जुन मल्होत्रा क्या चीज है..."। अर्जुन मल्होत्रा ने मुस्कुराते हुए कहा था।

मगर यह बात अर्जुन मल्होत्रा के दिमाग में खटक रही थी। बच्चे का चेहरा उससे कितना मिलता था! वह बिल्कुल उसके बचपन की कार्बन कॉपी थी। वह सोचने लगा, "...मैं अपने दिमाग पर इतना बोझ क्यों डाल रहा हूँ? अगर किसी के पास मेरा बच्चा होता तो मेरे ही पास आता..."। उसने अपने दिमाग को झटका और इस बात से बाहर निकल गया।

असल में, अर्जुन मल्होत्रा जयपुर में एक डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए आया हुआ था। जिनकी शादी होनी थी, वे लोग बाहर से आए हुए थे। वह लड़का किसी बड़ी कंपनी का मालिक था और उसकी मंगेतर भी वहीं की थी। आज उनकी मंगनी थी, जिसके लिए अर्जुन मल्होत्रा विशेष रूप से आया हुआ था। मंगनी के बाद वह जाने वाला था।

जैसे आज मंगनी थी, बीच में एक दिन मेहँदी और हल्दी थी, और फिर शादी थी। वे बहुत पैसे वाले लोग थे और उन्हें देसी स्टाइल में शादी करनी थी। इसलिए उन्होंने पैलेस के साथ-साथ होटल भी बुक कराया हुआ था जिसमें उनके मेहमान ठहरे हुए थे।

वह लड़का अर्जुन मल्होत्रा को कॉलेज के जमाने से जानता था; उसका सीनियर था; उसके साथ यूनिवर्सिटी में पढ़ता था। जब अर्जुन मल्होत्रा विदेश में पढ़ता था, तो आज उसने अपने सभी पुराने दोस्तों, जो इंडिया में थे, को याद किया था। इसलिए आज अर्जुन मल्होत्रा भी वहाँ आया हुआ था।

जाने से पहले, अर्जुन मल्होत्रा उससे मिलने आया था। वह उससे कहने लगा, "...नहीं, तुम्हें तीन दिन तक रुकना होगा...मेरी शादी और फिर रिसेप्शन के बाद ही जाना..."।

"...नहीं यार...मुझे बहुत जरूरी काम है; आज रात मेरी बहुत जरूरी मीटिंग है...इसके लिए जाना तो मुझे पड़ेगा..."।

उसके बहुत जोर देने पर अर्जुन मान गया। वह उससे कहता है, "...वह उसकी हल्दी के दिन आ जाएगा...फिर हल्दी, शादी और रिसेप्शन होने तक यहीं रहेगा...आज उसे जाने दो..."।

अर्जुन मल्होत्रा एक बड़ा बिज़नेसमैन था। उसके अपने होटल थे; पूरे इंडिया के बड़े-बड़े शहरों में उसके होटल थे। अब वह देश से बाहर भी अपने होटल की चेन खोल रहा था। वह अपनी फ़ील्ड में बहुत सफल था।

वह दिखने में बहुत डैशिंग था। लड़कियाँ उस पर मरती थीं। वह लड़कियों पर लाखों रुपए लुटाता था। लड़कियों को उसका पैसा चाहिए था और उसे लड़कियाँ चाहिए थीं। यह तो वह खुद भी नहीं जानता था कि कितनी लड़कियाँ उसकी ज़िंदगी में आई हैं।

आज वह वापस जा रहा था। उसके दिमाग में वह बच्ची घूम रही थी। सचमुच बहुत प्यारी बच्ची थी, वह सोच रहा था। उसे रह-रहकर उस बच्ची पर प्यार आ रहा था; जब वह बच्ची उसके सामने थी, उस पर इतना प्यार तो उसे तब भी नहीं आया था, जितना दूर जाने पर महसूस हो रहा था। फिर वह सोचने लगा, कोई बात नहीं। जब दोबारा वापस आएगा, उस बच्ची से जरूर मिलेगा। अब उसके मन में उस बच्ची के माँ-बाप से मिलने की तमन्ना जाग पड़ी थी।

उसके फ़ोन पर रिंग होने लगी। उसने देखा, उसकी गर्लफ्रेंड तान्या का फ़ोन था। उसने बात करने के लिए फ़ोन उठा लिया।

"...अर्जुन डार्लिंग, इतना टाइम क्यों लगा दिया...मेरा फ़ोन उठाने में...पहले भी मैंने कितनी बार कॉल किया...तुमने मेरा फ़ोन नहीं उठाया..."।

"...असल में मैं एक शादी में था...वहाँ शोर-शराबा बहुत था...तो मैंने इसलिए फ़ोन नहीं उठाया...क्यों, क्या हुआ...?"

अर्जुन ने कहा था।

"...आज रात मेरे फ़्लैट पर आ जाओ...मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ...बहुत दिन हो गए...हमें मिले हुए..."।

तान्या कहने लगी।

"...नहीं तानिया...आज नहीं...आज मैं घर जा रहा हूँ...माँ-डैड के पास...बहुत दिन हो गए उनके पास गए हुए..."।

अर्जुन का सचमुच आज मूड नहीं था कहीं भी और जाने का।

"...नहीं, प्लीज डार्लिंग, आ जाओ ना...बहुत प्यार आ रहा है तुम पर...कितने दिन हो गए...हम दोनों को एक-दूसरे से प्यार किए हुए..."। तानिया ने जिद की थी के अर्जुन उसके पास आ जाए।

क्या वह बच्ची सचमुच अर्जुन मल्होत्रा की है?

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