Billionaire Forced Bride - Chapter 3
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युग ने उसे और करीब खींच लिया, उसका चेहरा उसके बहुत पास आ गया था। मिष्टी ने तुरंत अपने हाथों से उसे पीछे धकेलने की कोशिश की, लेकिन उसकी ताकत के आगे वह नाकाम रही। उसकी आँखों में आँसू और अधिक तेज हो गए, और उसने कांपते हुए कहा, "युग, प्लीज... ऐसा मत करो।"
लेकिन युग की आँखों में सिर्फ गुस्सा और बदला लेने की भावना थी। उसने उसे अपने पास खींचा, और उसके दुपट्टा को थोड़ा खींचते हुए बोला, "अब मैं तुम्हें दिखाऊँगा कि जब मैं कोई चीज़ चाहता हूँ, तो उसे हासिल करने से मुझे कोई रोक नहीं सकता।"
मिष्टी का दिल अब और ज्यादा जोर से धड़कने लगा, और उसने अपनी आँखें फिर से कसकर बंद कर लीं, खुद को जितना हो सके बचाने की कोशिश करने लगी। उसने काँपते हुए अपने दोनों हाथ सामने रखे, जैसे वह खुद को बचाने की आखिरी कोशिश कर रही हो।
मिष्टी ने अपनी आँखें खोल दीं और युग के चेहरे पर एक नया बदलाव देखा। उसकी आँखों में अब भी गुस्सा था।
युग का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था। उसने मिष्टी की ओर इशारा करते हुए गुस्से से कहा, "तुमने मेरे परिवार की इज्जत मिट्टी में मिलाने की कोशिश की? मेरे परिवार और युग चौहान के खिलाफ जाने की हिम्मत की? अब तुम्हें पता चलेगा इतने बड़े खानदान की इज्जत के साथ खेलने का अंजाम क्या होता है।"
मिष्टी ने सिर झुकाए हुए आंसू भरी आँखों से उसकी बात सुनी। उसके होंठ कांप रहे थे, लेकिन शब्द निकलने से पहले ही उसकी हिम्मत जवाब दे गई। युग का क्रोध इतना विकराल था कि मिष्टी की आवाज़ हलक में फंस कर रह गई। उसने केवल "माफ कर दो" जैसे बुदबुदाया, पर युग के कानों तक ये शब्द नहीं पहुंचे।
युग ने गुस्से में आकर मिष्टी का दुपट्टा झटके से खींचते हुए उतार दिया। मिष्टी का शरीर एकदम डर के मारे कांपने लगा। उसकी आँखों से आंसू और तेजी से बहने लगे, लेकिन युग की आंखों में केवल बदला था, एक ऐसी नफरत जो उसे अंधा कर रही थी।
युग ने उसकी ओर झुकते हुए उसकी गर्दन को अपने होंठों से छुआ। मिष्टी की सांसें थम गईं, जैसे उसकी पूरी दुनिया अचानक थम गई हो। उसने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं, जैसे किसी डरावने सपने से जागने की कोशिश कर रही हो। उसकी हर नस में डर दौड़ रहा था, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। उसकी आँखों से आंसू गिर रहे थे, और उसका शरीर खुद को रोकने के बावजूद कांप रहा था।
युग के हाथ धीरे-धीरे उसकी कमर तक आ पहुंचे। उसने मिष्टी की कमर को इतनी कसकर पकड़ा कि उसे दर्द महसूस हुआ। उसके होंठ मिष्टी की गर्दन पर और भी गहरे से किस करने लगे। उसकी सांसें गर्म थीं, और मिष्टी को जैसे अपनी जान निकलती सी महसूस हो रही थी।
मिष्टी ने एक बार फिर, अपने आप को संभालने की कोशिश की, लेकिन उसकी हिम्मत जवाब दे गई थी। वह पूरी तरह युग के गुस्से और उसकी पकड़ के बीच कैद हो गई थी। उसकी आंखें अब भी कसकर बंद थीं, और उसके दिल की धड़कनें उसे डरा रही थीं। युग की हर हरकत ने मिष्टी को और अधिक डरा कर दिया, लेकिन उसने फिर भी कुछ नहीं कहा। सिर्फ एक ही शब्द उसके दिमाग में घूम रहा था - "मुझे माफ कर दो, प्लीज जाने दो।"
उसके होंठ कांपते हुए, आखिरकार धीरे से बोले, "आई एम सॉरी प्लीज... - उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि शायद खुद उसे भी सुनाई नहीं दी।
युग ने उसकी माफी को नज़रअंदाज़ कर दिया। उसकी पकड़ और कड़ी होती गई, और उसने फिर से मिष्टी की गर्दन पर गहरी किस की। मिष्टी की आँखों से बहते आंसू उसके गालों से टपक रहे थे। उसकी सांसों में डर और दर्द दोनों घुल चुके थे, लेकिन युग का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा था।
उसने एक बार फिर से मिष्टी की तरफ देखा, उसकी आँखों में वही आग थी। "तुम्हें लगता है कि माफी मांगने से सब ठीक हो जाएगा? इतनी आसानी से नहीं, मिष्टी। तुमने जो किया है, उसका अंजाम भुगतना ही पड़ेगा।"
इतना बोलते हुए वह मिष्टी के एकदम नजदीक आ गया और उसके होंठों से अपने होठों को जोड़कर उसे एकदम रफली किस करने लगा।
उसने अपने दोनों हाथ मिष्टी के दोनों साइड की दीवार पर रखे हुए थे और मिष्टी की आंखें कसकर बंद थी उसने अपने होठों को भी कस कर बंद किया हुआ था लेकिन युग के होठों का टच अपने होठों पर महसूस होते ही मिष्टी का पूरा बदन कांप गया और उसे अपनी बॉडी में एक अजीब से हलचल महसूस हुई एकदम से उसके दोनों होंठ अलग हो गए और युग को भी जैसा मौका मिल गया अपना पूरा गुस्सा उतारने का...
मिष्टी को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह युग का किस करने में साथ तो नहीं दे रही थी लेकिन उसे खुद से दूर धकेलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रही थी।
अभी मिष्टी ने एकदम से अपनी आंखें खोल और युग की चेस्ट पर अपना हाथ रखते हुए एकदम से उसे पीछे की तरफ धकेलने की कोशिश करने लगी लेकिन युग तुरंत ही समझ गया और उसने अपने दोनों हाथों से मिष्टी के दोनों हाथों को एकदम कसकर पड़कर पीछे दीवार पर ही लगा दिया और उसके निचले होठों को हल्के से बाइट करने के बाद उसके होठों को छोड़ दिया और उसके चेहरे की तरफ देखा हुआ बोला, "कुछ नहीं होने वाला है तुम्हारे इन नाजुक हाथों से तुम अब कहीं नहीं जा सकती मुझसे बचकर और ना ही मुझे खुद से दूर कर सकती हो अब यही तुम्हारा नसीब है तुम्हें यही रहना है मेरे साथ और इसी तरह मुझे झेलना है मैं हमेशा अपनी मनमानी करूंगा और तुम कुछ नहीं कर सकती।"
मिष्टी को पूरी तरह तसल्ली से किस कर लेने के बाद युग ने अपने होठों को पूछते हुए उसकी तरफ मुस्कुरा कर देखा और यह मुस्कुराहट बिल्कुल भी खुशी की मुस्कुराहट नहीं बल्कि अपनी जीत की मुस्कुराहट थी।
युग की ऐसी बातें सुनकर मिष्टी एकदम अंदर तक कहां पर गई लेकिन जैसे तैसे उसने खुद को संभाला और सिर उठाकर ऊपर सामने की तरफ देखते हुए कहा, "इससे तो अच्छा है तो मुझे मार डालो।"
युग ने चेहरे पर उसी तरह की तिरछी मुस्कुराहट के साथ कहा, "नहीं, बिल्कुल नहीं मैं तुम्हें सजा देना चाहता हूं कोई तोहफा नहीं! जो तुम्हें मार दूंगा और वैसे भी तुम्हारे मरने से कोई फायदा नहीं है मेरा और तुम्हें भी तो कोई सबक नहीं मिलेगा मुझे तो तुम्हें अच्छा सबक सिखाना है जिससे दोबारा कोई भी चौहान परिवार के खिलाफ जाने की हिम्मत ना कर सके।"
मिष्टी की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे और उसने उसी तरह रोते हुए कहा, "मैं.. मैं किसके खिलाफ नहीं जाना चाहती थी प्लीज़ प्लीज़ इस बात को समझो मैं... मैं बस"
युग ने एकदम गुस्से भरी लाल आंखों से उसकी तरफ देखते हुए कहा, "कुछ नहीं समझना है मुझे, तुमने जो शुरू किया है उसे मैं खत्म करूंगा अपने तरीके से इसलिए भूल जाओ कि तुम अब यहां से निकल सकती हो और तुम्हारी कोई भी दलील नहीं सुननी मुझे, क्योंकि अब तुम यहां आ चुकी हो मेरी दुनिया में और अब मैं तुम्हारी जिंदगी नरक बना दूंगा तुम्हें भी पता चलेगा जीते जी नर्क में रहना कैसा होता है, welcome to the hell, मिसेज मिष्टी युग चौहान।"
युग की ऐसी बातें सुनकर मिष्टी के दिल की धड़कनें बढ़ चुकी थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कि युग अब आगे उसके साथ और क्या करने वाला है लेकिन तभी युग में एकदम से उसके दोनों हाथों को छोड़ दिया और पीछे हट गया।
जैसे ही पीछे हुआ मिष्टी रोते हुए दीवार से लग कर सरकती हुई वहीं नीचे जमीन पर बैठ गई, उसका दुपट्टा कब का सर उतर कर नीचे जमीन पर गिर चुका था, अभी उसकी हालत बहुत ही खराब थी वह लगातार रोती जा रही थी युग ने एक नजर उसकी तरफ देखा लेकिन वह उसके इन आंसुओं को देखकर पिघलने नहीं चाहता था इसलिए उसने तुरंत ही अपनी नजर फिर ली और फिर एकदम ही दरवाजे से बाहर निकल गया और बाहर जाते हुए उसने दरवाजा भी पटक कर बंद कर दिया था।
मिष्टी अपनी जगह से हिले डुले बिना वहीं पर बैठकर रोती रही और उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और कैसे इस सिचुएशन से बाहर निकलें क्योंकि उसे कोई भी रास्ता नजर नहीं आ रहा था।
To Be Continued
आज का एपिसोड कहां गया है युग और क्या इसी तरह वह निकालता रहेगा मिष्टी पर अपना गुस्सा? और क्या वह कभी सुनेगा उसकी बात और एक मौका देगा उसे और ऐसा क्या किया है मिष्टी ने? क्या सच में उसने ऐसा कुछ किया भी है या फिर युग को कोई गलतफहमी है? क्या लगता है आप लोगों को बताइए कमेंट में