Billionaire Forced Bride Ch. 1

Billionaire Forced Bride - Chapter 1

Posted by Simran Ansari • Jan 19, 2025 03:42 PM

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राजस्थान, जयपुर, एक बहुत ही बड़ा खूबसूरत महल जैसा दिखने वाला बंग्ला जिसके चारों तरफ रोशनी जगमगा रही थी।

इस बंगले के बड़े से लिविंग हॉल में शादी का मंडप राजसी शान से सजा हुआ था। चारों ओर रंग-बिरंगे फूलों की महक और जगमगाती लाइट्स की चमक बिक्री हुई थी।

लेकिन उस धूमधाम के बीच, सबके उतरे हुए चेहरे भी नजर आ रहे थे और उन में एक लड़की का दिल पूरी तरह से टूट कर बिखर रहा था। वह एकदम खोई हुई सी सीढ़ियां उतर रही थी।

उसे लड़की का नाम था, मिष्टी उपाध्याय, 21 साल की खूबसूरत है कत्थई आंखों वाली लड़की जिसने इस वक्त लाल रंग का खूबसूरत लहंगा पहना हुआ था, अपनी आँखों में आंसू लिए खड़ी थी। उसके चेहरे पर न कोई भारी मेकअप था और न ही कोई गहने, उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कि वह लहंगा भी उसे जबरदस्ती ही पहनाया गया हो।

एक लड़की ने आगे आते हुए लहंगे के दुपट्टे से उसका घूंघट कर दिया, दिखने में वह लड़की बहुत ही ज्यादा खूबसूरत थी बिना मेकअप के भी आज बस उसकी सादगी और सुंदरता ही उसके साथ थीं। पर आज, वह अपनी सुंदरता महसूस करने के काबिल नहीं थी।

मिष्टी बस बुरी तरह से घबराई हुई थी, क्योंकि युग चौहान, चौहान परिवार का बड़ा बेटा जो एक घमंडी गुस्सैल और जिद्दी इंसान था, इतने में वह बहुत ही ज्यादा हैंडसम था, 6 फीट हाइट और एकदम कसी हुई बाॅडी, इस वक्त उसने वेलवेट की ब्लैक कलर की शेरवानी पहनी हुई थी जिस पर गोल्डन वर्क था और बहुत ही महंगा डायमंड का ब्रोक उसकी शेरवानी पर लगा हुआ था और उसकी डार्क ब्राउन आंखें इस वक्त गुस्से से लाल हो रखी थी हमेशा की तरह गुस्सा उसकी नाक पर नजर आ रहा था।

जिस तरह से वह मिष्टी की तरफ देख रहा था साफ पता चल रहा था कि वह सारा गुस्सा सिर्फ और सिर्फ मिष्टी के लिए ही था। वो आगे आया और उसके आगे आते ही वह लड़की जो मिष्टी का घूंघट ठीक कर रही थी, तुरंत ही किनारे हट गई और युग ने मिष्टी की तरफ देखकर कहा, "अब यहां क्यों खड़ी हो चलो शादी की सारी तैयाकियारा ं हो गई है मुझे अब तुम्हारा कोई भी नाटक नहीं चाहिए।"

मिष्टी के कानों में युग की आवाज पड़ी लेकिन फिर भी वह अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं मिली युग अब तक काफी ज्यादा किला चुका था वह पहले ही गुस्से में लग रहा था इसलिए वह उसका हाथ पकड़कर उसे जबरदस्ती मंडप की ओर खींचकर ले जाने लगा।

युग के कदम तेज और उसकी पकड़ मिष्टी के हाथों पर मजबूत थी।

युग के इस तरह से खींचने पर मिष्टी को जैसे झटका लगा और वह होश में आई तो उसने युग के हाथ पर मारते हुए कहा, "छोड़ो मुझे, कहां लेकर जा रहे हो? मुझे ये शादी नहीं करनी!"

मिष्टी की तरफ देखे बिना ही युग ने उसकी बात का जवाब दिया, "यह शादी तो आज होकर रहेगी, इसी मंडप में तुम चाहो या ना चाहो।" उसने ठंडे लहजे में कहा, उसकी आँखों में क्रोध की चिंगारी थी।

मिष्टी ने कांपती हुई आवाज़ में कहा, "लेकिन, युग… मैं.. मैं यह शादी नहीं कर सकती प्लीज मुझे छोड़ दो, जाने दो।"

मिष्टी की आंखों से लगातार आंसू निकल रहे थे और उसने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की, पर युग ने उसे और कसकर पकड़ लिया।

युग ने गुस्से में कहा, "तुम्हें पहले यह सोचना चाहिए था कि अपने दोस्त की मदद करके तुम किसके खिलाफ जा रही हो लेकिन तब तुमने नहीं सोचा तो अब तुम्हें अंजाम भुगतना होगा, "तुम्हारी गलती की सज़ा यही है।"

मिष्टी ने युग की आंखों में देखा, और उसे वह कोल्ड हार्टेड, गुस्सैल इंसान नजर आया जिसे वह कभी अच्छा इंसान समझती थी। लेकिन आज वह एक शैतान के रूप में दिख रहा था। वह अंदर से काँप उठी, और उसका दिल खौफ से भर गया।

मिष्टी ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए कहा, "नहीं प्लीज मैं तुम्हारे खिलाफ या किसी के भी खिलाफ नहीं जाना चाहती थी मैं सिर्फ अपने दोस्त, विहान की मदद कर रही थी। मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि तुम्हारी शादी कियारा से होने वाली थी नहीं तो मैं कभी भी ऐसा कुछ नहीं करती!"

मिष्टी ने अपनी तरफ से सफाई देने की पूरी कोशिश की लेकिन युग ने उसकी एक न सुनी।

वहां पर हो रही शादी का माहौल इस वक्त बिलकुल ही बदल चुका था जो लोग अब तक खुशियां मना रहे थे अब वहां पर हो रही उसे जबरदस्ती की शादी को उत्सुकता भरी नजरों से देख रहे थे और इस बात को लेकर उत्सुक थे कि अगले ही पल आप वहां क्या होने वाला था।

युग की आंखों में जुनून और गुस्सा साफ नजर आ रहा था लेकिन मिष्टी की आँखों में केवल डर और आंसू थे। युग उसे जबरदस्ती खींचते हुए मंडप तक ले आया, जहाँ अब मिष्टी उसकी दुल्हन की जगह खड़ी थी।

युग ने गुस्से में लगभग उसे धमकी देते हुए कहा, "तुम्हारे पास कोई और रास्ता नहीं है, बहुत हो गया तुम्हारा नाटक अब चुपचाप मुझसे शादी करो नहीं तो जितनी बदनामी मेरी और मेरे परिवार की होगी उतना ही बुरा तुम्हारे लिए होगा।"

वहां पर मौजूद सारे लोग जो चारों तरफ एक भीड़ बनकर खड़े थे उनमें से कुछ उनकी बातें सुन रहे थे, पर किसी ने युग खिलाफ जाकर उससे कुछ भी पूछने की हिम्मत नहीं की।

मिष्टी ने फिर से अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन युग की पकड़ और मजबूत हो गई। उसने मिष्टी को मंडप में बैठा दिया और खुद उसके बगल में बैठकर पंडित की तरफ देखते हुए कहा, "शादी की रस्में शुरू करिए ज्यादा वक्त नहीं है हमारे पास इन सब के लिए..."

युग का आदेश सुनते ही पंडित ने शादी की रस्में शुरू कर दीं।

मिष्टी ने आंसू भरी आंखों के साथ उसकी तरफ देखकर एक आखरी बार कहा, "युग, मैं ये सब नहीं चाहती! प्लीज रुक जाओ।"

युग ने एकदम भारी आवाज में कहा, "तुम्हारी चाहत मेरे लिए कोई मायने नहीं रखती, यहां पर बस वही होता है जो युग चौहान चाहता है और अब तुम्हारे मुंह से एक शब्द भी ना निकले नहीं तो मुझे भी नहीं पता मैं क्या करूंगा।"

युग को इतने गुस्से में देखकर मिष्टी एकदम चुप हो गई और पंडित ने मंत्र पढ़ने शुरू किए, युग ने मिष्टी का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने पास खींच लिया। उसने धीरे से मिष्टी के हाथों को अपने में समेटा, लेकिन मिष्टी ने बेमन से उसका हाथ थाम लिया।

कुछ देर के बाद पंडित ने उन दोनों की तरफ देखते हुए कहा, "अब आप दोनों फेरे के लिए खड़े हो जाइए।"

पंडित की बात सुनते ही युग तुरंत अपनी जगह पर उठकर खड़ा हो गया लेकिन मिष्टी अभी भी वैसे ही एक मूर्ति की तरह अपनी जगह पर बैठी रही और जरा सा भी नहीं हिली तो युग ने गुस्से में अपने दांत पीसते हुए उसकी तरफ एक नजर देखा और थोड़ा सा झुकते हुए कहा, "बिना कोई नाटक किए चुपचाप से फेरों के लिए खड़ी हो जाओ या फिर अब सुनाई भी नहीं दे रहा है तुम्हें बहरी हो गई हो।"

युग के इस तरह गुस्से में बोलने का भी मिष्टी पर कोई असर नहीं हुआ वह जैसे एकदम बेजान सी हो गई थी और उसे शब्द सुने तो दे रहे थे लेकिन जैसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था तो युग ने खुद ही उसकी बांह एकदम कसकर पकड़ी और उसे खींचकर अपने साथ सीधा खड़ा कर लिया।

मिष्टी एकदम ढीली सी किसी बेजान लाश की तरह उठकर तो खड़ी हो गई लेकिन अभी भी वह अपने कदम आगे नहीं बढ़ा रही थी तो युग ने उसका हाथ अपने हाथों में एकदम कसकर पकड़ और उसे साथ लेकर फेरे लेने लगा।

जैसे ही फेरे शुरू हुए, मिष्टी के दिल में डर और घबराहट होने लगीं। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, खुद को इस सिचुएशन से निकालने की पूरी कोशिश की, लेकिन युग चौहान के सामने उसकी हर कोशिश नाकाम साबित हो गई थी।

मिष्टी ने युग की तरफ देखते हुए कहा, "तुम यह सब कुछ करके क्या हासिल कर लोगे? यह सिर्फ एक जबरदस्ती की शादी रहेगी और जबरदस्ती का रिश्ता क्या मिलेगा तुम्हें मुझे अपनी जबरदस्ती की बीवी बनाकर मैं कभी तुम्हें नहीं अपनाऊंगी।"

युग ने बहुत ही कड़वाहट से जवाब दिया, "जबरदस्ती की बीवी बनना, यही तुम्हारी किस्मत है और तुम्हें अब इस पहचान के साथ ही रहना होगा और मैं भी कभी तुम्हें पूरे दिल से नहीं अपने वाला जो भी तुमने मेरे साथ किया उसके बाद तो बिल्कुल भी नहीं यह शादी नहीं तुम्हारे लिए एक सजा की शुरुआत होगी।"

बात करते हुए उन दोनों ने सारे फेयर खत्म किया और जब उन्होंने अंतिम फेरा लिया, मिष्टी की आँखों में आंसू थे, लेकिन युग के चेहरे पर कोई भी एक्सप्रेशन नहीं था उसका गुस्सा भी अब गायब हो चुका था या फिर शायद उसके उसे एक्सप्रेशंस फेस के नीचे कहीं छिपा हुआ था।

To Be Continued

धमाकेदार शुरुआत है ना कहानी की? सिर्फ यह पहला भाग पढ़ कर आप सब को कितना समझ में आया और कितना नहीं, जरूर बताओ कि आखिर कहानी में क्या चल रहा है ये बस पहला भाग है लेकिन काफी ज्यादा सस्पेंस है, शुरुआत तो ऐसी ही होने वाली थी इस कहानी की बस अब आप लोगों को अच्छी लगेगी इतना हम गारंटी दे सकते हैं आगे भी!

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