Cruel hearted lover' - Chapter 3
६ महीने में आठवें पुलिस वाले की इतनी बेरहमी से मौत ने पूरे शहर में बवाल मचा दिया था। हमेशा की तरह, यह अखबारों में प्रमुख समाचार बन चुका था; एक और पुलिस वाले की दर्दनाक और खतरनाक मौत राणा के हाथों हुई थी।
जी हाँ, पूरे शहर में राणा का नाम ही काफी था। राणा को किसी ने नहीं देखा था, लेकिन उसके खतरनाक कामों को शहर का बच्चा-बच्चा जानता था। हर कोई जानता था कि राणा एक ऐसा तूफान है जिसमें अब तक कितने ही पुलिस वाले बह चुके थे।
एक बार फिर, बड़े-बड़े मीडिया ने पुलिस वालों को ट्रोल करना शुरू कर दिया था। नेताओं की भी मुश्किल बढ़ गई थी। किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि राणा को कैसे पकड़ा जाए, क्योंकि अब तक जितने भी बेहतरीन पुलिस वाले राणा को पकड़ने भेजे गए थे, वे सब मारे जा चुके थे।
और न केवल मारे गए थे, उनकी मौत इतनी दर्दनाक थी कि देखने वालों की रूह काँप जाती थी। राणा का दूसरा नाम ‘मौत का फ़रिश्ता’ था। हर कोई उसे ‘मौत के फ़रिश्ता’ के नाम से पुकारता था।
जल्दी ही सभी न्यूज़ चैनलों पर टीआरपी की बाढ़ आ गई थी, क्योंकि राणा की खबर शहर के हर किसी की पसंदीदा खबर थी। हर कोई राणा की खबर देखना पसंद करता था।
राणा के आदमी भी उसकी खबर को सुपरहिट फिल्म की तरह देखते थे और शोर मचाते थे। उन्हें ऐसा लगता था मानो उन्होंने बड़ी जीत हासिल कर ली हो, क्योंकि चारों तरफ़ सिर्फ़ राणा का ही नाम सुनाई देता था।
लेकिन राणा को न्यूज़ पेपर या हेडलाइन से कोई फ़र्क नहीं पड़ता था। उसका एक ही मकसद था: सभी पुलिस वालों को मारना, उनका नामोनिशान मिटा देना। ऐसा लगता था मानो उसने पुलिस वालों को मारने का ठेका ले लिया हो, जैसे घर बनाने का ठेका लेते हैं।
वहीं, रिमझिम अगली सुबह ठीक ६:०० बजे तैयार होकर खड़ी थी। हालाँकि वह आधी रात के बाद सोई नहीं थी, लेकिन उसके चेहरे की ताज़गी बिल्कुल भी कम नहीं हुई थी।
उसके चेहरे पर एक अलग तेज था, जो किसी को भी मोहित कर सकता था। रिमझिम एक दुबली-पतली, बहुत खूबसूरत लड़की थी और उसके चेहरे पर हल्के-हल्के डिम्पल उसे और भी खूबसूरत बनाते थे।
उसके लंबे, गहरे, घने बाल थे, जिन्हें वह हमेशा गुंथकर बाँधती थी।
रिमझिम ने अपना साधारण सूट पहना था और अपनी खूबसूरत काली आँखों पर एक छोटा सा चश्मा लगा लिया था। जैसे ही वह बाहर आई, उसने देखा कि उसकी माँ खड़ी होकर उसका इंतज़ार कर रही थी।
रिमझिम की माँ का नाम सरिता अग्रवाल और पिता का नाम मयंक अग्रवाल था। मयंक और सरिता की एक ही बेटी थी।
मयंक और सरिता की जान अपनी बेटी रिमझिम में बसती थी। रिमझिम भी अपने माता-पिता से बहुत प्यार करती थी। तब रिमझिम की माँ ने कहा था, "बेटा, आज की न्यूज़ देखी तुमने? एक बार फिर उस राणा ने किसी पुलिस वाले की जान ले ली है।"
जैसे ही उसकी माँ ने उसे बताया कि एक और पुलिस वाले का मर्डर हो चुका है, रिमझिम की आँखें हैरत से फटी रह गई थीं, क्योंकि रिमझिम एक क्राइम रिपोर्टर थी।
रिमझिम ने अपनी माँ की ओर देखते हुए कहा था,
"ओफ़्फ़ो! माँ! क्या वाकई आप सच कह रही हैं? फिर तो मुझे अभी निकलना होगा! ऑफ़िस में बहुत काम होगा।
ये राणा जब भी किसी का मर्डर करता है, ऑफ़िस का काम दोगुना बढ़ जाता है। और अगर मैं समय पर नहीं गई, तो बॉस मेरी छुट्टी कर देंगे।"
तब रिमझिम के पिता, मयंक अग्रवाल, हँसते हुए आए थे और बोले थे,
"अरे मेरी प्यारी बहादुर बेटी! रुक जाओ! पहले नाश्ता कर लो, क्योंकि मैंने तुम्हारे बॉस से बात कर ली है कि तुम ८:०० बजे तक आओगी।"
उसके पिता की बात सुनकर रिमझिम उन्हें घूरकर देखने लगी थी और बोली थी,
"ओह हो! पापा! मैंने आपसे कितनी बार कहा है? अपनी दोस्ती अपने कामों के लिए रखा करो! मेरे मामले में बिल्कुल मत बोला करो! मुझे पसंद नहीं है! वे मेरे बॉस हैं! मुझे उनका हर आर्डर मानना होगा! आप मेरी बात क्यों नहीं समझते हो?"
ऐसा कहते हुए रिमझिम जल्दी से एक सेब हाथ में उठाकर और एक हाथ में अपना बैग उठाकर बाहर निकल पड़ी थी। मयंक और सरिता उसे रोकते ही रह गए थे, लेकिन वह नहीं रुकी थी। उसने अपनी स्कूटी स्टार्ट की और अपने ऑफ़िस की ओर रवाना हो गई थी।
उसके जाने के बाद सरिता ने मयंक से कहा था,
"आपने अपने दोस्त वैभव जी से बात करके इसको क्रिमिनल रिपोर्टिंग में तो लगा दिया है,
लेकिन आज तक इस लड़की की कैमरे के सामने आने की हिम्मत ही नहीं हुई है। आखिर कब तक ऐसा चलेगा? आप अच्छी तरह से जानते हैं कि हमारी बेटी कितनी कमज़ोर है। वह अभी तक अपने अतीत से उभरी नहीं है।
मैं जानती हूँ कि उसके अतीत से उभरने के लिए ही आपने उसकी नौकरी एक ऐसे फील्ड में लगवाई है जहाँ पर क्रिमिनल से वास्ता पड़ता ही रहता है,
और भला हमारी कमज़ोर सी बेटी कैसे इन क्रिमिनल का सामना करेगी? कैसे उनसे सवाल-जवाब करेगी? कैसे उन पर रिपोर्ट तैयार करेगी? क्योंकि आज तक वह अपने अंदर के डर को ख़त्म नहीं कर पाई है। भले ही आपने अपने कनेक्शन को यूज़ करके उसे एक क्रिमिनल रिपोर्टर बना दिया हो, लेकिन उसमें इतनी हिम्मत नहीं है कि वह रिपोर्टिंग कर पाए।"
तब मयंक उठा और सरिता के कंधों पर हाथ रखते हुए बोला था,
"मैं जानता हूँ तुम क्या कहना चाहती हो, लेकिन मैं भी एक बाप हूँ। मैं अपनी बेटी को इस तरह से हालातों से डरते हुए, घबराते हुए नहीं देख सकता हूँ। और उसे मैं क्रिमिनल रिपोर्टिंग में इसीलिए लगवाया है ताकि वह धीरे-धीरे ज़िंदगी का सामना करे और देखे कि उसके आस-पास क्या हो रहा है। और मुझे लगता है यह जो राणा है, अगर हमारी बेटी उसके बारे में न्यूज़ देगी, तो मुझे पूरी उम्मीद है कि उसके अंदर का जितना भी डर है, वह सब ख़त्म हो जाएगा।"
यह सुनकर सरिता घूरकर अपने पति को देखने लगी थी और बोली थी,
"आपकी हिम्मत कैसे हुई ऐसा कहने की? क्या आप जानते नहीं हैं कि वह राणा कितना खतरनाक है? उसे आज तक देश की पुलिस नहीं पकड़ पाई है। पुलिस वालों की वह जान लेने में लगा हुआ है, और आप चाहते हैं कि मेरी, मेरी फूल सी बेटी, उस जल्लाद राणा के बारे में जानकारी निकाले? नहीं! नहीं! नहीं! मेरी बेटी डरी-सहमी सी ही ठीक है, और मुझे वह ऐसे ही पसंद है। मैं नहीं चाहती कि मेरी बेटी के अंदर किसी भी तरह की कोई हिम्मत-ताक़त आए! समझे आप?"
ऐसा कहकर सरिता किचन में चली गई थीं और बोली थीं,
"मैं चाय लेकर आती हूँ। पी लीजिये, और ये फालतू बातें आगे से मेरे सामने मत कीजिएगा।"
सरिता की बात सुनकर मयंक कुछ सोचता हुआ मुस्कुरा दिया था। वहीं दूसरी ओर, राणा अपने आदमियों का शोर-शराबा सुनकर कमरे से बाहर आ गया था।
और जैसे ही उसने देखा कि उसकी न्यूज़ को देखकर उसके आदमी बुरी तरह से हल्ला-गुल्ला कर रहे थे, शोर मचा रहे थे, तो वह जाकर ठीक टीवी के सामने खड़ा हो गया। और जैसे ही उसके आदमियों की नज़र राणा पर पड़ी, वे सब एकदम से शांत हो गए, जहाँ थे वहीं जम गए, मानो किसी ने उन्हें स्टैचू कर दिया हो। सभी की हालत खराब हो गई थी।
तब देव धीरे से उठा था और राणा के सामने हाथ बाँधकर सिर झुकाकर खड़ा हो गया था। तब राणा ने देव से कहा था,
"मुझे प्यास लगी है। पता लगाओ नया पुलिस अफ़सर कब आ रहा है।
साथ ही साथ मुझे कुछ खाना भी है, इसीलिए इंतज़ाम करो। और याद रहे, मैं कम से कम चार-पाँच पुलिस वालों को खाना चाहता हूँ, तो सबकी डिटेल निकालकर मेरे सामने जमा करो। समझे तुम लोग?
और ये फालतू के नाटक बंद करो और जल्दी से काम पर जुट जाओ।"
राणा ने अपने मुँह से कहा था कि उसे प्यास और भूख दोनों लगी है, तो इसका मतलब साफ़ था कि एक बार फिर राणा शहर में तबाही मचाने के लिए तैयार था।